पशुपालन

कड़कनाथ मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बन सकते हैं छत्तीसगढ के किसान

डॉ. हेम प्रकाश वर्मा, ऋतम्भरा बरेठ एवं संकेत कौशिक

प्रस्तावना : वर्तमान में हमारे देश आत्मनिर्भर कृषि के ऊपर काफी जोर दिया जा रहा है और इस दिशा में कड़कनाथ मुर्गी पालन, अतिरिक्त आय, पोषक आहार और रोजगार सृजन की दिशा काफी कारगर साबित होगा। कड़कनाथ मुर्गी मुख्यत काले रंग का दुर्लभ मुर्गी का नस्ल है जिसका मूल निवास मध्यप्रदेश के धार और झाबुआ जिला हैं। वर्तमान समय में कड़कनाथ मुर्गी पालन कम समय में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। कड़कनाथ मुर्गी का मांस, खून, नाखून और पूरा शरीर काले रंग होने की वजह से ही स्थानीयध्आम भाषा में कालामासी भी कहा जाता है। एक अनुसंधान के अनुसार इसके मांस में सफेद चिकन के मुकाबले कोलस्ट्रोल का स्तर कम रहता है जिससे ह्रदयघात की संभावना कम होती है जबकि अमीनो अम्ल, प्रोटीन की स्तर अधिक होता है। मूल रूप से कड़कनाथ मुर्गी पालन छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कांकेर और दंतेवाड़ा में किया जाता है परन्तु अब सभी जिलों के किसान कड़कनाथ मुर्गी पालन करके अधिक मुनाफा कमा रहें है। इसके काले मांस में औषधिय मूल्यों के कारण बाजार में इसका अधिक मांग साल भर बना रहता है। इसका स्वाद भी अन्य मुर्गियों के मुकाबले अच्छा होता है और इसका सेहतमंद गुण अधिक होने के कारण मशहूर है।

कड़कनाथ मुर्गे की नस्ल किसी भी तरह के वातावरण के लिए अनुकूल है तथा इसके रखरखाव और प्रबंधन के लिए ज्यादा खर्च नहीं लगता है, इस वजह से इसका पालन छोटे और सीमांत किसान, महिलाएं, स्व सहायता समूह और युवा आसानी से कर सकते हैं।

कड़कनाथ मुर्गी

कड़कनाथ मुर्गी के अंडे एवं चूजे

कड़कनाथ मुर्गी एवं अन्य मुर्गियों के साथ तुलनात्मक विवरण

विवरण अन्य मुर्गी कड़कनाथ मुर्गी
मांस 170-200 प्रति किलो 500-650 प्रति किलो
अंडा 8 रू प्रति नग 15-25 रू प्रति नग
चूजा 30 रू प्रति नग 80 रू प्रति नग
प्रोटीन 18% से 20% 25%
वसा 13% से 25% 0.73% से 1.03%
कोलेस्ट्रॉल 218.12 मि.ग्रा. प्रति 100 ग्राम 184.75 मि.ग्रा प्रति 100 ग्राम

कड़कनाथ मुर्गी के औषधिय गुण एवं पालन की मुख्य विशेषताएं

  • अंडों का उपयोग सिरदर्द, प्रसव के बाद की समस्याओं, अस्थमा और नेफ्रेटिस के इलाज के लिए किया जाता है।
  • विटामिन बी 1, बी 2, बी 6, बी 12, सी, ई, नियासिन, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन ओर निकोटिनिक अम्ल पाया जाता हैं।
  • 4 से 5 महीने में शरीर भार 1 किलोग्राम तक हो जाता हैं।
  • 5 से 6 महीने में मुर्गियां अंडा देना प्रारंभ होता है।
  • एक वर्ष में मुर्गियां की लगभग 90 से 120 तक अंडे देने की क्षमता होती है।
  • अंडो से चूजा उत्पादन की दर लगभग 60 से 70: होती है।
  • रोग प्रतिरोधक शक्ति अधिक होती है।
  • कड़कनाथ मुर्गी को खुले वातावरण में भी आसानी से पालन किया जा सकता है।
  • एक किलोग्राम कड़कनाथ मुर्गा का बाजार मूल्य लगभग 500 से 650 रूपये प्रति किलो और अंडे 15 से 25 रूपये में आसानी से बिक जाता है।
  • एक परिवार एक कड़कनाथ मुर्गी पर प्रतिवर्ष लगभग 5000 रूपये कमा सकता है।

इस प्रकार ग्रामीण किसान, महिलाएं, स्व सहायता समूह और युवा कम समय में कड़कनाथ मुर्गी पालन करके अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं जिससे ग्रामीण इलाकों में किसानों का दूसरे राज्यों में पलायन भी कम होगा।

लेखकगण:

डॉ. हेम प्रकाश वर्मा, यंग प्रोफेशनल, राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, बरोंडा, रायपुर, छत्तीसगढ
ऋतम्भरा बरेठ, एम. एस. सी., पादप रोग विज्ञान विभाग, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ
संकेत कौशिक, एम. एस. सी., शस्य विज्ञान विभाग, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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