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आधुनिक कृषि का मूलाधारः मृदा जैविक कार्बन और फसल उत्पादकता में इसकी अपरिहार्य भूमिका

राजीव कुमार शिशोदिया, उप क्षेत्रीय प्रबंधक, ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम (इण्डिया) प्रा. लि. चेन्नई

सारांशः समकालीन कृषि परिदृश्य में बढ़ती जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप मृदा स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट आई है। आज वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती मिट्टी की प्राकृतिक उत्पादकता को अक्षुण्ण बनाए रखने की है। इस दिशा में “मृदा जैविक कार्बन” (Soil Organic Carbon – SOC) एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभरा है, जिसे मृदा जीवन की आत्मा कहा जा सकता है। प्रस्तुत लेख में जैविक कार्बन की वैज्ञानिक महत्ता, कृषि में इसके बहुआयामी प्रभावों और इसके संवर्धन हेतु एक क्रांतिकारी समाधान ‘टैग कार्ब एन 6जी’ (Tag Carb – N6G) पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है।

| 1. जैविक कार्बन (Organic Carbon) क्या है? एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

मृदा जैविक कार्बन (Soil Organic Carbon) मूल रूप से मिट्टी में पाए जाने वाले कार्बनिक पदार्थों (Soil Organic Matter -SOM) का मुख्य रासायनिक और सक्रिय घटक है। रासायनिक दृष्टि से, मिट्टी के कुल कार्बनिक पदार्थ का लगभग 58 प्रतिशत भाग जैविक कार्बन होता है। यह कोई एकल तत्व नहीं है, बल्कि यह पौधों के अवशेषों, फसल की जड़ों के स्राव (Root Exudates), मृत सूक्ष्मजीवों, पशु अपशिष्टों और सूक्ष्मजीवों द्वारा किए गए अपघटन (Decomposition) की विभिन्न अवस्थाओं में मौजूद जटिल कार्बनिक यौगिकों का एक गतिशील मिश्रण है।

वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, मृदा जैविक कार्बन को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है:

  • सक्रिय कार्बन (Active Carbon Pool): यह सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का प्राथमिक स्रोत है। यह अत्यंत अस्थिर होता है और फसलों को त्वरित पोषण प्रदान करने में सहायक होता है।
  • धीमा कार्बन (Slow Carbon Pool): यह मिट्टी की संरचना को स्थिर बनाए रखने और पोषक तत्वों को संचित करने में भूमिका निभाता है।
  • स्थिर कार्बन (Passive Carbon Pool): इसे ह्यूमस (Humus) भी कहा जाता है। यह सैकड़ों वर्षों तक मिट्टी में सुरक्षित रह सकता है और मृदा की दीर्घकालिक रासायनिक और भौतिक क्षमता को नियंत्रित करता है।

संक्षेप में, जैविक कार्बन मिट्टी की वह धुरी है जो उसके भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों को आपस में जोड़कर उसे ‘जीवित’ बनाए रखती है। बिना जैविक कार्बन के मिट्टी केवल एक निर्जीव माध्यम (धूल) मात्र रह जाती है।

| 2. कृषि और फसलों में जैविक कार्बन का महत्व

कृषि पारिस्थितिकी तंत्र (Agricultural Ecosystem) में जैविक कार्बन का महत्व बहुआयामी है। इसे हम निम्नलिखित तीन मुख्य वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के माध्यम से समझ सकते हैं:

क) मृदा के भौतिक गुणों में सुधार (Physical Importance)

जैविक कार्बन मिट्टी के कणों को आपस में बांधकर एक बेहतरीन ‘मृदा संरचना’ (Soil Structure) का निर्माण करता है। यह मिट्टी में वृहद् और सूक्ष्म छिद्रों (Macro and Micro Pores) का संतुलन बनाता है, जिससे जड़ों को श्वसन के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। इसके अतिरिक्त, इसकी जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity) असाधारण होती है। उच्च जैविक कार्बन युक्त मिट्टी अपने वजन से कई गुना अधिक पानी सोख सकती है, जिससे फसलों को सूखे की स्थिति में भी लंबे समय तक नमी मिलती रहती है और सिंचाई की लागत में भारी कमी आती है।

ख) रासायनिक गुणों और पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि (Chemical Importance)

मिट्टी की धनायन विनिमय क्षमता (Cation Exchange Capacity – CEC) सीधे तौर पर जैविक कार्बन की मात्रा पर निर्भर करती है। उच्च जैविक कार्बन होने पर मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक और सल्फर जैसे आवश्यक तत्व लीचिंग (Leaching – बह जाना) द्वारा नष्ट नहीं होते। यह रासायनिक उर्वरकों की दक्षता (Fertilizer Use Efficiency) को बढ़ाता है, जिससे किसान जो भी खाद डालते हैं, वह पौधों को पूरी तरह प्राप्त होती है।

