Uncategorizedकृषि

जिंक एक आवश्यक पोषक तत्व

यह पाया गया है कि विश्व जनसंक्ष्या के एक तिहाई जनसंख्या में जिंक की कमी पायी गई है और इनमें से अधिकतर 5 साल तक के बच्चे है जो जिंक कमी के शिकर है जिनकी मृत्यू दर >2 मिलियन/वर्ष है। 75 प्रतिशत मृत्यु 15 देशों में होती है, जिनमें 5 प्रमुख देश है:- भारत, नाईजेरिया, डीआर कांगो, पाकिस्तान, इथोपिया

जिंक की आवश्यकता
पुरूष – 12 मि.ग्रा./दिन
महिला – 15 मि.ग्रा./दिन
इसके कमी होने पर उसमें कमी के लक्षण उत्पन्न होते है।

जिंक का मानव जीवन में कार्य

  • यह कोशिका विभाजन में मद्द करता है।
  • यह मानव विकास को बढ़ाता है।
  • यह मानव में शारिरिक व मानसिक विकास करता है।
  • यह शरीर को विभिन्न प्रकार के बिमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।

मानव में जिंक के कमी के लक्षण

  • मानव वृध्दि व विकास रूक जाती है।
  • सधारण प्रजन्न क्षमता की कमी।
  • त्वचा में आहार व विकार
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली

जिंक की कमी से होने वाली बिमारियाँ

  • डायरिया, न्यूमोनिया, मलेरिया – जो अधिक मात्रा में होता है।
  • जब मृदा में जिंक की मात्रा कम होगी तो सम्भवतः फसल में भी इसकी कमी होगी।
  • और जब मानव इन जिंक की कमी में उगने वाली फसल को खायोंगे तो उनमें जिंक की कमी होने की प्रायिकता बढ़ जायेगी।
  • विश्व में जिंक की कमी एक आवश्यकता सूक्ष्म पोशक तत्व की कमी के रूप में सामने आयी है।
  • इसकी मुख्यतः घास वाली फसलों में होता है।
  • यह पाया गया है कि 50 प्रतिशत कृषित मृदा में जिंक की कमी है जहां फसलों को उपलब्ध नही होता है।
    कमी – 0.6 – 0.8 पीपीएम
  • यही कारण है कि जिंक की कमी से मानव में मालन्यूट्रिशन तथा स्वस्थ्य की समस्या है और मुख्यतः विकासशील देशों में है क्योंकि यहां की ज्यादातर जनसंख्या का भोजन सीरियल है।

पौधों में जिंक के कार्य – जिंक तत्व अनेक एन्जाइमों का अंग स्वरूप है। यह विभिन्न एन्जाइमों की संरचना एवं सक्रियता के लिए अति आवश्यक होता है। ये निम्नलिखित एन्जाइम है जो पौधों में होने वाली विभिन्न शरीर क्रियात्मक कायों में अति महतवपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका निभाते है।

  • प्रकाश संश्लेषण
  • शर्करा एवं स्टार्च निर्माण
  • प्रोटीन उपापचय
  • वृध्दि हरमोन ऑक्सीन (इन्डौल एसीटीक एसीड) का जैव संश्लेषण
  • पुष्पन
  • बीज का निर्माण

जिंक तत्व की कमी के कारण पौधों के उपरोक्त शरीर क्रियातमक योगदान में व्यवधान के कारण उतपादन व गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है और पैदावार काफी घट जाती है।

जिंक की कमी के लक्षण – पौधों में जिंक की कमी के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखलाई पड़ते है। इसके कम या अत्याधिक कमी के कारण निम्न लक्षण परिलक्षित होते है।
1. पौधों की वृध्दि में अवरोध से बौनापन (डवफिं)
2. पत्तियों का हरमिहीनता से पीला पड़ना (क्लोरोसिस)
3. पत्तियों का मोटा, गाढ़ा हरा या विकृत होना (मोटललीक)
4. पत्तियों पर हरिमा हीनता वाले क्षेत्र में उतकों का मरना (नेक्रोसिस)
5. तना छोटा व पत्तियों में सिकुड़न व झाडूनुमा होना (रोजेटी)
6. पत्तियों का आकार छोटा, असामान्य, विकृत व मुड़ा होना (लिटिललीफ)
7. पत्तियों का जल्दी झड़ना
8. फूल व फल में विकृति (हाइपरट्रोफि)
9. बीज निर्माण पर प्रतिकूल असर
10. उत्पादन का अत्यधिक कम होना
इन सब के अलावा कभी – कभी जिंक की कमी के लक्षण दिखलाई नही पड़ते (हिडिन हंगर) परन्तू उतपादन पर सीधा ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जिंक की कमी के प्रति संवेदन फसलें – संवेदन शीलता के आधार पर फसलों को तीन क्रम में बांटा गया है। अतः फसलों में जिंक ततव का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए। बत्यधिक संवेदनशील फसलों को अधिक जिंक डालने की आवश्यकता होती हैं

