पशुपालन

मुर्गी पालन हेतु मुर्गियों का चयन एवम आहार प्रबंधन

डॉ.ऋतु गुप्ता, डॉ.गोविना देवांगन, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ नेहा साहु, डॉ. वर्षा रानी गिलहरे

ग्रामीण परिवेश में पशुपालक मुर्गियों को एक से डेढ़ किलो के वजन होने पर कुछ को बेचते हैं, कुछ को खाने एवं मेहमानों को खिलाने, एवं शेष को चूजे उत्पन्न करने के लिए (प्रजनन के लिये) उपयोग करते हैं। प्रायः यह देखा गया है कि पशुपालक किन मुर्गियों को प्रजनन के लिये उपयोग करेंगे एवं किन्हें बेचेंगे, का चयन ठीक से नहीं कर पाते हैं, जिससे कई बार कुड़क मुर्गी या ज्यादा अण्डे देने योग्य मुर्गियों को बेचा या खाया जाता है एवं अयोग्य मुर्गी चूजे उत्पन्न करने के लिये रख ली जाती है। इसका प्रतिकूल असर मुर्गी पालन के व्यवसाय पर पड़ता है।

प्रजनन हेतु कितने मुर्गे या मुर्गियों को रखना है, निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:

  • मुर्गी घर की क्षमता – कम जगहों में ज्यादा कुक्कुट रखने पर कई तरह की समस्यायें आ सकती है।
  • खाने के उपयोग अथवा बेचने की क्षमता – आस-पास में बाजार की व्यवस्था कैसी है।
  • पशुपालक की कुक्कुट दाना पानी एवं देखभाल करने की क्षमता – पशुपालक की आर्थिक स्थिति ।

उपरोक्त आधार पर पशुपालक को यह तय करना चाहिए कि वह कितनी मुर्गियों को बेचेंगे एवं कितनों को प्रजनन हेतु रखेंगे।

प्रजनन हेतु मुर्गा/ मुर्गियों का चयन

  • तेजी से बढ़ने वाले, स्वस्थ मुर्गा/मुर्गी चयन योग्य हैं। ऐसे कुक्कुटो की मजबूत चोंच एवं छोटे तथा पैने नाखून होते हैं। चमकदार लाल कलगी स्वस्थ एवं चुस्त कुक्कुट की निशानी होती है।
  • जो मुर्गियां कम उम्र में अण्डोत्पादन प्रारंभ कर देती है, उन्हें एवं उनके चूजों को भविष्य में प्रजनन हेतु चयन करना चाहिए।
  • दो वर्ष से अधिक समय तक अण्डे दे रही मुर्गियों को प्रजनन के लिए पुनः उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • उन्न्त मुर्गियों के अंडे देने के स्थान के दोनों तरफ नुकीली हड्डी होती है। तीन उंगली बराबर फासला अधिक अच्छा माना जाता है।
    व उन मुर्गियों का चयन करें जिनके गुदा द्वार साफ, नरम एवं बड़े हो।
  • कुछ मुर्गे अकेले इधर से उधर भटकते हैं। प्रजनन हेतु उन मुर्गों का चयन करना चाहिए, जो प्रजनन योग्य मुर्गियों के पीछे दौड़ते हैं।
    व प्रजनन योग्य मुर्गों को एक वर्ष के भीतर बदल देना चाहिए।


स्वस्थ चुजे

स्वस्थ नर

स्वस्थ कुड़क मुर्गी

मुर्गीयों में आहार प्रबंधन
हरा चारा
हरा चारा प्रोटीन, खनिज एवं विटामिन का अच्छा स्त्रोत है, जो हर आयु वर्ग की मुर्गियों को दिया जाना चाहिए। यह मुर्गियों के स्वास्थ्य व अंडा उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी है। यदि पत्तेदार हरा चारा फूल आने से पहले काटकर मुर्गियों को दिया जाये तो उन्हें प्रोटीन, खनिज एवं विटामिन भरपूर मात्रा में मिलते है। हरे चारे में बरसीम एवं लोबिया सर्वोत्तम माने जाते है। इसके अलावा गोभी, गाजर, मूली आदि के पत्ते, पालक जैसी सब्जियों के अनुपयोगी पत्तों के हिस्से भी दिये जा सकते है। मुर्गी आहार में एजोला भी दिया जा सकता है। हरे चारे को साफ पानी से धोकर एवं काटकर देना चाहिए। हरा चारा को निम्नलिखित मात्रा अनुसार खिलाना चाहिए।
मुर्गी – 30 से 50 ग्राम प्रतिदिन
चूजा – 20 से 30 ग्राम प्रतिदिन


अजोला – हरा चारा घरेलू सब्जियां

मुर्गी आहार के लिये दीमकों का उपयोग

  • पुराने सूती कपड़े के टुकड़े /बोरे का टुकड़ा
  • गोबर के सूखे कंडे एवं थोड़ा कच्चा गोबर
  • लकड़ी के सूखे टुकड़े
  • दीमक युक्त, दीमक बाम्बी का टुकड़ा
  • पर्याप्त नमी
  • 2-3 दिनों तक मटके को उलटकर, आस पास में पानी छिड़कर रखते है।

मटके को पलटकर, दीमक चूजों को खिलाया जा सकता है। इससे उन्हें अच्छा प्रोटीन मिलता है। जिससे अच्छी बढ़त होती है।

लेखक:
डॉ.ऋतु गुप्ता (सहायक प्राध्यापक), डॉ.गोविना देवांगन ( सहायक प्राध्यापक ),
डॉ. अभिषेक कुमार (पशु चिकित्सक), डॉ नेहा साहु ( पशु चिकित्सक ), डॉ. वर्षा रानी गिलहरे ( पशु चिकित्सक )

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