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इफको द्वारा अंतागढ़ में नैनो उर्वरक उपयोग संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन

जिला कांकेर के अंतागढ़ स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से नैनो उर्वरक उपयोग संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री आशुतोष डनसेना, उप पंजीयक सहकारी संस्था रहे। विशेष अतिथि के रूप में श्री एम. के. वानखेड़े, नोडल अधिकारी जिला सहकारी बैंक जगदलपुर (नोडल कार्यालय कांकेर), श्री के.एस. केराम, मृदा वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर, श्री अमल सिंह नरवस, अध्यक्ष आदिम जाति सेवा सहकारी समिति अंतागढ़, श्री भैशाखू मांडवी, श्री जगन्नाथ उसेंडी तथा श्री खुबल भुसर्रे, अध्यक्ष जनपद पंचायत अंतागढ़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री दिनेश गांधी, उप प्रबंधक इफको (कृषि सेवा) रायपुर ने की।

कार्यक्रम का संचालन इफको के क्षेत्रीय अधिकारी एल.बी. सिंह द्वारा किया गया । कार्यक्रम में श्री दिनेश गांधी द्वारा किसानों को इफको का परिचय देते हुए नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक एवं नैनो कॉपर के उपयोग, लाभ एवं सही प्रयोग विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने नैनो उर्वरकों के छिड़काव का सही समय, फसल की अवस्था, बीज उपचार, जड़ उपचार तथा पत्तियों पर स्प्रे करने की विधि के बारे में बताया। साथ ही जार टेस्ट की प्रक्रिया तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल उत्पादन में होने वाले लाभों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों, जिंक सल्फेट, सल्फर तथा जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता के बारे में भी जानकारी दी। इसके साथ ही नैनो उर्वरकों का अन्य रसायनों जैसे कीटनाशक एवं फफूंदनाशक के साथ अनुकूलता के विषय में भी विस्तार से बताया गया।

कार्यक्रम में एल.बी. सिंह द्वारा किसानों को संकट हरण बीमा योजना के बारे में जानकारी देते हुए पॉलिसी के दायरे, पात्रता, लाभ तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्रदान की गई। वहीं कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के मृदा वैज्ञानिक श्री के.एस. केराम ने मृदा परीक्षण के महत्व, विभिन्न पोषक तत्वों, द्वितीयक पोषक तत्वों एवं कार्बनिक तत्वों के संतुलित उपयोग के विषय में किसानों को जागरूक किया। मुख्य अतिथि श्री आशुतोष डनसेना, उप पंजीयक सहकारी संस्था ने अपने उद्बोधन में सहकारिता के महत्व, इफको के कार्य विविधीकरण तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग से मृदा, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी दी और किसानों से नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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