सफलता की कहानी

महिलाओं की सामूहिक ताकत से महका एमसीबी का जीराफूल धान

महिला एफपीओ ने ‘हसदेव ब्रांड’ को दी नई पहचान

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 30 जुलाई 2026 : आत्मनिर्भर भारत के साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की महिलाओं ने एक नई मिसाल कायम की है। सिद्धबाबा महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के दम पर सुगंधित जीराफूल धान की ऐसी सफलता की कहानी लिखी है, जो अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही है। महिलाओं की इस पहल ने न केवल खेती को लाभकारी बनाया है, बल्कि स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है।महिलाओं की सामूहिक ताकत से महका एमसीबी का जीराफूल धान

महिला शेयरधारकों को संगठित कर गठित इस एफपीओ ने जीराफूल धान की खेती की शुरुआत उच्च गुणवत्ता वाले बीजों और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार नर्सरी के साथ की। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किए गए बीज उपचार और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग का परिणाम यह रहा कि 100 प्रतिशत अंकुरण प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि ने महिला किसानों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया।

सफल अंकुरण के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से 10 एकड़ क्षेत्र में जीराफूल धान की खेती का विस्तार किया। समय पर रोपाई, संतुलित पोषण प्रबंधन, नियमित सिंचाई और सतत निगरानी के कारण खेतों में फसल शानदार स्थिति में है। आज लहलहाते धान के खेत महिला किसानों की मेहनत, अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि महिलाएं केवल खेतों में श्रम तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि बीज चयन, नर्सरी प्रबंधन, रोपाई, फसल संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन प्रबंधन जैसी पूरी कृषि प्रक्रिया में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। इससे खेती के प्रति उनका दृष्टिकोण बदला है और कृषि उनके लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

एफपीओ का अगला लक्ष्य ’हसदेव ब्रांड’ के तहत उच्च गुणवत्ता वाले सुगंधित जीराफूल चावल को प्रदेश और देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना है। इसके लिए गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बेहतर विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि महिला किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य मिल सके और स्थानीय उत्पादों की अलग पहचान बन सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, एफपीओ मॉडल किसानों को सामूहिक रूप से संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर देता है। यही कारण है कि सिद्धबाबा महिला एफपीओ की सफलता अब एमसीबी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व, वैज्ञानिक खेती और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन का यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ यह भी साबित कर रहा है कि अवसर और संसाधन मिलने पर महिलाएं कृषि क्षेत्र में भी उत्कृष्ट नेतृत्व कर सकती हैं। 100 प्रतिशत अंकुरण से शुरू हुई यह यात्रा आज 10 एकड़ में लहलहाती जीराफूल धान की फसल के रूप में महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और आत्मनिर्भर गांवों की नई पहचान बन चुकी है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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