पशुपालन

आधुनिक चूजा प्रबंधन : उच्च उत्पादन की आधारशिला

डॉ. संभूति शंकर साहु, डॉ. नागेंद्र कुमार, डॉ. सौरभ योगी, डॉ. वंदना भगत

चूजा प्रबंधन पोल्ट्री पालन की नींव है। पहले 6 सप्ताह चूजों के जीवन के अत्यंत संवेदनशील चरण होते हैं। इस अवधि में तापमान, आहार, स्वच्छता, टीकाकरण और अन्य सभी प्रबंधन उपायों को यदि सही तरीके से अपनाया जाए तो आगे चलकर उच्च उत्पादन और कम मृत्यु दर सुनिश्चित होती है।

  1. चूजों के आगमन से पहले की तैयारी
  • ब्रूडर हाउस की सफाई और कीटाणुशोधन:
    • पुराने कूड़े को हटाएं।
    • 4% फॉर्मालिन या ब्लिचिंग पाउडर से ब्रूडर को कीटाणुशोधित करें।
    • 7 दिन तक खाली रखें ।
  • बिछावन :
    • चूजों के लिए 4–6 इंच मोटी भूसे, लकड़ी की भूसी या चोकर की परत बिछाएं।
    • सूखा और साफ होना चाहिए।
  • ब्रूडर रिंग :
    • व्यास 1.5–2 मीटर का गोल रिंग, ऊँचाई 1–1.5 फीट रखें।
    • चूजों को सीमित क्षेत्र में रखने के लिए आवश्यक।
  1. तापमान प्रबंधन

सप्ताह

तापमान (सेल्सियस)

1st

32–35°C

2nd

30–32°C

3rd

28–30°C

4th

26–28°C

गर्मी कम करने के लिए तापमान को हर सप्ताह 2–3°C कम करें।

चूजे एक-दूसरे से चिपकें = ठंड लग रही है

दूर-दूर हों = गर्मी अधिक है

  1. आहार प्रबंधन

आहार के चरण:

अवधि

फीड टाइप

प्रोटीन (%)

एम. .  (किलो कैलोरी/किलोग्राम )

0–1 सप्ताह

प्री-स्टार्टर

23–24

3000–3200

2–5 सप्ताह

स्टार्टर

20–22

2900–3100

6 सप्ताह बाद

ग्रोवर या फिनिशर

18–20

2800–3000

खुराक विधि:

    • पहले 2 दिन पेपर पर दाना छिड़कें।
    • फिर ट्रे/राउंड फीडर का प्रयोग करें।
    • फीडर ऊँचाई = चूजे की पीठ के बराबर रखें।

आहार प्रबंधन – एडवांस्ड जानकारी

मुख्य पोषक तत्व:

पोषक तत्व

कार्य

प्रोटीन (ए .ए )

मांसपेशी और पंख विकास

ऊर्जा (कार्बोहाइड्रेट )

जीवित रहने, बढ़ने के लिए आवश्यक

कैल्शियम और फास्फोरस

हड्डियों और अंडाशय विकास

विटामिन ए , डी , ई

प्रतिरक्षा और विकास में सहायक

आम समस्याएँ:

समस्या

कारण

समाधान

पैरों में कमजोरी

विटामिन D3/Ca की कमी

सप्लीमेंट दें

बहे हुए पंख

प्रोटीन की कमी

उच्च प्रोटीन फीड दें

पानी प्रबंधन:

    • स्वच्छ, गुनगुना और ताजे पानी की निरंतर आपूर्ति।
    • हर 100 चूजों पर 1 वाटरर।
    • गर्मियों में इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन मिलाएं।
    • पानी का तापमान: 18–22°C सबसे उपयुक्त है।
    • गर्मियों में ORS/विटामिन + इलेक्ट्रोलाइट्स दें।
    • क्लोरीन (1 ppm) द्वारा पानी कीटाणुरहित करें।
  1. प्रकाश प्रबंधन

