राष्ट्रीय

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 80वें स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार!

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मैं इस राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। अब से कुछ ही घंटों बाद, हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा। देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीय यह पर्व उल्लास के साथ मनाते हैं। हमारा तिरंगा हमारी स्वाधीनता का प्रतीक है। इसे हम पूरी शान से फहराते हैं।

15 अगस्त 1947 के दिन भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुई। सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने। हम भारत के लोग, अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का उपयोग कर सकें, और भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करें – इसी में स्वतन्त्रता की सार्थकता है।

निष्ठावान विद्यार्थी और शिक्षक, विकास के लिए तत्पर वैज्ञानिक और इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, मेहनती श्रमिक और अन्नदाता किसान, अपने प्रयासों से राष्ट्र-निर्माण कर रहे हैं। प्रतिभावान खिलाड़ी, शिल्पकार तथा कलाकार, मार्गदर्शक बुद्धिजीवी, निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों की टीमों के कर्मठ सदस्य, जनहित में सेवारत जनप्रतिनिधि, न्याय-व्यवस्था से जुड़े न्यायकर्मी, कार्यनिष्ठ सिविल सेवक, अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले छोटे-बड़े सभी निवेशक, निस्वार्थ समाज सेवी और स्वच्छता अभियान के अग्रणी कार्यकर्ता – हमारे सभी सफाई-मित्र देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में सक्रिय, असंख्य देशवासी, तथा संविधान में निहित, मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिक, राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। मैं उन सभी की हृदय से सराहना करती हूं। तीनों सेनाओं के जवानों, सभी सशस्त्र पुलिस बलों एवं पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा के लिए मैं उनकी विशेष सराहना करती हूं। विश्व-पटल पर भारत का मान-सम्मान बढ़ाने वाले प्रवासी भारतीयों, और दूतावासों में कार्यरत देशवासियों की मैं प्रशंसा करती हूं।

प्यारे देशवासियो,

स्वाधीनता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। अंत्योदय की भावना के साथ, हमारा संकल्प है कि विकास का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे। अपनी समृद्ध विरासत और स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए हम आधुनिक विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं। ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’, यह वेद-वाक्य हमें प्रेरणा देता है कि हम राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहें।

हमारे स्वाधीनता संग्राम में संघर्षरत अलग-अलग विचारधाराओं के लोगों का लक्ष्य एक ही था – भारत की स्वतन्त्रता। ‘स्वदेशी आंदोलन’ के दौरान, ‘वंदे मातरम्’ जन-जन का गीत बन गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में अनगिनत देशवासी स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गए। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने समाज सुधार तथा राष्ट्र-निष्ठा के उच्च आदर्श प्रस्तुत किए। भारतमाता की उन सभी महान संतानों को मैं सादर नमन करती हूं जिनके आदर्शों पर चलते हुए हमारा देश स्वतंत्र हुआ और आगे बढ़ा।

आज 14 अगस्त के दिन को हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। हम उन लाखों देशवासियों को याद करते हैं जो विभाजन से जुड़ी हिंसा में मारे गए या विस्थापन की त्रासदी झेलने को मजबूर हुए। सांप्रदायिक हिंसा की वजह से लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा और बंटवारे की विभीषिका सहन करनी पड़ी। फिर भी, उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी।

जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ, उस समय देश के विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ-साथ, 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत के साथ जोड़ना भी एक असाधारण चुनौती थी। सरदार पटेल ने राजशाही व्यवस्थाओं को समाप्त करके हमारे स्वाधीन लोकतन्त्र में उनका विलय किया। एक कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से, आधुनिक भारत की एकता के शिल्पकार, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की पावन स्मृति को मैं सादर नमन करती हूं।

प्यारे देशवासियो,

‘भारत के लोगों’ द्वारा निर्मित हमारा संविधान नागरिकों की भागीदारी पर आधारित है। लोकतन्त्र की जननी भारतभूमि के निवासियों में जनभागीदारी की भावना सदा से विद्यमान रही है। उस भावना को, नई ऊर्जा के साथ, हमारे देशवासी आगे बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय अभियानों को जनभागीदारी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह हमारे लोकतन्त्र की प्रेरक उपलब्धि है।

