सरकारी योजनाएं

बजट 2026-27 भारत के लिए क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के वैश्विक केन्द्रत का आधार तैयार करता है

प्रमुख बिंदु

  • ग्लोबल ऑपरेशन के लिए भारत में मौजूद डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाले योग्‍य विदेशी क्लाउड प्रदाताओं के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का प्रस्ताव
  • सुव्‍यवस्थित पात्रता ढांचा, जिसमें अधिसूचित एंटिटी, भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल, और घरेलू सेवाओं के लिए भारतीय रीसेलर की ज़रूरत शामिल है
  • मौजूदा टैक्स नियमों के तहत घरेलू लेन-देन जारी रहेंगे, जिसमें संबंधित डेटा सेंटर एंटिटी के लिए 15 प्रतिशत सुरक्षित हार्बर मार्जिन का प्रस्ताव है
  • बजट 2026-27 के तहत भारत को ग्लोबल क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब के तौर पर स्थापित करने के लिए एक बड़े डिजिटल और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का एक हिस्सा

परिचय

केन्‍द्रीय बजट 2026–27 में डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए वैश्विक केन्‍द्र के रूप में भारत की स्थिति को मज़बूत करने के लिए एक बड़ी नीतिगत पहल की गई है। आर्थिक विकास में क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई डेटा सेंटर और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स की अहम भूमिका को पहचानते हुए, सरकार ने भारत-आधारित डेटा केन्‍द्र बुनियादी ढांचे के ज़रिए काम करने वाले योग्य विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे की घोषणा की है।

दुनिया भर में, डेटा केन्‍द्र निवेश और आर्थिक गतिविधियों के एक बड़े चालक के तौर पर उभरे हैं। व्‍यापार एंव विकास पर संयुक्‍त राष्‍ट्र सम्‍मेलन (यूएनसीटीएडी) के अनुसार, 2025 में ग्लोबल ग्रीनफील्ड परियोजना मूल्‍य में डेटा केन्‍द्रों का हिस्सा पाँचवें हिस्से से ज़्यादा था, जिसमें 270 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा के घोषित इन्वेस्टमेंट थे। एआई कंप्यूट डिमांड और डेटा-इंटेंसिव डिजिटल सर्विसेज़ में तेज़ी से बढ़ोतरी ऐसे बुनियादी ढांचे को आकर्षित करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धा को तेज़ कर रही है।

इस संदर्भ में, भारत के दीर्घकालिक कर ढांचे का मकसद निवेश में निश्चितता देना, देश के अंदर हाई-वैल्यू डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, और 2047 तक विकसित भारत की कल्‍पना के मुताबिक ग्लोबल डिजिटल मूल्‍य श्रृंखला में भारत की भूमिका को मजबूत करना है।

यह पॉलिसी शुरू क्यों की गई?

डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए शुरू में ज़्यादा पूंजी निवेशलंबे समय तक चलने वाला काम और दीर्घकालिक नीति की निश्चितता की ज़रूरत होती है। खास तौर पर एआईओरिएंटेड डेटा सेंटर में कंप्यूटिंग हार्डवेयरएनर्जी सिस्टमकूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल मानव श्रम पर काफी खर्च होता है।

एआई कंप्यूट कैपेसिटी की वैश्विक मांग तेज़ी से बढ़ रही हैइसलिए देश बड़े पैमाने पर डेटा केन्‍द्र निवेश को आकर्षित करने के लिए मुकाबला कर रहे हैं। 2047 तक टैक्स हॉलिडे का मकसद लंबे समय तक दृश्‍यता और निश्चितता देना हैजिससे भारत ग्लोबल क्लाउड सेवा प्रदाताओं को आकर्षित कर सके और देश के अंदर ज़रूरी डिजिटल बुनियादी ढांचे को स्थिर कर सके।

टैक्स हॉलिडे प्रावधान को समझना

बजट में प्रस्ताव है कि भारत में मौजूद डेटा सेंटर सेवाओं का इस्तेमाल करते हुए, दुनिया भर में क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनी 2047 तक टैक्स हॉलिडे के योग्य होगी।

