

बॉस मिशन का उद्देश्य
- वन एवं वनेत्तर क्षेत्रों में बाँस रोपण को बढ़ावा देने हेतु बॉस के पौधों की उपलब्धता किसानों को सुनिश्चित कराया जाना एवं किसानों को बॉस रोपण हेतु प्रोत्साहित करना।
- हितग्राहियों की कृषि आय में वृद्धि करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान सुनिश्चित करना।
- बॉस आधारित कुटीर उद्योगों का प्रोत्साहन करना एवं उनका विकास सुनिश्चित करना।
- बॉस प्रसंस्करण केन्द्रों को पुर्नजीवित करना एवं सुचारू रूप से संचालित करना ।
- बाँस उत्पादों के बाजार की पहचान कर शिल्पकारों को बाजार दिलाने हेतु समुचित समन्वय सुनिश्चित करना।

बांस से संबंधित कुछ योजनाएँ
- राज्य पोषित योजना :-
- मुख्यमंत्री बॉस विकास योजना
- बॉस प्रसंस्करण इकाई योजना
- केन्द्र प्रायोजित योजना :-
- पुर्नगठित राष्ट्रीय बॉस मिशन

मुख्यमंत्री बॉंस विकास योजना :-
- योजनांतर्गत समस्त वर्ग के कृषकों/हितग्राहियों की मांग अनुसार उनकी बाड़ी, निजी भूमि तथा कृषि भूमि पर प्रदेश में पाये जाने वाली बांस प्रजाति एवं उच्च गुणवत्ता के जपेनम बनसजनतम बांस पौधों का रोपण कराया जाता है।
- हितग्राही द्वारा वनमंडलाधिकारी की पूर्व अनुमति प्राप्त कर अधिकतम 1,000 उच्च गुणवत्ता के बांस पौधों का क्रय स्वयं कर सकेगा।
- योजनांतर्गत प्रति हितग्राही पौधा प्रदाय की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। किंतु 1,000 से अधिक पौधा प्रदाय की स्थिति में हितग्राही की मांग अनुसार पौधों की उपलब्धता विभागीय रूप से सुनिश्चित की जावेगी।
- उच्च गुणवत्ता के पौधे, गड्ढ़ा खुदाई, खाद, कीटनाशक, रोपण कार्य, निंदाई गुड़ाई एवं सुरक्षा, रख-रखाव आदि कार्य हितग्राही द्वारा कराये जाने पर सत्यापन उपरांत प्रथम वर्ष हेतु निर्धारित राशि रू. 92.20 तीन किश्तों में स्थल निरीक्षण के पश्चात् भुगतान किया जावेगा।
- रोपण पश्चात् आगामी दो वर्षों हेतु पौधों के रख-रखाव हेतु 5/- प्रति पौधें की दर से अनुदान दिया जावेगा।
रोपण हेतु प्रस्तावित प्रजातियॉं :-
- Bambusabalcooa, Bambusa tulda, Bambusa nutans, Bambusa vulgaris (green), Dendrocalamus longispathus, Dendrocalamus stocksii, Dendrocalamus brandisii, Dendrocalamus strictus एवं कृषि जलवायु प्रक्षेत्रों के आधार पर अन्य उपयुक्त बॉंस प्रजातियॉं।
मुख्यमंत्री बॉंस विकास योजनान्तर्गत उपलब्धि का विवरण :–
| वर्ष | बांस पौधा रोपण | बैम्बूसेटम | प्रदर्शन प्रक्षेत्र की स्थापना | अनुदान वितरण | |
| हितग्राही
संख्या |
पौधा संख्या
(लाख में) |
||||
| 2016-17 | 6512 | 2.62 | – | – | – |
| 2017-18 | 6186 | 3.43 | – | – | 13.11 |
| 2018-19 | 1754 | 1.10 | – | – | 30.27 |
| 2019-20 | – | – | – | – | 22.70 |
| 2020-21 | 1840 | 0.53 | 1 | – | 5.53 |
| 2021-22 | 865 | 0.69 | 1 | – | 2.65 |
| 2022-23 | 1214 | 2.56 | 1 | 5 | 6.11 |
| 2023-24 | – | – | – | – | 7.50 |
| 2024-25 | – | – | – | – | 4.15 |
| महायोग | 18371 | 10.93 | 3 | 5 | 92.02 |
बॉंस प्रसंस्करण इकाई योजना :-
- बॉंस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बॉंस कारीगरों हेतु आजिविका संवर्धन सुनिश्चित करना है।
- बसोड़ एवं बॉंस से जुड़े परम्परागत समुदाय तथा बॉंस शिल्पकारों को उन्नत डिज़ाईन विकसित करने, कौशल उन्नयन एवं निरंतर रोजगार प्रदान किया जा रहा है।
- स्थापित बॉंस प्रसंस्करण केन्द्रों के सुचारू रूप से संचालन, बॉंस उत्पाद निर्माण, शिल्पकारों के कौशल उन्नयन हेतु केन्द्रों को राशि प्रदाय की जाती है।
- प्रदेश में वर्ष 2007-08 से 2012-13 तक कुल 32 बॉंस प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है।
- बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रायपुर में बॉंस विपणन एवं विक्रय हेतु बैम्बू एम्पोरियम केन्द्र की स्थापना 02 नवम्बर, 2010 में की गयी है।
- डी.एम.एफ., सी.एस.आर. एवं विभागीय मदों के तहत 05 बॉंस प्रसंस्करण केन्द्रों को उनकी क्षमता के अनुरूप संचालित एवं पुनर्जीवित किया जा रहा है।