ग) जैविक सक्रियता और सूक्ष्मजीवी पर्यावरण (Biological Importance)

मिट्टी में खरबों की संख्या में हितकारी सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, कवक, केंचुए) पाए जाते हैं, जो पौधों के लिए अनुपलब्ध पोषक तत्वों को घुलनशील अवस्था में बदलते हैं। इन सूक्ष्मजीवों का मुख्य भोजन ‘कार्बन’ ही है। जब मिट्टी में जैविक कार्बन का स्तर उत्तम होता है, तो इन लाभकारी जीवाणुओं की संख्या में तीव्र वृद्धि होती है, जिससे भूमि की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति पुनर्जीवित हो जाती है।

निम्न जैविक कार्बन (<0.5%) के दुष्परिणामः

मिट्टी का सख्त होना और पपड़ी जमना।

जल भराव या त्वरित सूखा पड़ना।

रासायनिक खादों का बेअसर होना।

फसलों में रोग और कीटों का अत्यधिक प्रकोप।

उच्च जैविक कार्बन (> 0.8%) के लाभः

भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी का निर्माण।

जड़ों का तीव्र और गहरा विकास।

फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि।

गुणवत्तापूर्ण और अधिक पैदावार।

3. आधुनिक कृषि की चुनौतियाँ और वैज्ञानिक समाधानः टैग कार्ब – एन6जी (Tag Carb -N6G)

वर्तमान समय में भारतीय मृदा में जैविक कार्बन का स्तर चिंताजनक रूप से गिरकर 0.3 से 0.4 प्रतिशत के आसपास रह गया है, जबकि एक स्वस्थ मिट्टी के लिए यह न्यूनतम 0.8 प्रतिशत होना अनिवार्य है। इस विकराल समस्या के त्वरित और वैज्ञानिक समाधान हेतु ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम (इण्डिया) प्रा. लि. चेन्नई (Tropical Agrosystem (I) Pvt. Ltd. Chennai) ने एक क्रांतिकारी उत्पाद प्रस्तुत किया है, जिसका नाम है टैग कार्ब एन6जी (Tag Carb – N6G)।

टैग कार्ब – एन6जी (Tag Carb – N6G) – एक परिचय

यह उत्पाद आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान का परिणाम है, जो मिट्टी में कार्बनिक तत्वों की कमी को तत्काल पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह न केवल पौधों को पोषण देता है, बल्कि मृदा के सूक्ष्म-पर्यावरण (Micro-environment) में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

टैग कार्ब – एन6जी (Tag Carb – N6G) कार्यप्रणाली और फसल उत्पादकता में योगदानः

  • त्वरित कार्बन संवर्धनः यह मिट्टी की सक्रिय और स्थिर कार्बन दोनों श्रेणियों में सुधार करता है, जिससे भूमि में प्राकृतिक ह्यूमस के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
  • पोषक तत्वों का उत्प्रेरक (Nutrient Catalyst): इसके अनुप्रयोग से मिट्टी में पहले से अघुलनशील अवस्था में पड़े फास्फोरस और सूक्ष्म पोषक तत्व गतिशील होकर पौधों की जड़ों द्वारा आसानी से ग्रहण कर लिए जाते हैं।
  • सफेद जड़ों का विकासः फसलों में जड़ों के फैलाव को अभूतपूर्व बल देता है, जिससे विपरीत मौसम (जैसे अत्यधिक गर्मी या सूखा) में भी फसलें हरी-भरी खड़ी रहती हैं।
  • पर्यावरण अनुकूल और सततः यह 100% पर्यावरण के अनुकूल है, जो दीर्घकालिक टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।

| निष्कर्ष (Conclusion)

मृदा स्वास्थ्य को सुधारना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भारतीय कृषि को जीवित रखने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। जैविक कार्बन की प्रचुरता के बिना हम टिकाऊ और उच्च उत्पादकता की कल्पना नहीं कर सकते। अनुसंधान और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर यह स्पष्ट है कि ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम (इण्डिया) प्रा. लि. चेन्नई का उत्पाद टैग कार्ब – एन6जी (Tag Carb – N6G) मिट्टी के गिरते कार्बन स्तर को पुनर्जीवित करने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित हो रहा है। प्रत्येक जागरूक शोधार्थी और प्रगतिशील किसान को इसके वैज्ञानिक महत्व को समझकर कृषि पद्धतियों में इसे प्रमुखता से शामिल करना चाहिए।

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’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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