उम्र

प्रकाश समय

प्रकार

0–7 दिन

24 घंटे

निरंतर, मध्यम रोशनी

8–21 दिन

20–22 घंटे

आंशिक रूप से कम

22+ दिन

16–18 घंटे

सामान्य प्रकाश

चूजों को शुरुआती दिनों में लगातार प्रकाश से खाने-पीने में मदद मिलती है।

प्रकाश का उद्देश्य:

    • भोजन/पानी की पहचान करवाना
    • प्रतिरक्षा तंत्र और पाचन एंजाइम के विकास को प्रेरित करना

प्रकाश की रंग-ऊर्जा:

रंग

प्रभाव

लाल

चूजों को उत्तेजित करता है, खाने की प्रवृत्ति बढ़ाता है

नीला

शांत करता है, आपसी झगड़े कम करता है

सफेद

सामान्य विकास हेतु उपयोगी

आधुनिक फार्म में LED  प्रोग्रामेबल लाइट्स का उपयोग होता है।

  1. टीकाकरण

टीकाकरण और रोग नियंत्रण

टीकाकरण कार्यक्रम:

दिन

टीका

तरीका

बीमारी

5–7

रानीखेत (एफ 1)

आँख में ड्रॉप

रानीखेत रोग

14

गम्बोरो (IBD )

मुंह/पानी

गम्बोरो रोग

21

रानीखेत (लसोटा )

पीने के पानी

रानीखेत (बूस्टर)

28+

फाउल पॉक्स/INF

स्किन इंजेक्शन

फाउल पॉक्स

टीका देते समय सटीक मात्रा, साफ उपकरण और सही तकनीक का पालन अनिवार्य है।

  1. स्वास्थ्य और स्वच्छता
  • डे-बाई-डे रिकॉर्ड रखें:
    • मृत्यु, वजन, खपत आदि।
  • बायो-सिक्योरिटी उपाय:
    • बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश रोकें।
    • फुटबाथ, चूना और सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
  • बीमार चूजों की पहचान:
    • सुस्त, फड़फड़ाते, पंख फूले हुए, कम खाने वाले।
    • इन्हें तुरंत अलग करें।
  1. विकास और वजनहर सप्ताह वजन लें।

एफ सी आर  (फ़िड  कन्वर्ज़न  रेशियो ):

    • एफ सी आर  = कुल फीड सेवन (किलो) / कुल वजन वृद्धि (किलो)
    • ब्रोइलर में एफ सी आर  = 1.6–1.8 होना चाहिए।

लक्ष्य वृद्धि:

  • 6 सप्ताह में 1.8–2.2 किलोग्राम।

उम्र

औसत वजन (ग्राम)

एफ सी आर

1 सप्ताह

180–200 g

1.2

2 सप्ताह

400–450 g

1.4

4 सप्ताह

850–1000 g

1.6

8 स्वच्छता और जैव सुरक्षा

    • बायो-सिक्योरिटी उपाय:
    • फार्म में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित करें।
    • प्रवेश द्वार पर पांव धोने का फॉर्मालिन/चूने का घोल रखें।
    • उपकरण अलग-अलग बैच के लिए अलग हों।
    • बीमार पक्षियों को अलग करें (क्वारंटीन)।

निष्कर्ष

  • चूजा प्रबंधन कोई सामान्य काम नहीं, बल्कि विज्ञान, अनुशासन, और सतर्कता का मेल है। यदि निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें:
  • तापमान संतुलित
  • पोषण संतुलित
  • रोग नियंत्रण कड़ा
  • प्रकाश, पानी, स्थान उचित
  • बायो-सिक्योरिटी लागू
  • तो मृत्यु दर < 3% और वजन > 2 किग्रा (6 सप्ताह में) संभव है।

 लेखक :
डॉ. संभूति शंकर साहु, सहायक प्राध्यापक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़
डॉ. नागेंद्र कुमार, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, जशपुर, छत्तीसगढ़
डॉ. सौरभ योगी, पशुचिकित्सा सहायक शल्य चिकित्सक , भिलाई, छत्तीसगढ़
डॉ. वंदना भगत, सहायक प्राध्यापक, दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय,  अँजोरा, दुर्ग, छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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