उद्यानिकी

पान की विलुप्त होती खेती को नया जीवन, छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र की स्थापना

रायपुर 2 मार्च 2026

छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र की स्थापना

खैरागढ़  छुईखदान, गंडई जिले के विकासखण्ड छुईखदान में पूर्व में पान की खेती व्यापक रूप से की जाती थी, किन्तु तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव एवं आवश्यक प्लांटिंग मटेरियल की उपलब्धता न होने के कारण यह परंपरागत खेती धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई थी। पान की इस पारंपरिक फसल को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा वर्ष 2023-24 में विकासखण्ड छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की घोषणा की गई। यह केन्द्र रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान में स्थापित किया गया है।

पान उत्पादक कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए शेडनेट हाउस अधोसंरचना निर्माण हेतु 50 प्रतिशत विभागीय अनुदान प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में 7 कृषकों द्वारा प्रति कृषक 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में शेडनेट हाउस का निर्माण कराया गया है, जिसके लिए प्रति कृषक 1.77 लाख रुपये का अनुदान उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रदान किया गया है। इनमें से 6 कृषक वर्तमान में पान की खेती कर रहे हैं। इस पहल से पान उत्पादक कृषक प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी अनुकूल वातावरण में पान की खेती कर बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।

आवश्यक प्लांटिंग मटेरियल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि महाविद्यालय के सहयोग से जिले में स्थापित शासकीय उद्यान रोपणी कुकुरमुड़ा एवं बीरूटोला में भी पान की खेती का प्रदर्शन प्लॉट तैयार किया जा रहा है।

जिला प्रशासन द्वारा इस विशेष पहल की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है।  कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही, रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान के विषयवस्तु विशेषज्ञों द्वारा कृषकों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है, जिससे जिले में पान की खेती को पुनः स्थापित कर किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

Related Articles

Back to top button