पशुपालन

गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादन हेतु स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) मानक

कविता खोसला चैटली, निष्मा सिंह, वर्षा सिंह, रूपल पाठक एवं रंजना सिन्हा

परिचय : स्वच्छता (Sanitary) का संबंध मानव एवं पशु स्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा से है, जबकि पादप स्वच्छता (Phytosanitary) का संबंध पौधों के स्वास्थ्य से है। स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों (Sanitary and Phytosanitary Measures) से संबंधित समझौता, जिसे संक्षेप में SPS समझौता कहा जाता है, 1 जनवरी 1995 को विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना के साथ प्रभावी हुआ। यह समझौता खाद्य सुरक्षा तथा पशु एवं पादप स्वास्थ्य से संबंधित नियमों के अनुपालन एवं क्रियान्वयन का आधार प्रदान करता है।

यह समझौता, ‘फाइनल एक्ट’ में सम्मिलित अन्य समझौतों तथा संशोधित सामान्य शुल्क एवं व्यापार समझौता (GATT, 1994) के साथ उस अंतरराष्ट्रीय संधि का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत विश्व व्यापार संगठन  की स्थापना हुई। WTO ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख नियामक संगठन के रूप में का GATT स्थान ग्रहण किया।

SPS समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों तथा मानव, पशु एवं पादप स्वास्थ्य की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी उपायों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनावश्यक बाधाएँ उत्पन्न करने अथवा घरेलू उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के साधन के रूप में न किया जाए। यह समझौता खाद्य सुरक्षा तथा पशु एवं पादप स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के लिए मूलभूत सिद्धांत एवं मानक निर्धारित करता है।

दूध का स्वच्छ उत्पादन

दूध उत्पादन हेतु स्थान एवं परिसर

  • दूध उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले स्थान एवं परिसरों का चयन, निर्माण, रखरखाव तथा उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दूध में किसी भी प्रकार के संदूषक अथवा जोखिमकारी तत्वों के प्रवेश की संभावना न्यूनतम रहे।
  • दुग्धारू पशुओं के आवास एवं दुग्ध दोहन स्थलों का उचित रखरखाव और स्वच्छता न होने पर दूध के संदूषित होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उसकी गुणवत्ता एवं सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

पशु स्वास्थ्य

  • दुग्धारू पशुओं तथा उनके झुंडों के स्वास्थ्य का प्रबंधन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि मानव स्वास्थ्य के लिए संभावित जोखिमों को न्यूनतम किया जा सके।
  • दूध केवल स्वस्थ पशुओं से प्राप्त होना चाहिए, ताकि उससे निर्मित अंतिम उत्पाद की सुरक्षा, गुणवत्ता एवं उपयुक्तता सुनिश्चित की जा सके।
  • पशुओं के मध्य तथा पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों के प्रसार की रोकथाम अत्यंत आवश्यक है। कुछ रोगग्रस्त पशुओं से प्राप्त दूध एवं उससे निर्मित उत्पाद मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते।
  • स्वस्थ दुग्धारू पशुओं के रखरखाव से स्तन ग्रंथि अथवा मल के माध्यम से रोगजनक सूक्ष्मजीवों के दूध में प्रवेश की संभावना कम हो जाती है, जिससे दूध की सुरक्षा एवं गुणवत्ता बनी रहती है।

सामान्य स्वच्छता प्रबंधन
चारा एवं आहार

  • दुग्धारू पशुओं को प्रदान किए जाने वाले चारे एवं आहार की गुणवत्ता ऐसी होनी चाहिए कि उनसे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से दूध में किसी प्रकार के संदूषक न पहुँचें, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न करें अथवा दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता और उपयुक्तता को प्रभावित करें।
  • पशु आहार की अनुचित खरीद, निर्माण, भंडारण एवं प्रबंधन के कारण रोगजनक सूक्ष्मजीव, कीटनाशक अवशेष, माइकोटॉक्सिन तथा अन्य रासायनिक संदूषक दुग्धारू पशुओं तक पहुँच सकते हैं। ये तत्व दूध एवं दुग्ध उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता तथा उपयुक्तता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

