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अपने पम्प सेट को अधिक दक्षतापूर्वक कैसे चलाऐं

डॉ. मनीषा साहू एवं डॉ. सुनील अग्रवाल

जल पंप (Pump) एक महत्वपूर्ण कृषि और निर्माण के उपकरण है। यह किसानों को किसानी में पानी सप्लाई करने में मदद करता है। जल पंप सिंचाई और उत्पादन के क्षेत्र में भी उपयोगी होता है। इसके बिना, कृषि उत्पादन में कमी होती है। अतः, जल पंप कृषि और उपयोगिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रायः देखा गया है कि कुंओं या निचले इलाकों में बहती नदियों पर जा ेविद्युत या डीजल चलित पम्प लगे होते है व उचित रखरखाव होने पर सामान्य से अधिक बिजली या डीजल का उपभोग करते है। अपने पंप सेट से बिजली या डीजल की कम खपत में अधिक दक्षतापूर्वक उपयोग नीचे दी कमियों की जांच तथा उपस्थित होने पर उचित निदान करके लिया जा सकता है।

क्र. सेट में कमी
कमी का कारण
उपचार
1. इंजन बहुत आवाज करता है अ. पिस्टन, पिस्टनरिंग, बियरिंग आदि का घिसना
ब. डीजल टाइमिंग ठीकना होना
स. फाउण्डेशन (नींव) ढ़ीली होना
अ. पुर्जों की जांच कर उन्हे ठीक तथा जरूरत होने पर बदल दें।
ब. डीजल फ्युल टाइमिंग ठीक करें।
स. फाउण्डेशन बोल्ट कसें।
2.  इंजन अधिक गर्म होता है। अ. पिस्टनरिंग, बियरिंग तथा वाल्व क्लियरेंस कम होना
ब. पिस्टन या वाल्वपर या निकासी में भी अधिक कार्बन या कालिख होना।
स. इंजन की क्षमता से अधिक उपयोग करना।
द. इंजन में पानी का बहाव उचित मात्रा में न होना।
इ. लुब्रीकेशन/तेल के स्नेहन में कमी या तेल की कमी हो जाना
अ. क्लियरेंस सही रखें
ब. कार्बन की सफाई करें।
स. निर्धारित भार पर ही इंजन चलाएं
द. कूलिंग सिस्टम की जांच तथा सफाई करें पानी की मात्रा उचति दर तक बढ़ावें।
इ. तेल बहुत पुराना (240 घंटे) हो जाने पर तेल बदलें तथा तेल की कमी होने पर मात्रा बढ़ावें।
3.  इंजन की शक्तिमें कमी होना। अ. वाल्व क्लियरंेस, फ्युल टाईमिंग ठीक न होना।
ब. वायु चूषक पर कचरा तथा वाल्व, पिस्टन एवं वायु निकास पाइप में कार्बन जमा होना।
स. सिलेण्डर लाइनर, पिस्टन व रिंगों का घिसजाना।
अ. क्ल्यिरेंस व टाईमिंग ठीक करें।
ब. क्चरा तथा कार्बन की सफाई करें।
स. जांच करें एवं घिसी होने पर बदल दें।
4.  बिजली की मोटर के चलने पर आवाज तथा कम्पन करना। अ. पंप तथा मोटर शाप्ट एक सीध में न होना।
ब. फाउण्डेषन का ढ़ीला होना
स. मोटर बियरिंग घिसजाना।
द. बार-बार बिजली की कम ज्यादा या फेस बदलना।
अ. दोनों शाप्टों को एक सीध में करके कसें यथा संभव लचीले कपलिंगो का उपयोग करें।ब. फाउण्डेषन मजबूत बनाएं तथा बोल्ट मजबूती से कसें।
स. बियरिंग की जांच करें, घिसें होने पर बदल दें।
द. मोटर बंद करें बिजली के ठीक ढंग से आने का इंतजार करंे तथा बिजली कनेक्षनों की जांचकरें।

 

अन्य महत्वपूर्ण तथा आवश्यक उपचार
चूषक पाइप तथा फुट वालव

  • चूषक पाइप सफेद या भूरे पी.वी.सी. प्लास्टिक या लचीले (फ्लेक्सिबल) पी.वी.सी. प्लास्टिक का ही इस्तेमाल करें।
  • चूषक पाइप की लम्बाई 6 या 7 मीटर से अधिक रखना उचित नही होताअतः अधिक लम्बा पाइप न रखें।
  • चूषक पाइप, फ्लेज तथा पैकिंग के साथ पंप पर मजबूती से कसा होना चाहिए।
  • फुट वाल्व भी यथा संभव पी.वी.सी. प्लास्टिक के बने उपयोग में लायें।
  • प्लास्टिक फुटवाल्व के न मिलने पर, अधिकतम जाली छिद्रवाले लोहे के बड़े आकार के फुटवाल्व ही काम में लायें।
  • कुँए की तल्हटी से चूषक पाइप में लगे फुटवाल्व की ऊँचाई न्यूनतम आधा मीटर रखेंजिससेकुंए की तल्हटी का कचराआदि न खिंचे।