इस फ्रेमवर्क के तहत :

  • भारत में मौजूद डेटा सेंटर के ज़रिए ग्लोबल क्लाउड ऑपरेशन से ऐसे विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं की आयकुछ शर्तों के साथभारतीय टैक्स के दायरे में नहीं आएगी।
  • भारतीय ग्राहकों को सेवाएं भारतीय पुनर्विक्रेता कंपनी के ज़रिए दी जानी चाहिएयह सुनिश्चित करते हुए कि घरेलू लेन-देन टैक्स के दायरे में रहें।

यह छूट कर निर्धारण वर्ष 2026-27 से कर निर्धारण वर्ष 2046-47 तक लागू होती हैजिससे भारत के डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाले ग्लोबल क्लाउड प्लेयर्स के लिए एक स्थिरअनुमानित टैक्स माहौल मिलता है।

परिभाषित पात्रता ढांचा

यह छूट एक स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क के तहत क्लाउड सेवा प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलती है। एक विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाता टैक्स हॉलिडे का फायदा उठा सकता हैजहाँ:

  • विदेशी कंपनी को संबंधित नियमों के तहत अधिसूचित किया जाता है।
  • डेटा केन्‍द्र सेवाएं भारत में डेटा केन्‍द्र चलाने वाली भारतीय कंपनी से ली जाती हैं।
  • डेटा केन्‍द्र सुविधा को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगी मंत्रालय (एमईआईटीवाईअधिसूचित करता है।
  • विदेशी कंपनी की तरफ़ से भारतीय उपयोगकर्ताओं को दी जाने वाली सेवाएं एक भारतीय पुनर्विक्रेता कंपनी के ज़रिए दी जाती हैं।

फ्रेमवर्क नियामक प्रबंध करते हुए सुनिश्चित करता है कि प्रोत्‍साहन तय पॉलिसी पैरामीटर के अंदर काम करे।

घरेलू परिचालनों के लिए कर उपचार

प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहतघरेलू आर्थिक गतिविधियों से होने वाला मुनाफ़ा किसी भी दूसरी घरेलू कंपनी की तरह टैक्सेबल रहेगा। इनमें शामिल हैं:

  • भारत की रेजीडेंट डेटा सेंटर कंपनी द्वारा ग्लोबल कंपनी को दी जाने वाली डेटा सेंटर सेवाएंऔर

इसके अलावाजहां भारतीय डेटा सेंटर विदेशी कंपनी की संबंधति कंपनी है (जो कॉस्ट-प्लस सेंटर के तौर पर काम कर रही है), वहां कॉस्ट पर 15 परसेंट का सेफ हार्बर मार्जिन प्रपोज़ किया गया है।

सेफ़ हार्बर मार्जिन

  “सेफ़ हार्बर मार्जिन” (आय कर कानून के तहत) का मतलब है एक तय मुनाफा जिसकी विस्‍तृत जांच के बिनाकरदाता कुछ अंतर्राष्‍ट्रीय लेन-देन के घोषणा करता हैअगर वह तय शर्तों और नियमों को पूरा करता है।

व्यापक प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम पहलों के साथ जुड़ाव

टैक्स हॉलिडेभारत के टेक्नोलॉजी और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए बजट 2026–27 के बड़े उपायों का हिस्सा है। ये पहलें मिलकर टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन की अलग-अलग परतों का समाधान करती हैंसेमीकंडक्टर डिज़ाइन और सामग्री से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणोंआईटी सेवाओं और डिजिटल बुनियादी ढांचे तक।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0

बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरूआत की घोषणा की गई हैजो भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बनाने की पिछली कोशिशों पर आधारित है। यह कार्यक्रम इन पर फोकस करता है:

  • भारत में सेमीकंडक्टर उपकरणों का डिज़ाइन और निर्माण
  • सेमीकंडक्टर उत्‍पादन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का निर्माण
  • सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम का विस्तार
  • प्रतिभा विकास पहल को मज़बूत करना