कीट नियंत्रण

  • दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में कीटों एवं कृन्तकों का प्रभावी नियंत्रण किया जाना चाहिए, ताकि दूध में कीटनाशकों अथवा अन्य हानिकारक अवशेषों का स्तर स्वीकार्य सीमा से अधिक न हो।
  • मक्खियाँ, मच्छर, चूहे तथा अन्य कीट अनेक मानव एवं पशु रोगों के वाहक होते हैं। इनके नियंत्रण हेतु प्रयुक्त रसायनों का विवेकपूर्ण एवं सुरक्षित उपयोग आवश्यक है, क्योंकि उनका अनुचित प्रयोग दुग्ध उत्पादन वातावरण में रासायनिक जोखिम उत्पन्न कर सकता है।

पशु चिकित्सा औषधियाँ

  • दुग्धारू पशुओं का उपचार केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित पशु चिकित्सा औषधियों से ही किया जाना चाहिए। औषधियों का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इस प्रकार किया जाए कि दूध की सुरक्षा, गुणवत्ता एवं उपयुक्तता प्रभावित न हो। इसके लिए निर्धारित निष्कासन अवधि (Withdrawal Period) का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
  • जिन पशुओं का उपचार ऐसी औषधियों से किया गया हो जिनके अवशेष दूध में पहुँच सकते हैं, उनके दूध का उपयोग निर्धारित निष्कासन अवधि पूर्ण होने तक नहीं किया जाना चाहिए। इस अवधि के दौरान प्राप्त दूध का उचित एवं सुरक्षित निस्तारण किया जाना चाहिए।
  • दूध में पशु चिकित्सा औषधियों के अवशेष निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पशु चिकित्सा औषधियों के अनुचित उपयोग से दूध एवं दुग्ध उत्पादों में हानिकारक अवशेष रह सकते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा तथा प्रसंस्कृत दुग्ध उत्पादों के निर्माण की उपयुक्तता प्रभावित हो सकती है।

दूध एवं दुग्ध उत्पादों के लिए स्वच्छता संबंधी आचार संहिता (CAC/RCP 57&2004)

स्वच्छ दुग्ध दोहन

  • दुग्ध दोहन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दूध में किसी भी प्रकार की अशुद्धि, संदूषण अथवा मिलावट की संभावना न्यूनतम रहे।
  • दुग्ध दोहन के दौरान स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त दूध तथा दुग्ध उत्पादों के उत्पादन हेतु आवश्यक नियंत्रण प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग है। स्वच्छता मानकों एवं कार्य प्रक्रियाओं का उचित पालन न करने पर दूध में हानिकारक सूक्ष्मजीवों, रासायनिक पदार्थों अथवा भौतिक संदूषकों के प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उसकी गुणवत्ता एवं सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

दूध का प्रबंधन, भंडारण एवं परिवहन

  • दूध के उपयोग को ध्यान में रखते हुए उसका प्रबंधन, भंडारण एवं परिवहन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि वह संदूषण से सुरक्षित रहे तथा उसमें सूक्ष्मजीवी भार की वृद्धि न्यूनतम हो।
  • दूध का उचित प्रबंधन, सुरक्षित भंडारण एवं वैज्ञानिक परिवहन सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त दूध तथा दुग्ध उत्पादों के उत्पादन हेतु आवश्यक नियंत्रण प्रणाली के महत्वपूर्ण घटक हैं।
  • अस्वच्छ उपकरणों अथवा बाह्य पदार्थों के संपर्क में आने से दूध संदूषित हो सकता है। इसी प्रकार, अनुचित तापमान प्रबंधन के कारण दूध में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि तीव्र हो सकती है, जिससे उसकी गुणवत्ता एवं भंडारण क्षमता प्रभावित होती है।

