पशुपालन

देशी मुर्गियों का ग्रामीण स्तर में उपलब्ध स्त्रोतों से आहार प्रबंधन

डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. एम. के. गेंदले, डॉ. मीनू दूबे, डॉ. रैना दोनेरिया, डॉ. सोनाली पृष्टि

मुर्गी की तुलना एक मशीन या फैक्ट्री से की जा सकती है, जो ग्रामीण परिवेश में उपलब्ध जैविक अनुपयोगी पदार्थों को पौष्टिक प्रोटिन (अंडा या मांस) में बदल देती हैं। देशी मुर्गी घर के आस पास उपलब्ध चारे एवं कीड़े मकोड़ों को बड़ी चतुरता एवं चपलता से हासिल करती हैं। इस वजह से उनकी ऊर्जा खपत होती हैं। जिससे उनकी बढ़त कम होती हैं। यदि ग्रामीण पशुपालक सुबह एवं शाम को अल्प मात्रा में कुक्कुट दाना नियमित रूप से दे तो उनकी मुर्गियों को 1 किलो शरीर भार पहुंचाने में कम समय लगेगा एवं पशुपालक अधिक लाभान्वित होगं। साथ ही उक्त कुक्कुट दाने में गांव में उपलब्ध कम खर्चीली पौष्टिक सामग्री मिलाने से कुक्कुट दाने का व्यय भी कम किया जा सकता हैं।

ग्रामीण परिवेश में निम्नलिखित उपाय अपनाये जा सकते हैं:-

  1. पानी सबसे सस्ता एवं आहार का प्रमुख पदार्थ होता हैं। जीवित मुर्गी में 55-60 प्रतिशत पानी ही होता हैं। दाने को नरम करने व पचाने, हजम हुए भोजन को खून में ले जाने, शरीर के अंदर से खराब तत्वों को बाहर निकालने और शरीर का तापमान बनाये रखने के लिये मुर्गियों को पानी की आवश्यकता होती हैं। मुर्गी घर एवं आंगन के पास बांस बर्तनों या किसी भी साफ बर्तन में स्वच्छ, ताजे पानी को 24 घंटे सुगमता से उपलब्ध कराना अति आवश्यक हैं।
  2. नियमित कृमिनाशक दवापान तथा बाह्य परजीवी नाशक का उपयोग करना चाहिए ।
  3. मुर्गियों को नियमित हरा चारा एवं स्थानीय उपलब्ध आहार प्रदान करने से उनकी बढ़त केवल स्वयं द्वारा चरने से ज्यादा तेजी से हो सकती हैं जिससे ग्रामीण पशुपालक लाभान्वित हो सकते हैं।

उपरोक्त उपाय अपनाने से देशी मुर्गियों में रोग भी कम लगते हैं। स्वस्थ्य मुर्गी में भोजन का उपयोग रोगों से लड़ने के लिये न होकर अण्डा व मांस बनने के लिये होने लगता हैं।

कुक्कुट आहार के घटको का संक्षिप्त विवरण एवं उनका महत्व:-

क्र. घटक शरीर के भीतर कार्य स्त्रोत
1. पानी पाचन, शरीर के तापमान को बनाए रखना शरीर में खुराक को ले जाना, शरीर से, अनावश्यक तत्वों को निकालना। पानी, ताजा हरा चारा
2. कार्बोहाइड्रेट ऊष्मा, ऊर्जा तथा उत्पादकता के लिये । मक्का, जौ, ज्वार, राइस पॉलिश,कनकी
3. प्रोटीन बढ़ोत्तरी, ऊतक निर्माण, अण्डा एवं मांस उत्पादन मूगफली, तिल सोयाबीन की खली, दाल का छिलका, मछली का चूरा,हरा चारा
4. खनिज हड्डी निर्माण, अण्डा उत्पादन, शरीर के सभी तंत्रों के लिये ।  हड्डी का चूरा, नमक, चूना सीप /संगमरमर का चूरा,
5. विटामिन  सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए तथा बेहतर अण्डा व मांस उत्पादन के लिये ।  हरा चारा, पीली मक्का, मछली का चूरा धूप ।

दाने (Concentrate) के घटक
मुर्गियों हेतू संतुलित आहार में दाना का एक निश्चित अनुपात में होना बहुत जरूरी हैं। दाना मुर्गी आहार का वह भाग है जिसमें रेशा की मात्रा कम होती है और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। दानों में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा पाये जाते हैं, दानों की उपयोगिता तथा आर्थिक दृष्टिकोण के आधार पर निम्न लिखित वर्गो में विभाजित किया जा सकता है। दाना में अपरिष्कृत रेशा कम होता है तथा सम्पूर्ण पाचक तत्व (टी.डी.एन.) या चयापचय उर्जा अधिक होता है। इनमें पाच्य प्रोटीन का प्रतिशत 12 प्रतिशत से अधिक होता है। मुर्गी दाना बनाने के लिये आवश्यक घटक निम्नानुसार हैः
1. अनाज के दाने (Cereal grain)- इस वर्ग के दानों में प्रोटीन की मात्रा थोड़ी कम होती है परंतु र्शकरा एवं स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। सम्पूर्ण पाचक तत्व अधिक होने के कारण यह आहार शीघ्र शक्ति प्रदान करते हैं। स्वादिष्ट होने के कारण इनके साथ पशु मोटे चारे को भी खा लेते हैं। इस वर्ग में मक्का, जौ, जई, ज्वार, बाजरा, गेहूं, सांवा, कोदो, आदि के दाने शामिल है। मुर्गियों के दाने में मुख्यतः मक्का, गेंहू या चांवल की कनकी का उपयोग का उपयोग किया जाता है।

