वेटनरी पोलिटेक्नीक में पशु पालन में डिप्लोमा के 2 वर्षीय पाठयक्रम एवं रोजगार के अवसर
डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. एम.के. गेंदलें एवं डॉ. शबीर अनंत


स्थापना- छ.ग. कामधेनु विश्वविघालय के स्थापना के 15 वर्ष के कार्यकाल में वर्ष 2015 से 4 वेटनरी पोलिटेक्नीक, की स्थापना की गई है जिसमें छ.ग. शासन से प्रवेश नियम एवं पाठयक्रम एवं नियमावली स्वीकृति के बाद पशु पालन में डिप्लोमा (डिप्लोमा झ्न एनीमल हस्बैन्ड्री) के 360 सीटों में 2 वर्षीय पाठयक्रम का संचालन इस वर्ष 2026.27 में प्रवेश दिया जावेगा। चारों पशु चिकित्सा पोलिटेक्नीक,एवं उपलब्ध संसाधनों का विवरण निम्नानुसार हैः-
- वेटनरी पोलिटेक्नीक, महासमुंद :- यह महासमुंद से लगभग 08 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम बरोंडाबाजार में जो कि सहायक पशुचिकित्सा क्षेत्र अधिकारी केन्द्र का भवन वर्ष 2006 में निर्मित हुआ था, वेटनरी पोलिटेक्नीक, महासमुन्द (छ.ग.) के रुप में स्थानांतरित हो गया है। इस संस्था में 100 सीटर प्रशिक्षण कक्ष, एक 40 सीटर सुसज्जित कानफरेन्स हॉल, 50 बेड पुरूष छात्रावास, एवं लाईब्रेरी भवन, आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण, पुस्तकालय, पशुचिकित्सा-पशुपालन लैब, ऑडिओ विजुअल एवं अन्य प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध है।
- वेटनरी पोलिटेक्नीक, जगदलपुर:- यह, बस्तर जिले के जगदलपुर शहर में जो कि सहायक पशुचिकित्सा क्षेत्र अधिकारी केन्द्र व बस्तर एकीकृत पशुधन विकास प्रशिक्षण केन्द्र का भवन वर्ष 1997 व 2010 में निर्मित हुआ था, वेटनरीपोलिटेक्नीक, जगदलपुर (छ.ग.) के रुप में स्थानांतरित हो गया है। इस संस्था में दो 100 सीटर प्रशिक्षण कक्ष, हॉल, 20 सीटर छात्रावास एवं लाईब्रेरी भवन आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण, पुस्तकालय, पशुचिकित्सा-पशुपालन लैब, ऑडिओ विजुअल एवं अन्य प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध है।
- वेटनरी पोलिटेक्नीक, सुरजपुर:- यह संस्था 2015 से व वर्तमान में नया भवन में लग रहा है जो कि सूरजपूर मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर है।
- वेटनरी पोलिटेक्नीक, राजनांदगांव:- सत्र 2017-18 से खैरागढ रोड में ग्राम बोरी जिला राजनंदगांव में लग रहा है। एवं संस्था के नये भवन के लिये विश्वविधालय स्तर पर प्रयास जारी है।
संस्था का सेटअपः- प्रत्येक संस्था में चार सहायक प्राध्यापक एवं एक प्राचार्य को मिलाकर कुल 13 पद सृजित है ये चार सहायक प्राध्यापक एवं एक प्राचार्य, पशुपालन, पशु चिकित्सा, कृषि,विस्तार (मगजमदेपवदद्ध ग्रामीण विकास एवं प्रबंधन विषयों पर प्रशिक्षित एवं अनुभवी है।
विज़नः- संस्था में पशुपालन में डिप्लेामा अंतर्गत 2वर्षीय पाठयक्रम अंतर्गत पशुपालन क्षेत्र में मानव संसाधन विकास के माध्यम से राज्य के ग्रामीण विकास में निरंतर गुणात्मक सुधार लाना।संस्था में पशु पालन में डिप्लोमा (डिप्लोमा झ्न एनीमल हस्बैन्ड्री ) के 2 वर्षीय पाठयक्रम से पशु चिकित्सक को सहायता प्रदान करने हेतु पैरावेट तैयार करने हेतु सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक ज्ञान दिया जावेगा।
क्ण्पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु न्यूनतम पात्रता एवं अर्हताः-
- छत्तीसगढ़ के मूल निवासी, प्रत्याशी की न्यूनतम आयु 31 दिसम्बर 2016 के अनुसार प्रवेश वर्ष को 17 वर्ष की हो परन्तु 22 वर्ष से अधिक न हो। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल अथवा सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेन्डरी एजुकेशन (Central Board of Secondary Education) या कौन्सिल फार दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्जामिनेशन (Council for the Indian School Certificate Examinations) में 10+2 की 12 वीं कक्षा भौतिक विज्ञान रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान विषय के कुल प्राप्तांक में से सामान्य वर्ग के छात्र के लिये न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक, अनुसूचित जनजाति/अनूसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग(क्रीमिलेयर को छोड़कर) के छात्रों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंको में परीक्षा उत्तीर्ण की हो।
