राज्य शासन द्वारा मछुआरों के हितार्थ क्रियान्वित की जा रही कल्याणकारी योजनाएं /कार्यक्रम
मछली पालन विभाग


राज्य शासन द्वारा मछुआरों के हितार्थ क्रियान्वित की जा रही कल्याणकारी योजनाएं /कार्यक्रमों की जानकारी
1. मत्स्य बीज उत्पादन : आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित विधि से मत्स्य बीज उत्पादन कर विभागीय व निजी क्षेत्र की तालाबों/जलाशयों की मत्स्य बीज मांग की आपूर्ति करना । सामान्य एवं आदिवासी क्षेत्र के मत्स्य बीज उत्पादन इकाईयों (हैचरी मत्स्य बीज प्रक्षेत्र संवर्धन इकाई) से आधुनिक तकनीक पर विभागीय तौर पर मत्स्य बीज उत्पादन कर आपूर्ति किया जाता है।
2. जलाशयों एवं नदियों में मत्स्योद्योग विकास : मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने मत्स्य पालकों के जलाशयों में 50 प्रतिशत शासकीय व्यय पर मत्स्य अंगुलिका संचयन पर सहायता दी जाती है । राज्य में प्रवाहित नदियों में प्रग्रहण मात्स्यिकी (केप्चर फिशरीज) अंतर्गत अत्यल्प हो गये मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु इन नदियों में उत्तम गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज का संचयन कर मत्स्य पालन का विकास करना । वर्तमान में इंद्रावती नदी में मत्स्य बीज संचयन की जा रही है।
3. विभागीय प्रशिक्षण : सभी वर्ग के मछुआरों को मछली पालन की आधुनिक तकनीकी एवं मछली पकड़ने जाल बुनने सुधारने एवं नाव चलाने का 10 दिवसीय सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें प्रति प्रशिक्षार्णिर्थी प्रशिक्षण व्यय 1250 रूपये स्वीकृत है। जिसके अंतर्गत 75 रूपये प्रतिदिन प्रशिक्षणार्थी के मान से शिष्यवृत्ति रूपये 400 के मूल्य का नायलोन धागा तथा 100 रूपये विविध व्यय अंतर्गत शामिल है। मछुवारों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान में वृद्धि हेतु तीन दिवसीय उन्नयन प्रषिक्षण सभी वर्ग के मछुवारों को तकनीकी ज्ञान में वृद्धि के लिए तीन दिवसीय प्रषिक्षण दिया जाता है जिसके तहत रू. 1000 प्रति प्रषिक्षणार्थी व्यय का प्रावधान है । प्रषिक्षणार्थियों को प्रति दिवस रू. 150 के मान से रु. 450 षिष्यवृत्ति तथा क्षेत्रीय भ्रमण व आने जाने पर व्यय रू. 550 व्यय का प्रावधान है ।
4. राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण : समस्त वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देष्य से 10 दिवसीय अध्ययन भ्रमण हेतु भेजा जाता है । जिस पर प्रति मछुआरा रू. 2500 व्यय स्वीकृत है । स्वीकृत योजनानुसार प्रति प्रशिक्षणार्थी रू. 750 शिष्यवृत्ति रू. 1500 आवागमन व्यय तथा रू. 250 विविध व्यय का प्रावधान है ।
5. मत्स्य पालन प्रसार : हितग्राहियों को निम्नानुसार घटकों के अंतर्गत वस्तु विशेष के रूप में सहायता उपलब्ध कराई जाती है:-
5.1 पॉली कल्चर झींगा पालन एवं अलंकारिक मत्स्य पालन : अनुसूचित जाति/जन जाति के मत्स्य पालकों को आलंकारिक मत्स्य पालन एवं झींगा पालन कर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने हेतु आर्थिक सहायता दिये जाने का प्रावधान किया गया है। जिसके तहत् हितग्राहियों को झींगा पालन हेतु वस्तु विषेष के रूप में रू. 15000 तथा आलंकारिक मत्स्य पालन हेतु रू. 12000 तीन वर्षों में आइटमवार अधिकतम निर्धारित सीमा के तहत् आर्थिक सहायता दिया जाता है।
अ. झींगा पालन मत्स्य बीज क्रय रूपये 1250 झींगा बीज संचयन एवं परिवहन रूपये 10000 तथा खाद् एवं खाद्य पदार्थ हेतु रूपये 3750 कुल रूपये 15000 ब. अलंकारिक मत्स्य पालन प्रजनक क्रय रूपये 2500 परिपूरक आहार रूपये 6000 तथा जाल दवाई इत्यादि हेतु रूपये 3500 कुल रूपये 12000
5.2 मत्स्याखेट हेतु नाव-जाल क्रय : अनुसूचित जनजाति के मछुआरों को तालाबों जलाषयों एवं नदियों में मत्स्याखेट हेतु नाव जाल उपकरण क्रय की सुविधा हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु प्रावधानित किया गया है। जिसके तहत् रू. 10000 आर्थिक सहायता दी जाती है। जाल हेतु रूपये 3000 एवं नाव हेतु रूपये 7000 स्वीकृत है।
