सरकारी योजनाएं

किसानों के भविष्य को सम्मान के साथ सुरक्षा

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के 7 साल

पिछले सात सालों मेंपीएमकेएमवाई ने छोटे और सीमांत किसानों को वृद्धावस्था में बेहतर आर्थिक सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने में मदद की है। 2019 में शुरू की गई इस योजना के तहत, 60 साल की उम्र से हर महीने कम से कम ₹3,000 की सुनिश्चित  पेंशन मिलती है। फरवरी 2026 तकदेश भर में 24.96 लाख से ज़्यादा किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं। हरियाणा इसमें सबसे  आगे हैजहाँ लगभग 5.75 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है और इसके बाद बिहार का नंबर आता है, जहाँ 3.46 लाख से  ज़्यादा किसान जुड़े हैं। 2019 से लेकर फरवरी 2026 तकइस योजना को लागू करने और लोगों तक पहुँचाने के  लिए  ₹540.66 करोड़ खर्च किए गए हैं। इसकी पहुँच से पता चलता है कि किसान समुदाय में सामाजिक सुरक्षा के महत्व को लेकर  जागरूकता बढ़ रही है। पीएम-केएमवाई किसानों के बुढ़ापे को ज़्यादा सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक लगातार जारी रहने वाला प्रयास है।

पीएमकेएमवाई के 7 साल: खेती के सालों से आगे की सोच

पीढ़ियों से, भारत के किसानों ने खेतों में अथक परिश्रम करके देश की खाद्य सुरक्षा को बनाए रखा है। जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ रही है, सरकार यह मानती है कि उनकी सालों की कड़ी मेहनत के बदले उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। यह बात खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए ज्यादा अहम है, जिनके पास बुढ़ापे में सहारे के लिए सीमित बचत होती है।

इसी नज़रिए के साथ, 12 सितंबर 2019 को प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएमकेएमवाई) शुरू की गई थी। यह योजना पात्र छोटे और सीमांत किसानों (एसएमएफ), चाहे वे पुरुष हों या महिला, उन्हें 60 साल की उम्र से हर महीने एक निश्चित पेंशन की गारंटी देती है। इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उनका बुढ़ापा स्थिरता और मानसिक शांति के साथ बीते।

शुरू होने के बाद से ही, पीएम-केएमवाई किसान समुदाय के लिए सामाजिक सुरक्षा का एक अहम आधार बन गई है। 12 सितंबर 2026 को यह योजना अपनी यात्रा के सात साल पूरे कर रही है। इन सात सालों में, इस योजना ने देश भर के किसानों के बीच अपनी पहुँच लगातार बढ़ाई है। यह सरकार की उस लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है, जिसके तहत वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसान बेहतर वित्तीय सुरक्षा और सम्मान के साथ अपनी वृद्धावस्था में जीवन जी सकें।

प्रभाव: सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ना

पीएम-केएमवाई का सफ़र न सिर्फ इसके सात साल पूरे होने से दिखता है, बल्कि उन किसानों की बढ़ती संख्या से भी पता चलता है, जो इसके सामाजिक सुरक्षा फ्रेमवर्क में शामिल हुए हैं। सामाजिक सुरक्षा का वादा किसानों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। 06 फरवरी 2026 तक पीएम-केएमवाई में 24,96,252 लोगों ने पंजीकरण कराया है।

इस योजना का असर अलग-अलग राज्यों में इसके विस्तार से साफ दिखता है। हरियाणा सबसे आगे है, जहाँ लगभग 5.75 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, इसके बाद बिहार का नंबर आता है, जहाँ 3.46 लाख से ज़्यादा किसान शामिल हुए हैं। झारखंड और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों में पंजीकरण की संख्या 2.5 लाख से ज़्यादा हो गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह संख्या 2 लाख से ज़्यादा रही है। ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र भी इस योजना की राष्ट्रीय पहुँच को और मज़बूत करते हैं।

इस बढ़ती पहुँच के पीछे लगातार सरकारी निवेश है। फरवरी 2026 तकपीएम-केएमवाई के तहत पूरे देश में ₹540.66 करोड़ का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे लगातार लागू करने और लोगों तक पहुँचाने में मदद मिली है।

किसानों के बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए शुरू की गई एक सामाजिक सुरक्षा योजना से आगे बढ़कर, पीएम-केएमवाई अब पूरे देश के लिए एक सुरक्षा कवच बन गई है। यह उन लाखों लोगों के लिए आर्थिक सुरक्षा का वादा लेकर आई है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपना कामकाजी जीवन बिताते हैं।

किसानों के सुनहरे दिनों के लिए पेंशन का सुरक्षा कवच

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) एक केंद्रीय योजना है, जिसे कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाया जाता है। यह योजना भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ मिलकर लागू की जाती है।

पीएम-केएमवाई एक स्वैच्छिक और अंशदान-आधारित वृद्धावस्था पेंशन योजना है, जिसे छोटे और सीमांत किसानों को उनके बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। इस योजना के तहत, पात्र सदस्य 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद हर महीने कम से कम ₹3,000 की निश्चित पेंशन पाते हैं।

