जुगाली करने वाले पशुओ में यूरिया मोलासिस मिनरल्स ब्लाक का महत्व
डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. एम. के. गेंदले, डॉ. मीनू दूबे, डॉ. रैना दोनेरिया एवं डॉ. सोनाली पृष्टि, पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय,दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविदयालय, दुर्ग (छ.ग.)


भारत में पशुओं की संख्या बहुत अधिक है। परन्तु प्रति पशु दुग्ध उत्पादन बहुत कम है। इसका मुख्य कारण आनुवंशिक क्षमता की कमी तथा पौष्टिक व संतुलित आहार की उचित आपूर्ति न होना है। फसल अवशेष ही हमारे पशुओं के मुख्य आहार हैं। फसल अवशेषों में नाइट्रोजन तथा खनिज की मात्रा बहुत ही कम होती है। जबकि इनमें थोड़ा कार्बोहाईड्रेटस ही होते हैं। रेशे अधिक होने के कारण पशु इनका पूरी तरह उपयोग नहीं कर पाता है, इसलिए फसल अवशेष में अल्प मात्रा में पाये जाने वाले तत्वों की पूर्ति आवश्यक है।
जुगाली करने वाले पशुओं की विशेषता है कि वे अपनी प्रोटीन तथा उर्जा की आवश्यकता केवल नाइट्रोजन तथा रेशेदार आहार से पूरा कर लेते है। इसके लिए रोमन्थ में असंख्य जीवाणु (बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, फफूद आदि) होते हैं जो कि नाइट्रोजन को प्रोटीन तथा रेशेदार कार्बोहाइड्रेट को वाष्पशील वसा व अम्ल में परिवर्तित कर पशु में प्रोटीन तथा उर्जा प्रदान करते है। लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि जीवाणुओं की नाइट्रोजन ऊर्जा तथा खनिज की आवश्यकता को पूरा किया जाये। फसलों के अवशेष खिलाने से पशु पोषण या उत्पादन की बात तो दूर इसके सेवन से पाये जाने वाले जीवाणुओं की पूर्ति भी नहीं हो पाती हैं।

यूरिया, शीरा तथा खनिज सूखे चारे में मिलाकर खिलाने से पशुओं की जीवन निर्वाहन की आवश्यकता पूरी हो जाती है। इसके लिए पशुपालकों को विशेष परीक्षण की आवश्यकता होती है क्योंकि अगर तीन तत्त्व ठीक प्रकार तथा उचित अनुपात में नहीं मिलाये गये तो यूरिया की विषाक्ता से पशु मर भी सकता है। इसलिये कृषकों व पशुपालकों की सुविधा के लिए यूरिया, शीरा व खनिज तैयार किया जाता है जो कि पशुओं के लिए हर तरह से सुरक्षित है। पशु अपनी आवश्यकता के अनुसार पिंड को चाट सकता है और फसल अवशेष में जो तत्त्व कम होते हैं उनकी आपूर्ति खनिज पिंड से हो जाती है। अगर बिनौले अथवा मूंगफली की खली उपलब्ध नहीं हो तो दूसरी खली का उपयोग भी कर सकते है। यह पिंड बाजार में भी उपलब्ध होता है, परन्तु महँगा पड़ता है तथा अवयवों की प्रतिशत मात्रा की विश्वनीयता नहीं होती। इसलिए पशुपालक के लिए अगर इसे घर पर तैयार कर लें तो यह काफी सस्ता व विश्वसनीय होता है।
यूरिया मोलासेस ब्लॉक (UMMB) एक उच्च प्रोटीन केंद्रित फ़ीड स्रोत है जो रूमेन सूक्ष्मजीवों को गैर-प्रोटीन नाइट्रोजन (NPN) की आपूर्ति करता है । ब्लॉक में महत्वपूर्ण खनिज और विटामिन भी होते हैं। UMB जुगाली करने वाले जानवरों को आसानी से विघटित होने वाला प्रोटीन और किण्वन योग्य ऊर्जा प्रदान करने का एक अच्छा तरीका है।
विधि:– यूरिया शीरा खनिज लवण ब्लॉक (UMMB) बनाने के लिए भाकृअनुप – भारतीय पशु-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर द्वारा ठण्डी विधि विकसित की गई है। इसमें
| 1 | यूरिया | 7–10%, |
| 2 | शीरा या गुड़ | 40-45% |
| 3 | सीमेन्ट | 5-10% |
| 4 | गेहूँ का चोकर | 35-40% |
| 5 | खनिज लवण | 1–4% |
| 6 | नमक | 1-2% |
| 7 | विटामिन्स ‘ए’ एवं ‘डी’ | ( 10 ग्रा. प्रति 100 कि. ग्रा. ) |
उपर्युक्त अवयवों को निम्नलिखित क्रम में मिश्रित किया जाता है: पानी, यूरिया, नमक, खनिज मिश्रण, सीमेंट, गुड़ और गेहूं का चोकर। इसे पूरी तरह से गीला करने के लिए सीमेंट के वजन के 1/3 की दर से पानी डाला गया था। मिश्रण को तब ब्लॉक बनाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए सांचों में स्थानांतरित किया जाता है। ब्लॉकों को 24 घंटे की अवधि के लिए सांचों में रखा जाता है व बाद में निकालकर सूखने के लिए रख दिया जाता है व आवश्यकता के अनुसार पशु को खिलाया जाता है । यह पशु के शरीर में ऊर्जा, प्रोटीन व खनिज की पूर्ति करता है।

