पशुपालन

स्वच्छ दूध उत्पादन: सही दुहन से बेहतर स्वास्थ्य और ज्यादा मुनाफा

डॉ. मोहम्मद काशिफ रज़ा, डॉ. शैलेश विशाल, डॉ. देवेश कुमार गिरी, डॉ. गोविना देवांगन

स्वच्छ दूध क्या है

स्वस्थ दूधारू पशुओं से निकाला हुआ ऐसा दूध जो साफ व सूखे बर्तन में संग्रहित हो, धूल, मक्खियों, गोबर व घास जैसी गंदगियों से रहित हो, जिसमें दुध कें प्राकृतिक अवयव एवं स्वाद मौजूद हो, जीवाणुओं की मात्रा कम हो एवं मनुश्य के उपभोग हेतु सुरक्षित हो स्वच्छ दूध कहलाता है।

स्वच्छ दुग्ध उत्पादन की आवश्यकता

दूध जीवाणुओं के लिए एक उत्तम व पौश्टिक माध्यम है जिसके कारण ठीक से नही रखने पर यह जल्द ही खराब हो जाता है। दूध दोहन, शीतलीकरण व संग्रहण के दौरान दूशित होकर अंततः मनुश्य के लिए अनुपयोगी हो जाता है। अतः दूध की गुणवत्ता संरक्षित रखने हेतु स्वच्छ दुग्ध उत्पादन अति अवश्यक है।

स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के चरण

दूध की गुणवत्ता बनाए रखने और संदूषण रोकने के लिए निम्न 10 महत्वपूर्ण चरण अपनाए जाते हैं:

  1. बर्तनों की स्वच्छता
  • दुहन के लिए हमेशा साफ और पूर्णतः कीटाणुरहित बर्तनों का उपयोग करें
  • दूध रखने के लिए स्टेनलेस स्टील या उच्च गुणवत्ता वाले बर्तन प्रयोग करें
  • बर्तनों को अच्छी तरह धोकर साफ रखें
  1. पशु को नियंत्रित करना
  • दुहन से पहले पशु के पिछले पैरों को बांध दें
  • इससे पशु के हिलने-डुलने या लात मारने से गंदगी दूध में गिरने से बचती है
  1. पशु की सफाई
  • दुहन से पहले पिछला भाग और थन के आसपास का क्षेत्र साफ पानी से धोएं
  • इससे धूल, बाल और गंदगी दूध में जाने से बचती है
  1. हाथों की स्वच्छता
  • दुहने वाले व्यक्ति को साबुन और पानी से हाथ धोने चाहिए
  • साफ हाथ जीवाणुओं के संक्रमण को रोकने में पहली सुरक्षा हैं
  1. थन की तैयारी
  • दुहन से पहले थनों को थन डिप घोल (जैसे आयोडोफोर या पोटैशियम परमैंगनेट) में डुबोएं
  • इसके बाद थनों को साफ सूती कपड़े से सुखाएं
  1. सही दुहन विधि
  • फुल हैंड विधि (पूरा हाथ लगाकर दुहना) अपनाएं
  • नकलिंग (अंगूठे के जोड़ से दुहना) से बचें
  • यह पशु के लिए आरामदायक है और चोट व संक्रमण का खतरा कम करता है
  1. 7. समय की नियमितता
  • प्रतिदिन एक ही समय पर दुहन करें
  • सुबह-शाम निश्चित समय रखें
  1. 8. दूध का तुरंत ठंडा करना
  • दुहन के तुरंत बाद दूध को छानें
  • 4°C तक ठंडा करें (यदि संभव हो)
  • देर तक खुला न रखें
  1. दुहन के बाद देखभाल
  • दुहन के बाद थनों को फिर से थन डिप घोल में डुबोएं
  • इससे थन नलिका बंद होती है और थनैला जैसे रोगों से बचाव होता है
  1. कपड़े की स्वच्छता
  • थन पोंछने वाले कपड़े को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाएं
  • अगली बार उपयोग से पहले सुनिश्चित करें कि कपड़ा पूरी तरह साफ और कीटाणुरहित हो

इन चरणों का महत्व

जीवाणु नियंत्रण

  • स्वच्छता से दूध में बैक्टीरिया कम होते हैं
  • दूध की संरक्षण अवधि बढ़ती है

पशु स्वास्थ्य

  • थनैला जैसे रोगों से बचाव
  • पशु स्वस्थ रहता है

बेहतर बाजार मूल्य

  • स्वच्छ दूध उपभोग के लिए सुरक्षित होता है
  • बाजार में अधिक कीमत मिलती है

स्वच्छ दूध उत्पादन के लाभ

✔ दूध की गुणवत्ता बेहतर
✔ अधिक कीमत मिलती है
✔ उपभोक्ता सुरक्षित
✔ डेयरी में रिजेक्शन कम
✔ पशु स्वस्थ रहते हैं

दुग्ध दुहन  क्या है?

दुग्ध दुहन का अर्थ है गाय/भैंस के थनों से सही विधि से दूध निकालना।
सही दुहन विधि से:

✔ अधिक दूध प्राप्त होता है
✔ थनैला रोग से बचाव होता है
✔ दूध की गुणवत्ता अच्छी रहती है

दुग्ध दुहन की प्रमुख विधियाँ

🖐 1. हाथ से दुहन

(A) फुल हैंड विधि – ✔ सबसे उचित

  • पूरा थन हाथ में लेकर ऊपर से नीचे दबाएं
  • उंगलियों से पूरा दबाव समान रूप से दें
  • थन को खींचें नहीं

👉 यह सबसे सुरक्षित और सही तरीका है।

(B) नकलिंग विधि  – ❌ अनुचित

  • अंगूठे के जोड़ से दबाना
  • थन को नुकसान पहुंचा सकता है

⚙ 2. मशीन द्वारा दुहन

✔ बड़े डेयरी फार्म के लिए उपयुक्त
✔ समय की बचत
✔ स्वच्छता अधिक

⚠ मशीन साफ और सही तरीके से सैनिटाइज होनी चाहिए।

 निष्कर्ष

स्वच्छ दुग्ध उत्पादन एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो दूध की गुणवत्ता, पशु स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा तीनों को सुनिश्चित करती है। यदि दुहन के समय स्वच्छता, सही विधि और उचित प्रबंधन का पालन किया जाए, तो दूध में जीवाणुओं की मात्रा कम रहती है, उसकी संरक्षण अवधि बढ़ती है और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।

सही दुहन विधि, जैसे फुल हैंड मिल्किंग, न केवल पशु के लिए आरामदायक होती है बल्कि थनैला जैसे रोगों से भी बचाव करती है। साथ ही, थन डिपिंग, साफ बर्तन, हाथों की स्वच्छता और समय की नियमितता जैसे छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़े स्तर पर स्वच्छ दूध उत्पादन को संभव बनाते हैं।

अतः यह कहा जा सकता है कि “स्वच्छता ही गुणवत्तापूर्ण दूध की कुंजी है”। किसान और डेयरी संचालक यदि इन सभी नियमों का पालन करें, तो वे उच्च गुणवत्ता वाला, सुरक्षित और अधिक लाभदायक दूध उत्पादन कर सकते हैं।

लेखक :

डॉ. मोहम्मद काशिफ रज़ा, डॉ. शैलेश विशाल, डॉ. देवेश कुमार गिरी, डॉ. गोविना देवांगन
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
वेटरनरी पॉलिटेक्निक महासमुंद

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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