पशुपालन

गाय-भैंस में अफरा (Bloat)

डॉ. विनिता वासनिक, डॉ. विनोद चिमनकर,डॉ. आर.सी. रामटेके

अफरा गाय-भैंस के पाचन तंत्र, विशेषकर रूमेन (पहला आमाशय) से संबंधित एक गंभीर स्थिति है। सामान्यतः रूमेन में भोजन के पाचन के दौरान गैस बनती है, जो डकार के रूप में बाहर निकल जाती है। जब किसी कारण से यह गैस बाहर नहीं निकल पाती और रूमेन में ही जमा हो जाती है, तो पेट फूल जाता है-इसे ही अफरा (ब्लोट) कहते हैं। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो बढ़ती गैस फेफड़ों और हृदय पर दबाव डालती है, जिससे पशु की मृत्यु भी हो सकती है।

अफरा होने के मुख्य कारण –
1. हरी दलहनी चारा (बरसीम, लूसर्न, क्लोवर) अधिक मात्रा में खिलाना ।
– ये चारे बहुत जल्दी पचते हैं और अधिक झाग बनाते हैं।
– झाग के कारण गैस बाहर नहीं निकल पाती (फ्रोथी अफरा)।
2. आहार में अचानक परिवर्तन करना ।
– अचानक सूखे चारे से हरे चारे पर जाना या दाने की मात्रा बढ़ाना रूमेन की क्रिया को बिगाड़ देता है।
3. अधिक मात्रा में दाना या सांद्र आहार मवेशियों को खिलाना ।
– इससे रूमेन में अम्लता बढ़ती है और गैस अधिक बनती है।
4. खराब, सड़ा या फफूँद लगा चारा मवेशियों को खिलाना ।
– यह पाचन को खराब करता है और गैस जमाव बढ़ाता है।
5. रूमेन की गड़बड़ी या अपच होना ।
– कमजोर पाचन क्षमता वाले पशुओं में अफरा जल्दी होता है।
6. सूखे चारे की कमी होना ।
– रेशा न मिलने से रूमेन की सामान्य गति रुक जाती है।

अफरा के प्रकार
1. साधारण (Free Gas) अफरा

  • गैस सीधे रूमेन में जमा होती है।
  • अधिकतर डकार रुकने के कारण होता है।
  • स्टमक ट्यूब से आसानी से गैस निकल जाती है।

2. झागदार (Frothy) अफरा

ऽ गैस झाग में फँस जाती है।
ऽ प्रायः हरे दलहनी चारे से होता है।
ऽ इसमें केवल ट्यूब डालने से गैस नहीं निकलती, तेल या दवा आवश्यक होती है।

अफरा के लक्षण (पहचान कैसे करें)

  • पेट के बाएँ भाग में असामान्य सूजन
  • बेचौनी, बार-बार उठना-बैठना
  • साँस लेने में कठिनाई, मुँह खुला रखना
  • जुगाली और चारा खाना बंद कर देना
  • लार टपकना
  • दर्द से कराहना
  • गंभीर स्थिति में पशु गिर भी सकता है।

खेत स्तर पर तुरंत उपचार (प्राथमिक उपचार)
1. चारा तुरंत बंद करें

  • हरा चारा और दाना तुरंत रोक दें।
  • पशु को खड़ा रखें और धीरे-धीरे चलाएँ, इससे गैस निकलने में मदद मिलती है।

2. घरेलू अफरा-रोधी उपाय

  • सरसों का तेल / मूँगफली का तेल / वनस्पति तेल
    मात्राः 200-300 मि.ली. मुँह से पिलाएँ
  • यह झाग को तोड़ता है और गैस बाहर निकलने में सहायक होता है।
  • बाजार में उपलब्ध एंटी-ब्लोट दवाएँ भी दी जा सकती है, जैसे – 1. ब्लोएटोसिल,
    2. विरबैक गैस्टिन, 3. हिमालया हिमब्लोट

*तारपीन का तेल केवल पशु चिकित्सक की सलाह से ही दें, क्योंकि गलत मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।

3. ड्रेंचिंग (दवा पिलाना)

  • तेल को गुनगुने पानी में मिलाकर बोतल या ड्रेंचिंग गन से पिलाएँ।
  • इससे झाग टूटता है और गैस निकलने लगती है।

4. स्टमक ट्यूब डालना

  • पशु चिकित्सक द्वारा स्टमक ट्यूब डालकर गैस निकाली जाती है।
  • यह साधारण अफरा में अत्यंत प्रभावी तरीका है।

5. ट्रोकाराइजेशन (आपातकालीन उपचार)

  • जब पशु को बहुत अधिक साँस की परेशानी हो।
  • चिकित्सक ट्रोकार और कैनुला से पेट में छेद कर गैस निकालता है।
  • यह जीवन-रक्षक प्रक्रिया है और केवल प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही की जानी चाहिए।

पशु चिकित्सकीय उपचार
पशु चिकित्सक द्वारा –

  • एंटी-ब्लोट दवाएँ जैसे – 1. ब्लोएटोसिल, 2. विरबैक गैस्टिन, 3. हिमालया हिमब्लोट
  • रूमेन उत्तेजक जैसे- रुमेन एफ एस पाउडर
  • आवश्यकता अनुसार एंटीबायोटिक जैसे- ऑक्सीटेट्रासाइक्लीन

उपचार के बाद देखभाल –

  • 1-2 दिन तक सूखा चारा (भूसा, सूखी घास) दें
  • तुरंत हरा चारा न खिलाएँ
  • साफ और पर्याप्त पानी दें
  • दोबारा अफरा के लक्षण दिखें तो तुरंत उपचार करें

अफरा से बचाव –

  • भूखे पशु को सीधे हरे दलहनी चारे पर न छोड़ें
  • हरे चारे के साथ सूखा चारा मिलाकर दें
  • आहार में अचानक बदलाव न करें
  • खराब या सड़ा चारा न खिलाएँ
  • नियमित रूप से रेशायुक्त संतुलित आहार दें

पशु चिकित्सक को बुलाने का सही समय-

  • पेट अत्यधिक फूल जाए
  • साँस लेने में बहुत अधिक कठिनाई हो
  • पशु गिर जाए या बेहोश हो
  • घरेलू उपचार से आराम न मिले

निष्कर्ष
अफरा गाय-भैंस में एक सामान्य लेकिन अत्यंत खतरनाक समस्या है। समय पर पहचान, सही प्राथमिक उपचार और पशु चिकित्सक की सहायता से पशु का जीवन बचाया जा सकता है। संतुलित आहार और सही प्रबंधन अपनाकर अफरा की समस्या से आसानी से बचाव किया जा सकता है।

लेखक:
डॉ. विनिता वासनिक, डॉ. विनोद चिमनकर,डॉ. आर.सी. रामटेके
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय-दुर्ग (छत्तीसगढ़)

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