गर्म विधि:-सबसे पहले शीरै को गर्म करके उसमें यूरिया,कैल्साइट पाउडर और सोडियम बैण्टोनाइट डालकर अच्छी तरह मिला लें। मिश्रण को धीरे-धीरे हिलाते हुए उसमें खनिज मिश्रण खली आदि को मिलाये। जब मिश्रण का तापमान 120°C हो जाये तो इसको 10 मिनट तक अच्छी तरह मिलायें और जब सभी पदार्थ अच्छी तरह मिल जाये तो मिश्रण को ठण्डा ( 80-90°c) कर लें। फिर उचित आकार के सांचों में डालकर ठण्डा होने के लिए रख दें।
ठंडी विधि :- इस विधि में यूरिया, कैल्शियम आक्साइड (चूना) का प्रयोग किया जाता है। चूने के मिश्रण को मिलाकर ही इतनी गर्मी पैदा हो जाती है कि सारे मिश्रण को अर्द्धतरल अवस्था में बदल देती हैं तथा मिश्रण को सांचों में डालकर आसानी से पिंड बनाया जा सकता है।
यूरिया, शीरा व खनिज युक्त पशु आहार पशुओं के लिए पूरक पोषण का महत्त्वपूर्ण स्रोत है जिसके फलस्वरूप पशुओं की उत्पादन क्षमता में सुधार होता है। यह स्थानीय सामग्री जैसे गुड, यूरिया, कैल्साइट और गेहूँ के भूसे के साथ मिलाकर बनाया जा सकता है। यह पशुओं के लिए एक सस्ता व सम्पूर्ण पोषण का आहार है। इससे पशुओं के उत्पादन में वृद्धि होती है।
यूरिया मोलासेस ब्लॉक (UMMB) में मौजूद पोषक तत्व:
- प्रोटीन:-यह ब्लॉक, रूमेन सूक्ष्मजीवों को गैर-प्रोटीन नाइट्रोजन (NPN) की आपूर्ति करता है.
- ऊर्जा:-यह ब्लॉक, जुगाली करने वाले पशुओं को किण्वन योग्य ऊर्जा देता है.
- खनिज:-यह ब्लॉक, पशुओं को खनिज तत्वों की आपूर्ति करता है.
- विटामिन:-यह ब्लॉक, पशुओं को विटामिन देता है.
यूरिया मोलासेस ब्लॉक (UMMB) के फ़ायदे:
- पशु को पाचनशील कार्बनिक पदार्थ अधिक मिलता है।
- जीवाणु अधिक प्रोटीन का निर्माण करते हैं जिससे व्यस्क पशु की प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाती है।
- वाष्पशील वसा अम्ल ज्यादा बनते हैं जो कि जुगाली करने वाले पशुओं की उर्जा का मुख्य स्रोत है।
- व्यस्क पशु को इतनी ऊर्जा रख-रखाव के लिए पर्याप्त होती है। यह कार्य भी जीवाणु करते हैं।
- यह ब्लॉक, पशुओं की पाचन क्रिया को बेहतर करता है.
- यह ब्लॉक, पशुओं के उत्पादन और प्रजनन में सुधार करता है.
- यह ब्लॉक, मीथेन उत्सर्जन को कम करता है.
- यह ब्लॉक, पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर करता है.
यूरिया मोलासेस ब्लॉक (UMMB) को खिलाने का तरीका:
- यह केवल जुगाली करने वाले पशुओं (वयस्क गाय, भैंस, भेड़, बकरी, और मवेशी) को खिलाना चाहिए.
- यह ब्लॉक, पूरक के रूप में खिलाना चाहिए, न कि मूल राशन के रूप में.
- यह ब्लॉक, शुष्क रूप में खिलाना चाहिए.
- यह ब्लॉक, कमज़ोर पशुओं को खाली पेट नहीं देना चाहिए.
- यूरिया मोलासेस ब्लॉक (UMMB) (पशु चाकलेट) को घोड़े, गधे, सूकर को नहीं देना चाहिए ।