दूध दुहने के उपकरण

  • दूध दुहने के उपकरणों का निर्माण, स्थापना, रखरखाव एवं उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दूध में किसी भी प्रकार की अशुद्धि या संदूषक का प्रवेश न हो।
  • सामान्यतः दूध दुहने के उपकरण स्वीकृत मानकों के अनुसार निर्मित किए जाते हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • डेयरी फार्मों में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों का चयन मान्यता प्राप्त गुणवत्ता एवं निर्माण मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
  • दूध दुहने के उपकरणों के उचित उपयोग, नियमित सफाई एवं रखरखाव के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है। इससे उपकरणों के माध्यम से पशुओं के बीच रोगों के प्रसार को रोका जा सकता है तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त दूध का उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • उपकरणों का संचालन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि पशुओं के थनों एवं स्तनाग्रों को किसी प्रकार की क्षति न पहुँचे तथा उपकरणों के माध्यम से रोगों का प्रसार न हो।
  • थनों एवं स्तनाग्रों को होने वाली क्षति संक्रमण की संभावना को बढ़ा सकती है, जिससे दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए दूध दुहने के उपकरणों का सावधानीपूर्वक एवं वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।

    चित्र 1. डेयरी फार्म में उपयोग किए जाने वाले स्वच्छ एवं मानक अनुरूप दूध दुहने के उपकरण।

दूध भंडारण उपकरण

  • दूध भंडारण हेतु उपयोग किए जाने वाले टैंक एवं कैनों का निर्माण, रखरखाव तथा उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दूध में किसी भी प्रकार की अशुद्धि या संदूषक का प्रवेश न हो तथा उसमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि न्यूनतम रहे।
  • दूध तथा दूध दुहने के उपकरणों के भंडारण हेतु उपयोग किए जाने वाले स्थानों का चयन, निर्माण एवं रखरखाव इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दूध की स्वच्छता एवं गुणवत्ता सुरक्षित बनी रहे तथा किसी प्रकार का संदूषण न हो।
  • दूध का भंडारण सदैव ऐसी परिस्थितियों में किया जाना चाहिए जिससे उसकी गुणवत्ता बनी रहे, संदूषण की संभावना न्यूनतम हो तथा सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके।

चित्र 2. दूध के सुरक्षित भंडारण एवं शीतलीकरण हेतु उपयोग किया जाने वाला बल्क मिल्क कूलर।दूध संग्रहण, परिवहन एवं वितरण की

प्रक्रियाएँ तथा उपकरण

  • इस श्रेणी में दूध के संग्रहण, परिवहन एवं वितरण से जुड़े कर्मियों की गतिविधियाँ भी सम्मिलित हैं। दूध का संग्रहण, परिवहन एवं वितरण बिना अनावश्यक विलंब के किया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस प्रक्रिया के दौरान दूध संदूषण से सुरक्षित रहे और उसमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि न्यूनतम हो।
  • दूध के परिवहन में प्रयुक्त टैंकरों एवं कैनों का निर्माण, रखरखाव तथा उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि दूध की गुणवत्ता एवं स्वच्छता बनी रहे तथा उसमें किसी प्रकार की अशुद्धि, संदूषक अथवा सूक्ष्मजीवों की अनावश्यक वृद्धि न हो।
    अभिलेख संधारण
  • दुग्ध उत्पादन एवं गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित अभिलेखों का नियमित एवं व्यवस्थित संधारण किया जाना चाहिए, जिससे नियंत्रण प्रणाली की प्रभावशीलता का मूल्यांकन एवं सत्यापन किया जा सके।

संदर्भ

  1. दूध एवं दुग्ध उत्पादों के लिए स्वच्छता आचार संहिता (CODE OF HYGIENIC PRACTICE FOR MILK AND MILK PRODUCTS) CAC/RCP 57&2004
  2. विश्व व्यापार संगठन  समझौता श्रृंखला रू स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय (Sanitary and Phytosanitary Measures)] 2010.

लेखक :
कविता खोसला चैटली, निष्मा सिंह, वर्षा सिंह, रूपल पाठक एवं रंजना सिन्हा
पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग
पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा, दुर्ग (छत्तीसगढ़)

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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