यह योजना सदस्य की मृत्यु के बाद परिवार को पेंशन का लाभ भी देती है। अगर पेंशन पाते समय सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उनके जीवनसाथी को सदस्य की पेंशन का 50% पारिवारिक पेंशन के तौर पर मिलता है। यह राशि ₹1,500 प्रति माह होती है। यह लाभ सिर्फ जीवनसाथी को मिलता है और तभी लागू होता है, जब जीवनसाथी पहले से पीएम-केएमवाई का लाभार्थी न हो।

यह योजना उस स्थिति के लिए भी एक विकल्प देती है, जब सदस्य की मृत्यु 60 साल की उम्र से पहले हो जाती है। अगर लाभार्थी ने नियमित रूप से अंशदान किया है, तो जीवनसाथी योजना में शामिल हो सकता है और तय नियमित अंशदान करके इसे जारी रख सकता है। इसके अलावा, जीवनसाथी एग्जिट और निकासी के नियमों के अनुसार योजना से बाहर भी निकल सकता है।

पीएम-केएमवाई से किसे लाभ हो सकता है?

यह योजना देश भर के उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए है, जिनके पास खेती लायक ज़मीन दो हेक्टेयर तक है। इसमें शामिल होने के लिए किसानों की उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि 1 अगस्त 2019 तक संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के ज़मीन के रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज हो। उन्हें योजना के तहत बाहर रखने वाले नियमों के दायरे में नहीं होना चाहिए।

बाहर रखने वाले नियम: पीएम-केएमवाई के लिए कौन पात्र नहीं है?

हालांकि प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) को छोटे और सीमांत किसानों (एसएमएफ) के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवच के तौर पर बनाया गया है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणी के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ उन लोगों तक पहुँचे, जिनके पास बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा बहुत कम है।

  1. दूसरी सामाजिक सुरक्षा और पेंशन योजनाओं के तहत आने वाले किसान

जो किसान पहले से ही दूसरी कानूनी या केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा स्कीमों में शामिल हैं, वे पीएम-केएमवाई में शामिल होने के पात्र नहीं हैं:

● कानूनी स्कीमों जैसे नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस), एम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसीस्कीम या एम्प्लॉइज फंड ऑर्गनाइज़ेशन स्कीम के सदस्य।

● प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (पीएमएसवाईएमके लाभार्थी।

● प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना (पीएमएलवीएम) के लाभार्थी।

2. बेहतर आर्थिक स्थिति वाली श्रेणियां

कमज़ोर किसान परिवारों को मदद देने के लिए, नीचे दिए गए बेहतर आर्थिक संकेतकों में से किसी एक को पूरा करने वाले व्यक्तियों और परिवारों को इसमें शामिल नहीं किया गया है:

● संस्थागत ज़मीन मालिक: ज़मीन रखने वाली सभी संस्थाएं।

● संवैधानिक पदों पर रहने वाले: संवैधानिक पदों पर पहले रह चुके और अभी काम कर रहे लोग।

● जनप्रतिनिधि: पूर्व और वर्तमान मंत्री या राज्य मंत्री, लोकसभा या राज्यसभा के सदस्य, राज्य विधानसभाओं या परिषदों के सदस्य, नगर निगमों के मेयर और ज़िला पंचायतों के अध्यक्ष।

● सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी: केंद्र/राज्य सरकार के मंत्रालयों, विभागों या फील्ड यूनिट्स, केंद्र या राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई), जुड़ी हुई या स्वायत्त संस्थाओं के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी, साथ ही स्थानीय निकायों के नियमित कर्मचारी।

  • मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस), क्लास IV और ग्रुप डी कर्मचारियों को इस अपवाद से छूट दी गई है और वे पीएम-केएमवाई के लिए पात्र बने रहेंगे।

● आयकर देने वाले: वे सभी व्यक्ति जिन्होंने पिछले आकलन वर्ष में आयकर दिया है।

● पंजीकृत पेशेवर: पेशेवर संस्थाओं के साथ पंजीकृत डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और आर्किटेक्ट जैसे पेशेवर।

3. सत्यापन और स्व-घोषणा

पीएम-केएमवाई के लिए पात्रता की जांच मुख्य रूप से आवेदक के स्व-घोषणापत्र पर निर्भर करती है। राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें इन्हीं स्व-घोषणाओं के आधार पर पात्रता को प्रमाणित करती हैं। यदि कोई आवेदक गलत या झूठी घोषणा करता हुआ पाया जाता है, तो वह इस योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभों के लिए अयोग्य हो जाता है, केंद्र सरकार का बराबर का योगदान रोक दिया जाता है और सब्सक्राइबर का योगदान बिना ब्याज के वापस कर दिया जाता है।

सुरक्षित भविष्य के लिए साझा योगदान

पीएम-केएमवाई एक साझा योगदान मॉडल पर काम करती है, जिसके तहत किसान और केंद्र सरकार पेंशन फंड में बराबर का योगदान करते हैं। किसान अपने कामकाजी वर्षों के दौरान हर महीने योगदान करते हैं, जबकि सरकार भी उतना ही योगदान करती है।