पुर्नगठित राष्ट्रीय बॉंस मिशन योजना :-
- बॉंस रोपण क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गैर वनक्षेत्र राजस्व भूमि, गैर वनक्षेत्र – कृषक की भूमि, बाड़ी, सामुदायिक भूमि, कृषियोग्य बंजर भूमि में बॉंस रोपण किया जावेगा।
- फसल कटाई के बाद प्रबंधन में सुधार करना।
- उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए बाजार मांग का अध्ययन करने हेतु अनुसंधान एवं विकास से सहायता, सूक्ष्म, छोटे एवं मध्यम उद्यमियों व व्यापारिक दृष्टिकोण से सहायता।
- देश में बॉंस आधारित इकाईयों की स्थापना को बढ़ावा, विद्यमान औद्योगिक इकाईयों को आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना।
- किसानों के खेतों पर ब्लॉक, बाउंड्री एवं शासकीय भूमि में बांस पौधा रोपणों हेतु गाईड लाईन अनुसार दिशा निर्देश निम्नानुसार है :-
- प्रति हेक्टेयर बांस पौधों की अपेक्षित संख्या न्यूनतम 400 होगी।
- यदि रोपण शासकीय भूमि पर किया जा रहा हो, तो लागत का 100% (1.20 लाख) 60:40 के अनुपात में दो वर्ष हेतु प्रति हेक्टेयर।
- यदि रोपण निजी भूमि पर 10 हेक्टेयर तक किया जा रहा हो, तो लागत का 50% (0.60 लाख) प्रति 60:40 के अनुपात में दो वर्ष हेत हेक्टेयर।
- रोपण वर्ष के पश्चात् द्वितीय वर्ष में पौधों का जीवित प्रतिशत प्रतिस्थापित पौधों सहित 80 होने पर नियमानुसार 100 प्रतिशत राशि दी जायेगी।
योजना के अंतर्गत देय राशि की गणना निम्नानुसार है :-
| वर्ष | शासकीय भूमि पर (प्रति हे.)
लागत का 100% राशि रू. 1.20 लाख |
निजी भूमि (अधिकतम 10 हे.)
लागत का 50% राशि रू. 0.60 लाख |
| 1 | 2 | 3 |
| प्रथम वर्ष | 72,000 | 36,000 |
| द्वितीय वर्ष | 48,000 | 24,000 |
| योग :– | 1,20,000 | 60,000 |
रोपण हेतु प्रस्तावित प्रजातियॉं :-
Bambusa tulda, B.bambos, B.balcooa, B.cacharensis, B.polymorpha, B.nutans, Dendrocalamus asper, D.hamiltonii, Thyrostachys oliverii, and Melocanna baccifera Besides एवं कृषि जलवायु प्रक्षेत्रों के आधार पर अन्य उपयुक्त बांस प्रजातियॉं।

वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक उपलब्धियां :-
- कृषकों की निजी भूमि में 50 हेक्टेयर ब्लॉक प्लांटेशन।
- 05 बड़ी रोपणी एवं 04 छोटी रोपणी की स्थापना।
- 06 छोटी रोपणी की स्थापना का कार्य प्रगति पर ।
- 03 बांस बाजार की स्थापना।
- 01 बांस प्रसंस्करण इकाई की स्थापना।
- बांस के उपकरणों औजारों एवं मशीनों के तकनीकी विकास।
लेखक :
डॉ. रेशमा कौशल,
कृषि अर्थशास्त्र विभाग
शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर ;बस्तर
डॉ. आकाश तिवारी,
कृषि अर्थशास्त्र विभाग
कृषि महाविद्यालय, रायपुर









