सफलता की कहानी

वनांचल में रेशम की चमक

नारायणपुर में टसर योजना से संवर रही ग्रामीणों की तकदीर

नारायणपुर : वनांचल क्षेत्रों में रेशम उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार का एक प्रमुख साधन है। यह पारंपरिक व्यवसाय कम लागत में अधिक आय देता है। इससे पलायन रुकता है और महिलाओं को घर के पास काम मिलता है। वन आधारित यह उद्योग आदिवासियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाता है।

​छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में रेशम उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक स्वावलंबन और स्थानीय स्तर पर रोजगार का एक मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। नारायणपुर जिले में रेशम विभाग की टसर योजना के माध्यम से वनांचल के ग्रामीण अब पारंपरिक आजीविका के साथ-साथ रेशम उत्पादन को अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं।विशेष लेख : वनांचल में रेशम की चमक

​41 हेक्टेयर में हरियाली और रोजगार का संगम

नारायणपुर क्षेत्र में 41 हेक्टेयर में फैले टसर अर्जुना पौधारोपण के जरिए ग्रामीण हितग्राहियों को वर्षभर आजीविका के साधन मिल रहे हैं। रेशम विभाग ग्रामीणों को न केवल टसर पौधारोपण और संसाधनों की सुविधा दे रहा है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहा है। योजना के तहत हितग्राहियों को मात्र 2 रुपये प्रति DFLS (कृमि अंडे) की रियायती दर पर सामग्री दी जाती है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हो पा रहा है।

​वित्तीय वर्ष 2025-26 में  4.71 लाख से अधिक कोसाफल उत्पादन

तीन फसलों के दौरान कुल 10,400 DFLS का सफलतापूर्वक कृमिपालन किया गया। जिसमें क्षेत्र के 24 हितग्राहियों ने सामूहिक प्रयास से कुल 4,71,593 नग कोसाफल का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया। उत्पादित कोसाफल के विक्रय से हितग्राहियों को कुल 17 लाख 56 हजार 516 रुपये की आय हुई। विभाग द्वारा पूरी राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों (DBT) में भेजी गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा

टसर रेशम योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ग्रामीणों को उनके ही घर और जंगल के आसपास रोजगार उपलब्ध कराती है। अर्जुना पौधों की देखरेख से लेकर कृमिपालन और कोसाफल संग्रहण तक, पूरा परिवार इस प्रक्रिया से जुड़कर अपनी आय में बढ़ोतरी कर रहा है। नारायणपुर जैसे दुर्गम वनांचल में यह पहल पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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