किसान का मासिक योगदान ₹55 से ₹200 के बीच होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि किसान किस उम्र में योजना से जुड़ता है। इस प्रकार, कम उम्र में जुड़ने वाले हर महीने कम राशि का योगदान करते हैं, जबकि अधिक उम्र में जुड़ने वाले ज़्यादा राशि का योगदान करते हैं, जैसा कि नीचे बताया गया है:

प्रवेश की आयु (वर्षों में) सेवानिवृत्ति की आयु (वर्षों में) सदस्य का योगदान (रु.) सरकार का योगदान (रु.) कुल योगदान (रु.)
18 60 55 55 110
19 60 58 58 116
20 60 61 61 122
21 60 64 64 128
22 60 68 68 136
23 60 72 72 144
24 60 76 76 152
25 60 80 80 160
26 60 85 85 170
27 60 90 90 180
28 60 95 95 190
29 60 100 100 200
30 60 105 105 210
31 60 110 110 220
32 60 120 120 240
33 60 130 130 260
34 60 140 140 280
35 60 150 150 300
36 60 160 160 320
37 60 170 170 340
38 60 180 180 360
39 60 190 190 380
40 60 200 200 400

 

किसान का योगदान योजना से जुड़े बैंक अकाउंट से अपने-आप कट जाता है। इससे पेंशन फंड में हर महीने नियमित योगदान सुनिश्चित होता है। पंजीकरण के समय, किसान ऑटो-डेबिट मैंडेट देता है। यह जुड़े हुए बैंक खाते से लागू मासिक योगदान की कटौती को मंज़ूरी देता है।

पात्र छोटे और सीमांत किसान पीएम-केएमवाई में स्वैच्छिक योगदान के लिए अपने पीएम-किसान लाभों का उपयोग करने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके लिए, किसान एनरोलमेंट-सह-ऑटो-डेबिट मैंडेट जमा करता है। यह उस बैंक अकाउंट से योगदान की स्वचालित कटौती को मंज़ूरी देता है, जिसमें पीएम-किसान लाभ जमा किए जाते हैं।

पंजीकरण: एक सरल डिजिटल प्रक्रिया

पीएम-केएमवाई पात्र छोटे और सीमांत किसानों (एसएमएफ) को निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से एक सरलपेपरलेस पंजीकरण प्रक्रिया प्रदान करता है। किसानों को ओटीपी सत्यापन के लिए अपना आधार कार्डबैंक अकाउंट का विवरण और मोबाइल नंबर साथ ले जाना होता है।

सीएससी पर, विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर (वीएलई) किसान के विवरण को सत्यापित करता है और ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करता है। किसान मैंडेट फॉर्म पर हस्ताक्षर करता है। इस चरण में, पहला योगदान डिजिटल रूप से प्रोसेस किया जाता है।

सफल रजिस्ट्रेशन के बाद, किसान को पेंशन अकाउंट नंबर और पेंशन कार्ड मिलता है। ये जानकारी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (एलआईसी) को भेजी जाती है, जो पेंशन फंड और पेंशन पेमेंट का प्रबंधन करती है। इसके बाद का योगदान किसान के बैंक खाते से अपने आप कट जाता है।

किसान अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से महीने मेंतीन महीने मेंचार महीने में या छह महीने में योगदान करने का विकल्प चुन सकते हैं। इस प्रक्रिया से किसान अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल रूप से पंजीकरण पूरा कर सकते हैं, साथ ही यह भी सुनिश्चित होता है कि उनके योगदान और पेंशन का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए।

किसानों का कल्याण के लिए लगातार कोशिश

पीएम-केएमवाई के सात साल भारत के छोटे और सीमांत किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की लगातार कोशिश को दिखाते हैं। 2019 में शुरू हुई यह योजना धीरे-धीरे पूरे देश में फैली है और खेती करने वाले परिवारों तक वृद्धावस्था में आय सुरक्षा पहुंचाई है। इसके आसान, पेपरलेस पंजीकरण प्रक्रिया और योगदान से सरल विकल्पों ने योग्य किसानों के लिए इसमें शामिल होना आसान बना दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि पीएम-केएमवाई किसानों के काम करने के सालों से आगे की सोचती है और 60 साल की उम्र के बाद एक भरोसेमंद पेंशन देती है। इसलिए पीएम-केएमवाई का सफर सिर्फ पंजीकरण और कवरेज के बारे में नहीं है। यह किसानों के बुढ़ापे में उनकी गरिमा और आर्थिक स्थिरता की रक्षा करने के एक बड़े वादे को दिखाता है। पेंशन का सुरक्षा घेरा बनाकर, यह योजना उन लोगों के लिए बेहतर सुरक्षा का वादा मजबूत करती है, जो अपनी पूरी कामकाजी ज़िंदगी भारत की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में बिताते हैं।

संदर्भ : https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=159965&NoteId=159965&ModuleId=3&reg=3&lang=2

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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