- इस पाठ्यक्रम में प्रवेश पी.ए.टी के माध्यम से पी.व्ही.टी का आप्शन लेने पर पी.व्ही.टी के मेंरिट सूची एवं उसके बाद भी सीट खाली होने पर 10+2 की 12वीं की मूल अंकसूची के विज्ञान विषय क्रमशः भौतिक विज्ञान, रसायनिक विज्ञान एवं जीव विज्ञान की प्राप्त प्राप्तांकों की मेरिट के आधार पर किया जावेगा।
- अनु.जाति, अनु.जनजाति, अन्य पिछडा वर्ग,महिलाओं,कृषक,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भूतपूर्व सैनिक एवं विकलांग अभियर्थीओं केा छ.ग. शासन के नियमानुसार आरक्षण की पात्रता होगी।
- तीन संस्था में सत्र 2026-27 में प्रत्येक संस्था अंतर्गत 100 सीट एवं राजनांदगांव में 60 सीटों में प्रवेश दिया जावेगा।
विभागीय उम्मीदवारों के लिये आरक्षण तथा अनिवार्य शैक्षणिक अर्हताः-
- प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में प्रवेश हेतु वेटरनरी पॉलीटेक्नीक में कुल उपलब्ध सीटों का 10 प्रतिशत कोटा अतिरिक्त रूप से सेवा भरती नियमों में उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार विभागीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए रहेगा।
- विभागीय उम्मीदवार के रूप में डिप्लोमा पाठ्यक्रम हेतु मनोनीत किये जाने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता तथा सेवा शर्ते वही रहेगी जो सेवा भर्ती नियमों में उल्लेखित होंगी
- नियमित स्थापना में कम से कम 05 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले समस्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वरिष्ठता क्रम के आधार पर संचालक पशु चिकित्सा सेवायें छ.ग. द्वारा मनोनीत किया जाकर वेटनरी पॉलीटेक्नीक में प्रवेश हेतु सूची विश्वविद्यालय को भेजी जायेगी।
- शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देश अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछडा वर्ग के विभागीय उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ देय होगा विभागीय उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष होगी।
थ्ण् पाठ्यक्रम का विवरणः-यह पाठयक्रम 24 माह के 4 सेमेस्टर में विभाजित होगा जिसमें 3 सेमेस्टर संस्था में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक ज्ञान एवं अंतिम सेमेस्टर में फिल्ड में पशु चिकित्सालय, पशुधन प्रक्षेत्र एवं कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों में प्रायोगिक प्रशि़क्षण राज्य के अंदर स्थित संस्थाओं में दिया जावेगा
पशु पालन में डिप्लोमा (डिप्लोमा झ्न एनीमल हस्बैन्ड्री ) से रोजगाार की संभावनाएः-
- छत्तीसगढ में पशुपालन विभाग में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पद में भर्ती की अपार संभावनाएं है छ.ग. में पशुपालन विभाग में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी जिनकीं फिल्ड में ग्रामीण स्तर पर पशु औषधालयों में पदस्थापना होती है एवं पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के अधीन एवं पशु औषघालय में कुल 2232 स्वीकृत पदों में से 1026 पद रिक्त है जिनका मुख्य कार्य टीकाकरण, विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ को सहायता प्रदान करना होता है।
- भारत सरकार के रिमाउन्ट वेटनरी कार्प, पैरा मिलिटरी फोर्सस एवं भारत सरकार के अधीन आने वाले सेन्ट्रल कैटल ब्रिडिंग फार्म, पोल्ट्रिी फार्म, बकरी फार्म, सुकर फार्म एवं स्टड फार्म में सुपरवाइजर एवं क्षेत्र अधिकारी के पद पर स्थापना होती है।
- प्रशिक्षण लेकर प्राइवेट डेयरी फार्म, व्यावसायिक पोल्ट्रिी फार्म, व्यावसायिक बकरी फार्म, सुकर फार्म एवं स्टड फार्म में सुपरवाइजर एवं क्षेत्र अधिकारी के पद पर कार्य करने की अपार संभावनाएं है।
- स्वयं का डेयरी फार्म, पोल्ट्रिी फार्म, बकरी फार्म, एवं सुकर फार्म संचालित कर अधिक से अधिक लाभ कमाया जा सकता हैै
- पशुपालन में डिप्लेामा लेकर शासन के योज्नान्तर्गत उदाहरण राष्ट्रीय ग्रामिण आजीविका मिशन, वाटर शेड, आदिवासी क्षेत्रों में इन्टीग्रेटेड एक्शन प्लान, गांव में स्व सहायता समुह, पशु पालको को डेयरी, पोल्ट्रिी,बकरी एवं सुकर पालन संबधी प्रशिक्षण देकर उनकी आर्थिक सहायता की जा सकती हैै।
- पशुधन संबधी उत्पाद उदाहरण के तौर पर दुग्घ उत्पाद, मांस उत्पाद, दवाइयों की बिक्री, पशुओं को दिये जाने वाले पोषक आहार एवं अन्य अनुपुरक उत्पादों के मार्केटिंग कर अपना व्यवसाय कर सकते हैं।
लेखक
डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. एम.के. गेंदलें एवं डॉ. शबीर अनंत
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय,अंजोरा, दुर्ग (छ.ग.)
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.)