वित्‍त वर्ष 2026–27 में आईएसएम 2.0 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह पहल प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमताओं के विकास का समर्थन करती है जो डेटा केन्‍द्रों और एडवांस्ड कंप्यूटिंग सिस्टम्स सहित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सहारा देते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस)

इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण विनिर्माण योजना के लिए बजट 2026–27 में लगभग ₹22,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है। इस योजना को 149 एप्लीकेशन मिले हैंजो पहले की उम्मीदों से ज़्यादा हैं और इंडस्ट्री की मज़बूत भागीदारी को दिखाते हैं।

इस बढ़े हुए आवंटन का मकसद बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता इकोसिस्टम के अंतर्गत योजना इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के घरेलू उत्‍पादन को मज़बूत करना है।

आईटी सेवाओं का सरलीकरण और सुरक्षित बंदरगाह प्रावधान

आईटी सेवाएं भारत के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र में से एक हैजिसका निर्यात 220 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा है। टैक्स में निश्चितता देने और इंडस्ट्री की ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिएबजट में प्रस्ताव है:

  • सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सर्विसेज़, IT-सक्षम सेवाएंनॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट आरएंडडी सर्विसेज़ को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ की एक ही श्रेणी में लाना
  • 15.5 प्रतिशत का कॉमन सेफ हार्बर मार्जिन
  • सेफ़ हार्बर पाने की लिमिट ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ करना
  • ऑटोमेटेडनियम-आधारित प्रक्रिया के जरिये मंज़ूरी
  • आईटी सेवाओं के लिए यूनिलेटरल एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (एपीएप्रोसेस को तेज़ करना
एकतरफा अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता (एपीए)

आय कर कानून के तहतएकतरफा अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते का मतलब है एक करदाता और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ (सीबीडीटीके बीच किया गया एक समझौताजिसमें एक तय समय के लिएखास इंटरनेशनल या घरेलू ट्रांज़ैक्शन के लिएली जाने वाली कीमत पहले से तय की जाती है।

भारत का विस्तारित क्लाउड और डिजिटल अवसंरचना आधार

देश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और अलग-अलग सेक्टर में एआईसक्षम एप्लिकेशन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत का क्लाउड और डेटा सेंटर इकोसिस्टम बढ़ रहा है।

डिजिटल इंडिया पहल के तहतसरकारी क्लाउड ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नेशनल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जीआई क्लाउड (मेघराज) बनाया गया है। मेघराजनेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के ज़रिए ई-गवर्नेंस सर्विस देने के लिए सुरक्षितस्केलेबल और इलास्टिक क्लाउड सुविधाएं देता है। नेशनल डेटा सेंटरइंटरनेशनल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड को पूरा करने वाले एम्पैनल्ड प्रोवाइडर्स के सपोर्ट वाले लेयर्ड सिक्योरिटी फ्रेमवर्क के साथ काम करते हैं।

उद्योग के अनुमान बताते हैं कि भारत की क्लाउड डेटा सेंटर कैपेसिटी लगभग 1,280 मेगावाट तक पहुंच गई है और 2030 तक इसके चार से पांच गुना बढ़ने का अनुमान हैजो डिजिटल और एआई बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को दिखाता है।

एआई और क्लाउड डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

डेटा सेंटरखासकर एआईफोकस्ड फैसिलिटीमॉडर्न डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं। भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में लगभग 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश पहले से ही चल रहा हैऔर घोषित प्रोजेक्ट्स में अतिरिक्त 90 बिलियन अमेरिकी डॉलर हैंजो विस्तार के पैमाने को दिखाता है।

2047 तक बढ़ाया गया प्रस्तावित टैक्स फ्रेमवर्क ऐसे कैपिटल-इंटेंसिव इन्वेस्टमेंट के लिए लंबे समय की पॉलिसी विज़िबिलिटी देता है। विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स हॉलिडे बजट 2026-27 में घोषित बड़ी टेक्नोलॉजी पहलों को पूरा करता हैजिसमें इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण निर्माण योजना के लिए बढ़ा हुआ आवंटन शामिल हैजो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को पूरा करता है। ये उपाय मिलकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमता दोनों को मजबूत करते हैं।

