कांकेर में नैनो उर्वरक आधारित किसान सभा का व्यापक आयोजन


कांकेर 20 जनवरी 2026 : आदिम जाति सेवा सहकारी – बड़े कापसी, जिला कांकेर में इफको के तत्वावधान में नैनो उर्वरक उपयोग आधारित किसान सभा कार्यक्रम का सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इफको राज्य कार्यालय रायपुर से श्री दिनेश गांधी, उप प्रबंधक (कृषि सेवा) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन इफको के क्षेत्रीय अधिकारी , श्री लाल बहादुर सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम के दौरान श्री दिनेश गांधी द्वारा किसानों को इफको का विस्तृत परिचय देते हुए बताया गया कि परंपरागत यूरिया के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से पौधों की वृद्धि, भूमिगत जल की गुणवत्ता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने इफको नैनो यूरिया के लाभों को विस्तार से समझाया तथा इसके प्रयोग की विधि, छिड़काव का उपयुक्त समय एवं फसल की विभिन्न अवस्थाओं में उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने आगे नैनो डीएपी के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए इसके लाभ, प्रयोग का समय, बीज उपचार, जड़ उपचार तथा पत्तियों पर छिड़काव की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। साथ ही नैनो जिंक, नैनो कॉपर एवं अन्य नैनो उर्वरकों के महत्व, आवश्यकता, अनुशंसित मात्रा, सही उपयोग विधि एवं जार टेस्ट की प्रक्रिया की जानकारी देकर किसानों को सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग के लिए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यूरिया, डीएपी एवं पोटाश के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन उत्पन्न हो जाता है, जिससे फसल उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इस समस्या के समाधान हेतु मृदा पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त किसानों को को मक्का फसल में पोषक तत्वों की कमी से होने वाली बीमारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि मक्का की फसल में किस पोषक तत्व की आवश्यकता कब होती है तथा उचित समय पर संतुलित पोषण किस प्रकार देने से फसल में आने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
विशेषज्ञ द्वारा यह समझाया गया कि सही समय पर सही मात्रा में पोषक तत्वों के उपयोग से मक्का फसल की वृद्धि बेहतर होती है, उत्पादन बढ़ता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। के बारे में भी आवश्यक जानकारी दी गई। साथ ही मुख्य पोषक तत्व, द्वितीयक पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व, जिंक सल्फेट एवं संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।कार्यक्रम में किसानों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए एवं प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा समाधान किया गया। इस किसान सभा में 50 से अधिक किसानों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को उत्पादन लागत में कमी, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण तथा टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।