प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा व्यक्ति की गरिमा, हमारे संविधान के प्रमुख आदर्श हैं। आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग, अनेक क्षेत्रों में, असाधारण योगदान दे रहे हैं। इससे, मेरा यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।

हमारे संविधान में कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका के उत्तरदायित्वों का स्पष्ट उल्लेख है। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में, जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें। कार्यपालिका का कर्तव्य है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप दे। न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। हर नागरिक को, विशेषकर वंचित वर्गों के लोगों को, समानता के आधार पर, सम्मान के साथ, समय से न्याय मिलना चाहिए।

प्यारे देशवासियो,

पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने

तेज गति से समावेशी विकास किया है,

विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है, तथा

विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है।

हमारे देशवासी महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मना रहे हैं। महात्मा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उनके आदर्शों के अनुसार विगत कुछ वर्षों के दौरान वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है। महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के नए प्रतिमान स्थापित हुए हैं। 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है। विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेश की योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। उनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं। 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था द्वारा उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान सम्मान निधि तथा किसान क्रेडिट कार्ड्स से खेती, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों से जुड़े किसान भाई-बहनों को संबल मिला है।

विश्व का इतिहास साक्षी है कि सांस्कृतिक आत्मबल पर आधारित विकास गतिमान और स्थायी होता है। आज देश में यह चेतना बलवती हो रही है कि सांस्कृतिक गौरव का भाव देश की संप्रभुता को आत्मिक शक्ति प्रदान करता है। हमारे पूर्वजों ने ज्ञान-विज्ञान, कला-संस्कृति, अध्यात्म और सदाचार की अनमोल विरासत सौंपी है। हम विरासत और विकास के समन्वय के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा digital infrastructure विकसित किया गया है। गांवों की छोटी-छोटी दुकानों में तथा रेहड़ी-पटरी पर भी digital payments हो रहे हैं। विश्व में आधे से अधिक real time digital transactions भारत में हो रहे हैं। हमारे देशवासियों और सरकार ने मिलकर, digital क्रांति का उदाहरण, विश्व-समुदाय के सामने प्रस्तुत किया है। Technology का उपयोग करके, सरकार ने जनकल्याण की सुविधाओं को, पारदर्शी तरीके से जन-जन तक पहुंचाया है।

हमारे देश में highways, waterways, railways और airways के रूप में आधुनिक infrastructure का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इससे नए उद्यमों के लिए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, नए रोजगारों का सृजन हो रहा है तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है।

प्यारे देशवासियो,

विश्व के अनेक क्षेत्रों में युद्ध एवं अस्थिरता का सभी देशों पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में भी, हमारे देश की अर्थव्यवस्था, सबसे तेज गति से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है। आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की विकास दर विश्व की औसत विकास दर की तुलना में दोगुने से अधिक रहेगी। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से, हमारी आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है।

आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर अग्रणी योगदान दे रहा है। Sustainable Development Goals 2030 के कुछ लक्ष्यों को हमारे देश ने समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है। Renewable Energy के विकास को पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है।

हमारी विदेश नीति, देश हित पर आधारित है। शांति, सहयोग, संवाद तथा वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श हमारी विदेश नीति के स्तम्भ हैं। आर्थिक सहयोग बढ़ाने तथा पारस्परिक सम्बन्धों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए, हमने अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। Global South के देशों में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। विश्व पटल पर हमारे देश का सम्मान बढ़ा है। हम rules based international order में विश्वास रखते हैं। हमारा प्रयास है कि संयुक्त राष्ट्र संघ सहित, multilateral organisations में विश्व समुदाय का समुचित प्रतिनिधित्व हो। हमारे इस प्रयास को अनेक देशों का प्रबल समर्थन मिल रहा है।

प्यारे देशवासियो,

प्राकृतिक संपदाओं पर हमारी भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना हमारा है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसी भी कार्य से, आने वाली पीढ़ियों द्वारा इस अधिकार के प्रयोग में तनिक भी कमी न हो। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम उनको और अधिक समृद्ध प्राकृतिक संपदाएं प्रदान करें। पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी आस्था हमारी परंपरा का हिस्सा है। संताली भाषा के एक सरल गीत में हमें गहरा संदेश मिलता है। पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा रचित उस गीत के कुछ शब्द इस प्रकार हैं:

