बटेर के अंडे का संग्रहण, भंडारण, इनक्यूबेशन एवं हैचरी प्रबंधन
डॉ. नितेश कुमार कुंभकार, डॉ. प्रतिभा ताटी, डॉ. देवेश कुमार गिरी, डॉ. ओमप्रकाश एवं डॉ. भूपिका देवांगन


भारत में पोल्ट्री व्यवसाय के अंतर्गत जापानी बटेर (Japanese Quail) पालन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मुर्गियों की तुलना में बटेर पालन में कम जगह, कम लागत और कम समय की आवश्यकता होती है। बटेर के अंडे पोषक तत्वों (विटामिन, मिनरल्स और गुड कोलेस्ट्रॉल) से भरपूर होते हैं, जिसके कारण बाजार में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।
बटेर के अंडे उत्पादन की मुख्य विशेषताएँ:-
- जल्दी शुरुआत-मादा बटेर मात्र 6 सप्ताह (42 दिन) की उम्र में ही अंडा देना शुरू कर देती है, जबकि मुर्गियों को इसमें लगभग 18 सप्ताह का समय लगता है।
- समय-आमतौर पर बटेर शाम के समय (दोपहर बाद से रात तक) अंडे देती हैं।
- सालाना उत्पादन-एक स्वस्थ जापानी बटेर अनुकूल परिस्थितियों में साल भर में लगभग 250 से 280 अंडे दे सकती है।
- अंडे का वजन-बटेर के एक अंडे का वजन लगभग 9 से 10 ग्राम होता है, जो रंग-बिरंगे और चित्तीदार (mottled) होते हैं।
अंडे का सही तरीके से संग्रहण (Egg Collection Process)
बटेर के अंडे बहुत नाजुक होते हैं। उनका छिलका (shell) पतला होने के कारण उनके टूटने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए संग्रहण करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:
- दिन में दो बार संग्रहण (Collection Timing)- चूंकि बटेर ज्यादातर दोपहर के बाद अंडे देती हैं, इसलिए अंडों को दिन में कम से कम दो बार (एक बार दोपहर में और एक बार देर शाम) इकट्ठा करना चाहिए। पिंजरे या कॉप (coop) में ज्यादा देर अंडे रहने से उनके टूटने या गंदे होने की संभावना बढ़ जाती है।
- रोल-आउट पिंजरों (Roll & out Cages) का उपयोग. व्यावसायिक स्तर पर बटेर पालन के लिए केज सिस्टम (पिंजरा प्रणाली) सबसे बेस्ट मानी जाती है। ऐसे पिंजरे जिनमें फर्श थोड़ा झुका हुआ होता है, वहां अंडा देते ही वह सरककर आगे बने एक खांचे में आ जाता है। इससे पक्षी खुद अंडे को गंदा या डैमेज नहीं कर पाते।
अंडों का वर्गीकरण और सफाई
- सफाई- गंदे अंडों को कभी भी सीधे पानी से न धोएं, क्योंकि इससे उनके छिलके पर मौजूद प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत (bloom) नष्ट हो जाती है और बैक्टीरिया अंदर जा सकते हैं। यदि मामूली गंदगी हो, तो उसे सूखे कपड़े या हल्के रेगमाल (sandpaper) से साफ करें। अधिक गंदे अंडों को अलग कर दें।
- छंटनी- दरार वाले (cracked), बहुत छोटे या विकृत आकार के अंडों को खाने या हैचिंग (hatching) के लिए इस्तेमाल न करें।
अंडों का भंडारण (Storage)- यदि आप अंडों को बेचने या इनक्यूबेटर में रखकर चूजे निकालने (Hatching) के लिए स्टोर कर रहे हैं, तो इन नियमों का पालन करेंरू
| उद्देश्य | तापमान | नमी (Storage) | भंडारण की अवधि |
| खाने के लिए (Commercial) | 4oC से 10oC (रेफ्रिजरेटर) | 75% | सामान्य 2 से 3 सप्ताह |
| बच्चे निकालने के लिए (Hatching) | 13oC से 16oC | 70 से 75% | अधिकतम 7 से 10 दिन |
