सफलता की कहानी

मधुमक्खी पालन से स्व-सहायता समूह की आय में वृद्धि

बगीचा विकासखंड के ग्राम चम्पा में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल

रायपुर, फरवरी 2026

मधुमक्खी पालन से स्व-सहायता समूह की आय में वृद्धि

मधुमक्खी पालन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कम लागत में अधिक आय देने वाला प्रभावी स्वरोजगार माध्यम सिद्ध हो रहा है। बगीचा विकासखंड के ग्राम चम्पा में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की गई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना अंतर्गत के तहत स्व सहायता समूह का गठन कर महिलाओं को मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित किया गया।

समूह की महिलाओं को मधुमक्खी पालन हेतु 5 बक्से निःशुल्क उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में रबी सीजन के दौरान सरसों की फसल के समीप बक्से स्थापित कर वैज्ञानिक पद्धति से पालन किया जा रहा है, जिससे बेहतर उत्पादन की संभावना है। समूह द्वारा एक माह में 5 बक्सों से लगभग 10 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया, जिसे स्थानीय बाजार में 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय कर आय अर्जित की गई। इससे समूह की महिलाओं में उत्साह एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है। मधुमक्खियां परागण के माध्यम से जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं तथा फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करती हैं।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

Related Articles

Back to top button