2. दालों वाले दानें (Pulse)- यह फलीदार फसलों (Leguminous crops) का अनाज होता है। इन दालों में पाच्य प्रोटीन 18 से 22 प्रतिश्त तक पायी जाती है। इस वर्ग में चना, मटर, अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, लोबिया आदि अनाज आते हैं। इन अनाजों को दल कर पशुओं को खिलाया जाता है। मुर्गी दाना में सोयाबीन मिल का उपयोग किया जाता है।

3. अनाज के उपोत्पाद (Cereal by products)- इस वर्ग में गेहूं का चौकर, चावल का कनकी तथा चूनी आदि शामिल है। यह सुपाच्य तथा स्वादिष्ट होता है। इनमें 10 से 16 प्रतिशत प्रोटीन एवं पर्याप्त मात्रा में खनिज लवण एवं विटामिन होता है। मुर्गियों के दाने में उप उत्पाद के रूप में वर्तमान में मुख्यतः मक्का या चांवल के ग्लूटल मिल का उपयोग किया जा रहा है।

4. खली (oil cakes)- यह पाचक तथा स्वादिष्ट होते हैं। इनमें प्रोटीन तथा वसा की मात्रा अधिक होती है। इनमें लगभग 30 से 45 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, इसलिए संतुलित आहार में खलियों का होना आवश्यक होता है। इस वर्ग में अलसी, मूंगफली, बिनौले, तिल तथा सरसों की खली आती है।

5. पशु अन्य पदार्थ (Animal products)- इस वर्ग में मछली का चूरा, रक्त चूर्ण, हड्डी का चूरा, खाद्य, मट्ठा, सपरेटा, मांस का छिछड़ा आदि। इनमें लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, एवं ये कैल्शियम, फास्फोरस एवं अन्य खनिज लवण के अच्छे स्त्रोत है।

इसके अलावा गांव में खेतों में उपलब्ध हरा चारा प्रोटीन, खनिज एवं विटामिन का अच्छा स्त्रोत हैं। जो हर आयु वर्ग की मुर्गियों को दिया जाना चाहिए । यह मुर्गियों के स्वास्थ्य व अंडा उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी हैं। यदि पत्तेदार हरा चारा फूल आने से पहले काटकर मुर्गियों को दिया जाये तो उन्हें प्रोटीन, खनिज एवं विटामिन भरपूर मात्रा में मिलते हैं। हरे चारे में बरसीम एवं लोबिया सर्वोत्तम माने जातें हैं। इसके अलावा गोभी, गाजर, मूली आदि के पत्ते, पालक जैसी सब्जियों के अनुपयोगी पत्तों के हिस्से भी दिये जा सकते हैं। मुर्गी आहार में एजोला भी दिया जा सकता हैं। हरे चारे को साफ पानी से धोकर एवं काटकर देना चाहिए हरा चारा को निम्नलिखित मात्रा अनुसार खिलाना चाहिए ।
मुर्गी – 30 से 50 ग्राम प्रतिदिन
चूजा- 20 से 30 ग्राम प्रतिदिन

मुर्गी आहार के लिये दीमकों का उपयोग:-

  • पुराने सूती कपड़े के टुकड़े/बोरे का टुकड़ा
  • गोबर के सूखे कंडे एवं थोड़ा कच्चा गोबर
  • लकड़ी के सूखे टुकड़े
  • दीमक युक्त, दीमक बाम्बी का टुकड़ा
  • पर्याप्त नमी
  • 2-3 दिनों तक मटके को उलटकर , आस पास में पानी छिड़कर रखते है।

मटके को पलटकर, दीमक चूजों को खिलाया जा सकता हैं। इससे उन्हें अच्छा प्रोटीन मिलता हैं। जिससे अच्छी बढ़त होती हैं।

व्यावसायिक मुर्गी आहार:-
बाजार में मांस उत्पादन हेतू उपलब्ध मुर्गी दाने में 18 से 22 प्रतिशत पाच्य प्रोटीन व 2800 से 3200 किलो कैलोरी उपापचय उर्जा होना चाहिये। व्यावसायिक मुर्गीपालन में ब्रायलर स्टाटर, ब्रायलर फिनिशर, ग्रोवर, लेयर व नर व मादा ब्रीडर में पाच्य प्रोटीन व उपापचय उर्जा की मात्रा निश्चित किया गया है, एवं समय-समय पर इसमें आवष्यकता अनुसार परिवर्तन होते रहता है। मुर्गी (ब्रायलर), अंडें वाली मुर्गी (लेयर) व देशी मुर्गी के शारीरिक वृद्धि व उत्पादन के अनुसार अलग अलग तरह के संतुलित आहार उपलब्ध है, जिसमें कम से कम 20 से 22 प्रतिशत पाच्य प्रोटीन व 2800 से 3200 किलो कैलारी ऊर्जा होती है, जिसमें मुख्यतः मक्का, चांवल कनकी,गेंहू,ज्वार, बारलें, गेंहू का चोकर, सोयाबीन खली, मुंगफल्ली खली, अलसी खली, मछली का चूरा, विभिन्न प्रकार की चूनी, शैल ग्रिट,कैल्साइट पावडर व खनिज लवण व नमक का उपयोग किया जाता है मुर्गीपालक इन चीजों का उपयोग कर खुद भी दाना तैयार कर सकते है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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