5.3 मत्स्य बीज संवर्धन हेतु आर्थिक सहायता : अनुसूचित जाति के मछुआरों को मत्स्य बीज संवर्धन द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन कर स्वरोजगार हेतु मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन हेतु रूपये 30000 की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान किया गया है। तालाबों की साफ-सफाईए इनलेट-आउटलेट पर जाली लगाने की व्यवस्था प्लॅक्टॉन नर्सरी नेट बाल्टी मग पॉलीथीन बैग आदि क्रय पर व्यय रूपये 7000 एवं तालाब की पट्टा राषि स्पॉन क्रय खाद्य चूना परिपूरक आहार आदि पर व्यय रूपये 23000 कुल रूपये 30000
5.4 फिंगरलिंग संचयन : अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के मत्स्य पालकों को तालाबों में फिंगरलिंग क्रय का संचयन कर मत्स्य उत्पादन में उत्तरोत्तर वृद्धि करने एवं मत्स्य उत्पादन से अधिक आय अर्जित करने हेतु रूपये 10000 की 5 वर्षों में आर्थिक सहायता दिये जाने का प्रावधान है। योजना के तहत् 5000 नग (76 से 100 एम०एम० प्रति हेक्टेयर मिश्रित मत्स्य बीज अंगुलिका क्रय हेतु प्रति वर्ष रूपये 2000 व्यय स्वीकृत है।
5.5 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मत्स्य बीज संचयन : नक्सल प्रभावित क्षेत्र के पंचायतों के ऐसे तालाब जिन्हें मत्स्य पालक पट्टे में लेने के इच्छुक नहीं है उनका चयन कर शत-प्रतिशत शासकीय व्यय से मत्स्य बीज संचयन कर ग्रामवासियों को निःशुल्क पौष्टिक आहार उपलबध कराने एवं मत्स्य उत्पादन में उत्तरोत्तर वृद्धि हेतु योजना स्वीकृत । योजना के तहत् 5000 नग अंगुलिका (26 से 50 एम०एम० परिवहन सहित रूपये 1750 प्रति हेक्टेयर व्यय स्वीकृत है।
5.6 फुटकर मछली विक्रय योजना : ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को ताजी मछली पौष्टिक एवं सुपाच्य आहार के रूप में उपलब्ध कराने हेतु समस्त वर्ग के मछुआरों को फुटकर मछली विक्रय के तहत् स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देष्य से योजना के तहत् रूपये 6000 तक आर्थिक सहायता दी जाती है। मत्स्य पालको के आईस बाक्स क्रय पर रूपये 4000 एवं मछली तौल हेतु तराजू-बाट का सेट कटर चापर बाल्टी क्रय हेतु रूपये 2000 कुल रुपये 6000 व्यय स्वीकृत है।
5.7 मत्स्य प्रजनक बैंक की स्थापना हेतु मत्स्य पालकों को मत्स्य प्रजनकों की आपूर्ति कर आर्थिक सहायता : राज्य के मत्स्य बीज उत्पादकों को मत्स्य प्रजनन काल के दौरान उन्नत स्वस्थ मत्स्य प्रजनक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मत्स्य पालकों को मत्स्य प्रजनक बैंक की स्थापना कर मत्स्य प्रजनक आपूर्ति कर प्रोत्साहन के तौर पर विक्रय राषि का 30 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम रू. 45 प्रति किलो ग्राम दिये जाने का प्रावधान है।
5.8 मत्स्य पालक हितग्राहियों के तालाब में प्लॅक्टान वृद्धि कर मछली उत्पादन बढ़ाना : राज्य में तालाबों की मत्स्य उत्पादकता बढ़ाने हेतु तालाबों में संचित मछली के आहार हेतु प्राकृतिक आहार प्लॅक्टान विकसित किये जाने के लिए वर्ष 2020-21 से नवीन योजना प्रारंभ की गई है। योजना के तहत् तालाबों में प्लॅक्टान विकसित करने हेतु प्लेंक्टान ग्रोवर सामग्री पर प्रति हेक्टेयर लागत रु 7500 आर्थिक सहायता के रुप में अनुदान दिया जाना स्वीकृत किया गया है।
6. मछुआ सहकारिता : राज्य के सभी वर्ग के मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन सुचारू रूप से करने हेतु तीन वर्षों में अधिकतम रू. 3.00 लाख की अर्थिक सहायता दी जाती है। जिसके तहत तालाब की पट्टा राशि मत्स्य बीज क्रय एवं संचयन तथा मत्स्याखेट उपकरण व परिपूरक आहार आदि सामग्री क्रय पर अर्थिक सहायता दिये जाने का प्रावधान है ।
7. मत्स्यालय एवं अनुसंधान : मत्स्य पालन के क्षेत्र में अलंकारिक मत्स्य का प्रदर्शन/पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदर्शिनी सम्म्लेन में आमजनों के समक्ष अलंकारिक मत्स्य प्रदर्शन किया जाता है।
8. मत्स्य विकास पुरस्कार : मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति/संस्था/समूह को रू. 1.00 लाख का श्रीमती बिलासा बाई केंवटीन मत्स्य विकास पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान किया गया है। पुरस्कार प्रतिवर्ष उत्कृष्ठ कार्य करने वाले एक व्यक्ति /संस्था/समूह के लिए प्रावधानित किया जाता है।
अधिक जानकारी हेतु अपने निकटम मत्स्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें
Source : https://agriportal.cg.nic.in/fisheries/FishHi/