दारे गुजूग कान ञेल ते

मिरु चेणेय राग बयहा दाया हाया गे।

गुजूग कान आबोवा जाति धरम दारे

चेदाग बाबोन राग बयहा आबो अना ञेल ते।

इस गीत में, एक पेड़ के पूरी तरह सूख जाने के कारण रोते हुए एक तोते का वर्णन करते हुए कवि कह रहे हैं – ‘हे मेरे भाइयो! मरते हुए पेड़ को देखकर तोता-पक्षी दुख भरी आवाज में रो रहा है। हे मेरे भाइयो! मानव-संस्कृति रूपी वृक्ष का विनाश होता देखकर हम, मानव समाज के लोग, विलाप क्यों नहीं कर रहे हैं?’ इस गीत का संदेश यह है कि सभी मनुष्यों को मानवीय मूल्यों और प्रकृति के संरक्षण के लिए तत्पर रहना चाहिए। एक हरा-भरा पेड़, मानव समाज के नैतिक और स्वस्थ रहने का प्रतीक है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ तथा ‘Lifestyle for Environment’ यानी LiFE जैसे अभियानों की भावना के अनुरूप सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करना चाहिए।

मेरे प्यारे देशवासियो,

मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती है कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बेटियां प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं। साथ ही, कृषि उत्पादकता बढ़ाने में योगदान देने वाली ड्रोन दीदी से लेकर, वायु सेना में Fighter Combat Leader बनने तक, विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। हाल ही में Glasgow में सम्पन्न हुए Commonwealth Games में भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में 8 स्वर्ण पदक बेटियों ने जीते हैं। महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ से अधिक महिला सदस्य हैं। 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया गया था। इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है। अब हमारा देश 3 करोड़ महिलाओं को नई लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। ‘मुद्रा योजना’ के तहत सहायता प्राप्त करने वाले उद्यमियों में लगभग दो तिहाई लाभार्थी महिलाएं हैं।

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रयासों के साथ-साथ, हम देख रहे हैं कि वे विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी हमारे गणतन्त्र की विशेष सफलता है। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं का 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के लिए, वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया जा चुका है। इस अधिनियम के लक्ष्य को प्राप्त करने से महिलाओं का नेतृत्व बढ़ेगा तथा हमारा लोकतन्त्र और अधिक समावेशी बनेगा।

देश की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोगों की आयु 35 वर्ष से कम है। यह युवा आबादी हमारी सबसे मूल्यवान सम्पदा है। हमारे देश के युवा talented हैं, committed हैं और skilled हैं। जमीनी स्तर पर, युवाओं द्वारा किए गए विभिन्न समस्याओं के innovative और practical solutions को देखकर मुझे समाज और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है। केवल 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम द्वारा हाल ही में रॉकेट का सफल प्रक्षेपण करके अन्तरिक्ष अन्वेषण के एक नए चरण का शुभारंभ किया गया है।

हमारे अनेक युवा स्वरोजगार के मार्ग पर चलते हुए रोजगार प्रदान करने की संस्कृति को अपना रहे हैं। युवा उद्यमियों की भागीदारी से हमारे देश में एक मजबूत start-up ecosystem विकसित हुआ है। विश्व के बड़े-बड़े उद्यम भारत के युवाओं की प्रतिभा और लगन से प्रभावित रहते हैं तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में नियुक्त करते हैं। ऐसे युवाओं ने विश्व समुदाय में भारत की युवा शक्ति की साख बढ़ाई है। हमारी युवा पीढ़ी भारत के स्वर्णिम भविष्य के प्रति मेरी आस्था को और प्रबल बनाती है।

हमारे विद्यार्थी, भारत के भविष्य निर्माता हैं। जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार और समाज का एकजुट रहना जरूरी है, उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सभी के सम्मिलित प्रयास जरूरी हैं। सार्वजनिक परीक्षाएं, विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए, सरकार इन परीक्षाओं में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर पूरी तरह से अंकुश लगे, परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तथा युवाओं के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद हो।