बटेर के अंडों को सेने की तैयारी
1. अंडों का सही चयन (Egg Selection)
- मशीन में रखने के लिए केवल सर्वोत्तम अंडों का ही चुनाव करें
- आकार और वजन- अंडे न तो बहुत बड़े होने चाहिए और न ही बहुत छोटे। एक आदर्श अंडे का वजन 9 से 11 ग्राम होना चाहिए।
- बनावट- सामान्य आकार (Oval shape) के अंडे चुनें। गोल, लंबे या विकृत आकार के अंडों से चूजे ठीक से नहीं निकलते।
- छिलके की मजबूती- बिना दरार (crack) वाले अंडे ही लें। क्रैक जांचने के लिए आप कैंडलिंग (Candling- टॉर्च की रोशनी में देखना) तकनीक का उपयोग कर सकते हैं।
2. इनक्यूबेटर की सफाई और सैनिटाइजेशन (Cleaning & Sanitizing)
पुरानी हैचिंग के बैक्टीरिया नए अंडों को खराब कर सकते हैं, इसलिए मशीन की सफाई बेहद जरूरी है:
- इनक्यूबेटर के सभी हिस्सों (ट्रे, पंखे, बेस) को अच्छी तरह साफ करें।
- किसी अच्छे पोल्ट्री सैनिटाइजर या हल्के ब्लीच सॉल्यूशन से मशीन को अंदर से पोंछ लें और फिर उसे सूखने दें।
3. अंडों को सामान्य तापमान पर लाना (Acclimatization)
- ठंडे स्टोरेज रूम से निकालकर अंडों को सीधे गर्म इनक्यूबेटर में न रखें। ऐसा करने से अंडों के छिलके पर पानी की बूंदें (condensation) जम सकती हैं, जिससे फंगस लग सकती है।
- इनक्यूबेटर में रखने से 4 से 6 घंटे पहले अंडों को सामान्य कमरे के तापमान (लगभग 25oC) पर आने दें। जब मशीन का तापमान स्थिर हो जाए और अंडे कमरे के तापमान पर आ जाएं, तब उन्हें मशीन में लगाएं ।
इनक्यूबेटर में अंडे लोड करना (Loading the Eggs)
- अंडों को टर्निंग ट्रे में इस तरह रखें कि उनका चौड़ा हिस्सा (Blunt end) ऊपर और नुकीला हिस्सा (Pointed end) नीचे हो। चौड़े हिस्से में श्एयर सेलश् (हवा की थैली) होती है, जिससे चूजा सांस लेता है।
- यदि आपका इनक्यूबेटर ऑटोमैटिक नहीं है, तो अंडों पर पेंसिल से ‘X’ और ‘O’ का निशान बना लें, ताकि आपको याद रहे कि उन्हें कब और किस तरफ घुमाना है।
बटेर हैचरी प्रबंधन एवं अंडों से चूजे निकालने की प्रक्रिया (Quail Egg Hatchery Management Guide) :
बटेर पालन (Quail Farming) में सिर्फ अंडे पैदा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उन अंडों से सफलतापूर्वक और अधिक से अधिक संख्या में स्वस्थ चूजे निकालना (Hatching) एक कला और विज्ञान है। एक कुशल हैचरी प्रबंधन (Hatchery Management) के जरिए आप अपनी हैचिंग दर (Hatching Rate) को 85% से ऊपर ले जा सकते हैं।
बटेर के अंडों को पूरी तरह तैयार होने और चूजा बनने में 17 से 18 दिन का समय लगता है। इस पूरी अवधि के प्रबंधन को हम तीन मुख्य भागों में बांट सकते हैं:
1. शुरुआती चरणरू इनक्यूबेशन पीरियड (दिन 1 से दिन 14) :
इस चरण में अंडों के अंदर चूजे का विकास शुरू होता है। इस दौरान मशीन का माहौल बिल्कुल सटीक होना चाहिए;
- तापमान (Temperature): इनक्यूबेटर का तापमान 37.5oC से 37.8oC (99.5oF) के बीच पूरी तरह स्थिर रहना चाहिए। तापमान में हल्का सा उतार-चढ़ाव भी भू्रण (मउइतलव) को नुकसान पहुंचा सकता है।
- आर्द्रता (Humidity): शुरुआती 14 दिनों में नमी का स्तर 45% से 50% के बीच रखें।
