जैविक मिर्च की खेती से मालामाल हुए किसान डोलनारायण
75 डिसमिल में किसान ने कमाए 75 हजार रुपए


रायगढ़ : लैलूंगा विकासखंड के किसान डोलनारायण पटेल ने जैविक खेती के जरिए नई पहचान बनाई है। उन्होंने मात्र 75 डिसमिल जमीन में जैविक तरीके से मिर्च की खेती कर न सिर्फ बेहतर उत्पादन लिया, बल्कि महज 15 दिनों में करीब 75 हजार रुपए की बिक्री कर आसपास के किसानों के लिए मिसाल पेश की है। डोलनारायण पटेल की खासियत यह है कि उन्होंने खेती में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है। यूरिया और डीएपी जैसे खाद की जगह उन्होंने गोबर खाद और जैविक तरीकों को अपनाया। खेत में लगभग तीन ट्रॉली गोबर खाद डाला गया, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रही और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई।
डोलनारायण बताते हैं कि जैविक तरीके से तैयार मिर्च की गुणवत्ता सामान्य फसल से काफी बेहतर रही। मिर्च में प्राकृतिक चमक, तीखापन और खुशबू अधिक होने के कारण बाजार में इसकी मांग भी बढ़ी। स्थानीय व्यापारियों ने उनकी फसल को अच्छी कीमत पर खरीदा। उन्हें करीब 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक भाव मिला। उन्होंने बताया कि एक पौधे से लगभग 1 से 1.25 किलो तक मिर्च का उत्पादन हुआ, जबकि दो पौधों से करीब ढाई किलो तक उत्पादन प्राप्त हुआ। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण खेती लाभ का सौदा साबित हुई।
डोलनारायण पटेल खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आगे बढ़ रहे हैं। उनके पास स्वयं की 6 एकड़ जमीन है, जबकि 11 एकड़ जमीन उन्होंने लीज पर ली है। कुल 17 एकड़ क्षेत्र में वे खेती कर रहे हैं। खेती के लिए उनके पास ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित अन्य कृषि उपकरण उपलब्ध हैं। इससे अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार हुआ है। डोलनारायण ने बताया कि कृषि विभाग की योजनाओं के तहत उन्हें स्प्रिंकलर, पाइप और मोटर पंप जैसी सुविधाएं मिलीं। इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई। वे समय-समय पर कृषि विभाग के अधिकारियों से सलाह लेकर नई तकनीकों को अपनाते हैं। उनका कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति और जैविक खेती को अपनाएं तो कम लागत में भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
मिर्च की खेती में मिली सफलता से उत्साहित डोलनारायण अब आगामी खरीफ सीजन में 4 एकड़ क्षेत्र में जवाफूल धान की खेती करने जा रहे हैं। रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का पारंपरिक और खुशबूदार जवाफूल धान बाजार में अच्छी मांग रखता है। जैविक खेती से लागत घटती है, मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और लोगों को स्वास्थ्यवर्धक अनाज एवं सब्जियां मिलती हैं। डोलनारायण पटेल कहते है कि खेती में मेहनत, नई सोच और आधुनिक तकनीक अपनाकर कम जमीन में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। उनकी पहल अब क्षेत्र के युवा किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जैविक और नकदी फसलों की ओर प्रेरित कर रही है।