एआई डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में ग्लोबल पॉलिसी मोमेंटम

बड़ी अर्थव्यवस्थाओं मेंएआई डेटा सेंटर और उससे जुड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को ऐसी पॉलिसी के ज़रिए तेज़ी से समर्थन मिल रहा है जो बड़े पैमाने पर डिप्लॉयमेंट और लंबे समय के इन्वेस्टमेंट को मुमकिन बनाती हैं।

अमेरिका मेंडेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की फेडरल परमिटिंग में तेज़ी लाना” नाम का एक प्रेसिडेंशियल एग्जीक्यूटिव ऑर्डर बड़े एआई डेटा सेंटर परियोजना के विकास में तेज़ी लाने के लिए कदम बताता है। ऑर्डर में ये बातें बताई गई हैं:

  • तेज़ रेगुलेटरी और परमिटिंग प्रोसेस
  • डेटा सेंटर विकास में मदद के लिए केन्‍द्र सरकार की ज़मीन का इस्तेमाल
  • डेटा सेंटर से जुड़े एनर्जी सिस्टमसेमीकंडक्टरनेटवर्किंग इक्विपमेंट और डेटा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सपोर्ट
  • ऋणअनुदानटैक्स इंसेंटिव और ऑफटेक एग्रीमेंट जैसे वित्‍तीय सहायता तंत्र

ऑर्डर में बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को ऐसे प्रोजेक्ट्स के तौर पर बताया गया है जिनके लिए 100 मेगावाट से ज़्यादा नए लोड की ज़रूरत होती हैजो दिखाता है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर किस पैमाने पर योजना बनाई जा रही है।

साथ हीगोल्डमैन सैक्स रिसर्च ने नोट किया है कि चीनी एआई और क्लाउड प्रदाता तेज़ी से इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के फेज़ में जा रहे हैं। चीनी फर्मों के डेटा सेंटर्स में बड़े निवेश करने का अनुमान हैसाथ ही एआई चिप्सहार्डवेयर सप्लाई चेन और विदेशी डेटा सेंटर कैपेसिटी में भी बढ़ोतरी होगी। रिसर्च से पता चलता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को एआई ग्रोथ और डिजिटल सर्विसेज़ के विस्तार के लिए एक बुनियादी ज़रूरत माना जा रहा है।

ये वृद्धि नेशनल टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल स्ट्रेटेजीज़ में एआई और क्लाउड डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की स्ट्रेटेजिक सेंट्रलिटी को दिखाते हैं। इस संदर्भ मेंभारत-बेस्ड डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करके क्लाउड सर्विसेज़ के लिए भारत का लॉन्ग-टर्म टैक्स फ्रेमवर्कलंबे प्रोजेक्ट साइकिल और तेज़ी से बढ़ती डिमांड वाले कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में पॉलिसी क्लैरिटी और इन्वेस्टमेंट विज़िबिलिटी देता है।

निष्‍कर्ष

बजट 2026-27 में घोषित टैक्स हॉलिडेभारत में ग्लोबल क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए 2047 तक लंबे समय की पॉलिसी निश्चितता देता है। कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में इन्वेस्टमेंट विज़िबिलिटी देते हुएयह फ्रेमवर्क साफ़ तौर पर बताई गई एलिजिबिलिटी शर्तों और घरेलू ऑपरेशन पर लगातार टैक्स के ज़रिए सुरक्षा उपाय बनाए रखता है।

सेमीकंडक्टरइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर सुधारों के साथयह कदम भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए एक समन्वित रणनीति को दर्शाता है। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बढ़ती वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा के समय मेंयह पॉलिसी भारत को क्लाउड और डेटा सेंटर इन्वेस्टमेंट के लिए एक भरोसेमंद और लंबे समय की जगह के तौर पर पेश करती है।

संदर्भ : https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=157369&NoteId=157369&ModuleId=3&reg=3&lang=2

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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