अति संवेदी मध्यम संवेदी कम संवेदी
धान आलू मसाले
गेंहूँ सूरजमूखी गाजर
सोयाबीन कपास कुसुम
मक्का ज्वार छोटे अनाज
उड़द, मूंग शकरकंद मेन्धा
मटर टमाटर
नीबु अन्य सब्जियां
फलदार पौधे तिलहन
अंगुर दलहन
प्याज पटसन

मृदा में जिंक का उपयोग – जिन मृदाओं में जिंक की कमी है जिंक उर्वरकों का उपयोग करके उनकों दूर किया जा सकता है। एक अच्छे उर्वरक प्रबंधन में सम्भवतः ये चार चीजें आती है
1. राइट सोरस उचित माध्यम
2. राइट रेट उचित दर
3. राइट टाइम उचित समय
4. राइट प्लैस उचित जगह

जिंक उर्वरक – निचे दिये गये टेबल जिंक उर्वरक तथा उनमें उपस्थित जिंक मात्रा दर्शाता है।
सामान्य उपयोगी जिंक उर्वरक

तत्व सूत्र जिंक मात्रा (%)
अकार्बनिक तत्व
जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट 2nso4, H2o 36
जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट 2nso4, 7H2o 22
जिंक आकसीसल्फेट 2no, 2nso4 20-50
बेसिक जिंक सल्फेट 2nso4, n2n (OH)4 55
जिंक आक्साइड 2no 50-80
जिंक कारबोनेट 2nco3 50-56
जिंक क्लोराइड 2ncl2 50
जिंक नाइट्रेट 2n(NO3)23H2o 23
जिंक फास्फेट 2n3(PO4)2 50
जिंक फ्रिटस फ्रिटेड ग्लास 10-30
अमोनिटेड जिंक सल्फेड 2n(NH3)4So4 10
सालूसन
कार्बनिक तत्व
डाइसोडियम जिंक EDTA Na2 2n EDTA 8-14
सेडियम जिंक HEDTA Na 2n HEDTA 6-10
सेडियम जिंक EDTA Na 2n EDTA 9-13
जिंक पोलिफ्लेवोनॉड 5-10
जिंक लिग्नोसल्फोनेट 5-10

जिंक सल्फेट के प्रयोग का तरीका
1. मिट्टी में मिलाकर – सामान्य भूमि में जिंक सल्फेट 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से उपयुक्त रहता है परन्तु क्षारीय भूमि में यह मात्रा 50 कि.ग्रा. प्रति हेक्अेयर उचित पाई गई है। जिंक की सम्पूर्ण मात्रा बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश धारी उर्वरक देते समय मिट्टी में मिलाकर प्रयोग करना अत्यधिक सार्थक एवं लाभकारी होता है।

2. पर्णीय छिड़काव – किसी कारणवश खेत में जिंक का प्रयोग नही किया गया और खड़ी फसल में जिंक की कमी अनुीाव की जाये तो जिंक सल्फेट का पर्णीय छिड़काव के जिए 5 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट ़2.5 कि.ग्रा. बुझे हुए चूने को 500 लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर इसका छिड़काव करना चाहिए। अगला छिड़काव 10 दिन के अंदर अवश्य कर देना चाहिए।

3. पौधे जड़ उपचार – जिंक सल्फेट की 5 कि.ग्रा. की 5000 लीअर पानी में घोलकर साफ टंकी में रखें। इस घोल को नर्सरी की जड़ोंको 15 मिनट तक डुबाने के बाद रोपाई करने पर लाभ् मिलता है।

4. ड्रेसिंग – फलों के उद्यान में पैडत्रों की कटाई या छटाई के भाग पर जिंक सल्फेट का लेप लगाने से पौधों को जिंक उपलब्ध हो जाता है।
मृदा में जिंक की कमी – नीचे दिये गये मृदाओं में जिंक की कमी होती है –
1. जल से भरे हुए मृदा (धान के खेत)
2. अधिक फास्फेट स्टर वाले मृदा
3. पीट व मक मृदा (कार्बनिक मृदा)
4. अधिक लक्षण मृदा
5. कम PH, अधिक क्षारित पैरेंट मटेरियल।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

Related Articles

Back to top button