डिलीवरी पाइप

  • जल निकास पाइप (डिलीवरी पाइप) भी सफेद, या भूरे या फ्लेक्सिबल पी.वी.सी. प्लास्टिक का ही इस्तेमाल करें।
  • लोहे का होने पर इसे कुंए की सतह या मुंडेर से अधिक ऊंचा व्यर्थ ही न बढ़ायें।
  • बहुत पुराने, जंग लगे या घिसे हुए पाइप भी इस्तेमाल न करें।
  • डिलीवरी पाइप (तथा चूषक पाइप में भी) सॉकेट जोड़, सकरे एल्बोबैण्ड, रिड्यूसर आदि का प्रयोगन्यूनतमकरें।

पंप स्थापना

  • पंप की ऊँचाई कंुए में जल सतह से 1.5 मीटर से 3.5 मीटर के मध्य रखनी चाहिए।
  • जल स्तर से 6.5 ऊंचाई तथा अधिक ऊंचाई पर रखा पंप या तो बहुत आवाज करता है या चलकर रूक जाता है, और अत्याधिक ऊर्जा का उपयोग करता है ऐसे में पंप को उपरोक्तानुसार जल स्तर के समीप रखकर चलाये।
  • मजबूत लकड़ी तथा लोहे के एंगिलों के बने झूले पर पंपसेट मजबूती से कसें और उसे चैनपुली की मद्द से लटकायें। ऐसी स्थिति में पंपसेट को सुविधानुसार ऊपर नीचे किया जा सकता है।

पट्टा/बेल्ट
जमीन पर स्थापित इंजन और कुंए के अंदर लटकाये गये पंप में

  • बेल्ट उचित मोटाई तथा चौड़ाई का ही इस्तेमाल करें।
  • बेल्टमें एक से अधिक जोड़ नही होना चाहिए।
  • बेल्ट पर बहुत अधिका बहुत कम तनाव नही होना चाहिए।
  • इंजन व पंप के बीच 6 – 7 मीटर से अधिक दुरी बढ़ जाने पर धिरनी और बेल्ट के बीच फिसलन बहुत अधिक बढ़ जाती है और पंप तक उचित शक्ति नही पहुंच पाती है। ऐसे में इंजन को कुँए में पंप तथा जलस्त्र के पास उतारकर बेल्ट की लम्बाई को छोटा किया जा सकता है।
  • यथा संभव पंप और इंजन एक ही सीध में शैफ्टों पर फ्लेक्सिबल (लचीला) रबर कपलिंगों से जोड़कर चलायें।

अन्य

  • बिजली के कनेक्षन सुदृ ढ़ तथा मजबुत हो वोल्टमीटर का प्रयोग अवष्य करें। कम वेल्टेज होनेपर न चलायें।
  • 5 हार्सपावर से कम की मोटरों के लिये ‘डी.ओ.एल.‘ एवं 5 हार्सपावर से अधिक की मोटरों के लिये ‘स्टारडेल्टा‘ स्टारटर की काम में लावें।
  • मोटर में पंखा यदि कहीं छूता हो तो उसकी चाबी घूमाकर उसे तुरंत ठीककर दें टूट-फूट होने पर बदल दें।
  • ग्लैन्ड डोरी जरूरत से अधिक न कसें न ही ढीली रखें तथा बियरिंग एवं अन्य चलने वाले पुर्जो में उचित मात्रा में ग्रीस लगावें।
  • प्रत्येक पंप सेट की पानी उठाने की एक डिजाइन क्षमता होती है, जलस्तर से पानी उठाने की कुल ऊंचाई उसकी क्षमता की 70 प्रतिशत तक रखना उचित है, अधिक ऊंचाई बढ़ाने पर पंप सेट बहुत अधिक ऊर्जा का उपयोग करने लगता है, इसलिये स्तर से निकासी तक की ऊंचाई पंप की डिजाइन क्षमता से कम ही रखें।

जल पंप का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि वह सही तरीके से काम कर सके। नियमित रूप से जल पंप की अनुरक्षण की जानी चाहिए। निरीक्षण, सफाई और समय पर मरम्मत करना जल पंप की उम्र बढ़ाता है। सही तकनीक से जल पंप की देखभाल करना उसकी दीर्घावधि और अच्छी प्रदर्शन की सुनिश्चितता में मदद करता है। अच्छे जल पंप की देखभाल से विपणन की गुणवत्ता बढ़ती है और खर्च कम होता है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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