- अंडों को घुमाना (Egg Turning): यह सबसे जरूरी काम है। अंडों को दिन में कम से कम 4 से 6 बार (स्वचालित मशीन में हर 1 से 2 घंटे में) घुमाना जरूरी है। ऐसा करने से भू्रण अंडे के छिलके की अंदरूनी परत से चिपकता नहीं है। हमेशा ध्यान रखें कि अंडे का नुकीला हिस्सा नीचे की तरफ हो।
2. मध्य चरणरू कैंडलिंग (Candling – दिन 7 से दिन 9)
हैचरी प्रबंधन में केंडलिंग एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें एक अंधेरे कमरे में फ्लैशलाइट या कैंडलिंग डिवाइस की रोशनी को अंडे के चौड़े हिस्से पर डाला जाता है।
- उद्देश्य- इससे यह पता चलता है कि अंडे के अंदर चूजा बन रहा है या नहीं।
- पहचान- Fertile अंडों के अंदर मकड़ी के जाले जैसी नसें और एक छोटा सा हिलता हुआ बिंदु (दिल की धड़कन) दिखाई देगा। बांझ प्दमितजपसम या खराब हो चुके अंडे बिल्कुल साफ या पारदर्शी दिखेंगे।
- प्रबंधन- बिना चूजे वाले या खराब अंडों को तुरंत मशीन से बाहर निकाल दें, अन्यथा वे सड़कर गैस बनाएंगे और संक्रमण फैलाकर बाकी अच्छे अंडों को भी खराब कर देंगे।
3. अंतिम चरण: लॉकडाउन पीरियड (दिन 15 से दिन 18)
14वें दिन के अंत में बटेर के अंडे अपने अंतिम चरण में प्रवेश करते हैं। इसे लाक डाउन कहा जाता है, क्योंकि इसके बाद इनक्यूबेटर को बार-बार खोला नहीं जाता।
- टर्निंग बंद करें- 15 वें दिन से अंडों को घुमाना (Turning) पूरी तरह बंद कर दें। अंडों को टर्निंग ट्रे से निकालकर नीचे लगी साधारण हैचिंग ट्रे (Hatching Tray) पर सपाट लिटा दें। इससे चूजों को अंडे से बाहर निकलने के लिए सही पोजीशन लेने में मदद मिलती है।
- तापमान कम करें- तापमान को हल्का सा घटाकर 37.2oC (99oF) पर ले आएं।
- नमी बढ़ाएं- यह बहुत नाजुक समय है। नमी (Humidity) को बढ़ाकर 65% से 70% कर दें। अधिक नमी के कारण अंडे का छिलका मुलायम हो जाता है, जिससे चूजे आसानी से उसे तोड़कर (Pipping) बाहर आ पाते हैं।
4. चूजों का निकलना और शुरुआती देखभाल (Hatching & Post & Hatch Care)
- ऽ मशीन न खोलें- 17वें और 18वें दिन जब चूजे अंडे तोड़कर बाहर आ रहे हों, तब इनक्यूबेटर का दरवाजा बिल्कुल न खोलें। बार-बार दरवाजा खोलने से अंदर की नमी बाहर निकल जाती है और हवा सूखी हो जाती है, जिससे आधे निकले चूजे छिलके के अंदर ही सूखकर मर सकते हैं।
- चूजों को सुखाना- अंडे से बाहर निकलने के बाद चूजे गीले और कमजोर होते हैं। उन्हें अगले 24 घंटे तक इनक्यूबेटर के अंदर ही रहने दें, जब तक कि उनके पंख पूरी तरह सूख न जाएं और वे फुर्तीले न हो जाएं। (कुदरती रूप से चूजे बिना कुछ खाए-पिए 48 घंटे तक रह सकते हैं क्योंकि वे अंडे की जर्दी को सोखकर पोषण पाते हैं)।
- ब्रूडर में शिफ्टिंग- जब चूजे पूरी तरह सूख जाएं, तो उन्हें पहले से तैयार ब्रूडर (Brooder) में शिफ्ट कर दें, जहाँ का शुरुआती तापमान लगभग 35oC होना चाहिए।
डॉ. नितेश कुमार कुंभकार, डॉ. प्रतिभा ताटी, डॉ. देवेश कुमार गिरी, डॉ. ओमप्रकाश एवं डॉ. भूपिका देवांगन
वेटनरी पॉलिटेक्निक
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय,दुर्ग छत्तीसगढ़









