वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने आईसीएआर–एनआईबीएसएम की पहल, 65 किसानों को कृषि यंत्र वितरित


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर में फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम (एफएफपी) के अंतर्गत मंगलवार को किसान–वैज्ञानिक संवाद सह कृषि यंत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड के नव-चयनित पांच गांव—बरौंडा, अड़सेना, मोहदी, गनियारी और असौंदा—के किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक खेती, कृषि यंत्रीकरण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
संस्थान द्वारा संचालित फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम को फसल उत्पादन, उद्यानिकी, पशुधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, उद्यम विकास तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) से संबंधित छह विषयगत मॉड्यूल के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। सहभागी दृष्टिकोण पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रौद्योगिकी के प्रभावी एकीकरण, खेत स्तर पर तकनीकों के सत्यापन, किसानों से प्राप्त सुझावों के आधार पर उनमें सुधार, संस्थागत सहभागिता तथा प्रभावी ज्ञान प्रसार के माध्यम से किसान–वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम का लक्ष्य कृषि उत्पादकता, लाभप्रदता और किसानों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने कृषि उत्पादकता, लाभप्रदता और स्थिरता बढ़ाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों से वितरित कृषि यंत्रों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि यंत्रीकरण से श्रम की कठिनाई कम होती है, कृषि कार्य समय पर पूरे होते हैं तथा खेती की दक्षता और फसल उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
डॉ. राय ने किसानों से संवाद कर खेत स्तर पर आने वाली समस्याओं और चुनौतियों की जानकारी ली तथा उनके समाधान पर चर्चा की। उन्होंने किसानों से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने और प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया, ताकि वे उभरती कृषि तकनीकों एवं वैज्ञानिक खेती की नवीन पद्धतियों का अधिकतम लाभ उठा सकें।
किसान–वैज्ञानिक संवाद के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने उन्नत फसल उत्पादन तकनीकों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा कृषि यंत्रों के प्रभावी उपयोग पर किसानों का मार्गदर्शन किया। किसानों ने खेती से जुड़े अपने अनुभव और उत्पादन संबंधी समस्याएं साझा कीं, जिनके समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक सुझाव दिए।
कार्यक्रम में छह महिला किसानों सहित कुल 65 किसानों को कृषि यंत्र वितरित किए गए। संस्थान के अनुसार इस पहल से कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने, कृषि आदानों के दक्ष उपयोग, उत्पादन लागत में कमी तथा नव-चयनित गांवों में उन्नत कृषि तकनीकों को तेजी से अपनाने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. पी. मूवेनथन, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक, ने किया।