सरकार के प्रयासों तथा नई आर्थिक गतिविधियों से युवाओं के लिए अनेक प्रकार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। ऐसे अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करके हमारे युवा सफलता के नए मार्ग चुन सकते हैं।

हमारे युवाओं का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य देश के भविष्य का आधार है। परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी है कि हमारे युवा उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहें।

खेलकूद को युवाओं के विकास और राष्ट्र-निर्माण के माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक देश के सभी क्षेत्रों के लिए sports ecosystem उपलब्ध कराया जा रहा है। खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। इन प्रयासों के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में हमारे खिलाड़ी प्रदर्शन और उपलब्धियों के ऊंचे शिखरों तक पहुंच रहे हैं।

एक ओर हमारे देश में सबसे बड़ी युवा आबादी है तो दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 70 साल और उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं उपलब्ध हैं। वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपनेपन की भावना तथा उनके आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए पूरे समाज को संवेदनशील रहना चाहिए।

प्यारे देशवासियो,

सत्य और न्याय के पक्ष में, मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की भारतीय परंपरा पर हम गर्व करते हैं। 26 जुलाई को हमने कारगिल विजय दिवस मनाया। उसके पहले, 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के आरंभ का एक वर्ष पूरा होने पर, हमने अपनी सेनाओं के अतुल्य पराक्रम का स्मरण किया। आतंकवाद के विरुद्ध वह ऐतिहासिक ऑपरेशन, भारतीय सेनाओं की अचूक क्षमता का प्रमाण है। आतंकियों और उनके समर्थकों को यह कठोर संदेश दिया गया कि वे चाहे कहीं भी जाकर छिप जाएं, लेकिन उन्हें अपने किए की सजा जरूर मिलेगी। आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ अतीत में की गई सिंधु जल संधि का निलंबन करना हमारे देश के, विशेषकर किसानों के हित में एक निर्णायक कदम है।

दशकों से, नक्सलवाद देश के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ था। भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है तथा विकास की सर्वस्पर्शी धारा प्रवाहित हो रही है। बस्तर ओलिंपिक्स में खिलाड़ियों ने, बस्तर पंडुम में कलाकारों ने, तथा इन आयोजनों में दर्शकों ने, भारी संख्या में हिस्सा लिया।

राष्ट्र-गौरव की रक्षा हेतु निर्मित मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 दुर्गों को पिछले वर्ष UNESCO की World Heritage List में स्थान दिया गया। और इस वर्ष, भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन के स्थल सारनाथ को UNESCO World Heritage List में शामिल किया गया है। भारतभूमि में एक ओर भगवान बुद्ध से जुड़े आध्यात्मिक स्मारक हैं तो दूसरी ओर आत्मसम्मान तथा अपनी गौरवशाली परम्पराओं की रक्षा हेतु युद्ध करने की हमारी प्रभावशाली क्षमता के प्रतीक भी विद्यमान हैं।

मेरे प्यारे देशवासियो,

सभी भारतवासियों का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक लक्ष्य है। तेलुगू भाषा में रचना करने वाले महान राष्ट्रवादी साहित्यकार, गुरजाडा अप्पाराव ने, अपने एक गीत में, सभी भारतवासियों को देश प्रेम का अमूल्य संदेश दिया है। उन्होंने कहा है:

देसमुनु प्रेमिंचुमन्ना, मंचि अन्नदि पेंचुमन्ना।

देसमंटे, मट्टि कादोय, देसमंटे, मनुषुलोय।

इन पंक्तियों का भाव है:

देश से प्रेम करो; भलाई को बढ़ाओ;

देश का अर्थ केवल मिट्टी ही नहीं है।

देश का अर्थ समस्त जनसमुदाय है।

मुझे विश्वास है कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव में, नगर-नगर में, भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे।

आइए, देश प्रेम की इसी सर्व समावेशी भावना के साथ हम सब स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय-साधना में स्वयं को समर्पित करें।

धन्यवाद!

जय हिंद!

जय भारत!

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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