

परिचयः पैशन फ्रूट पैशिफ्लोरेसी कुल का एक सेहतमंद और पोषण तत्वों से भरपूर फल माना जाता है। इस फल में प्रोटीन, वसा, विटामीन, खनिज तत्व तथा ऐंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में तथा अन्य औषधीय गुण भी होते हैं। इस फल के सेवन से मधुमेह, सूजन, ऐंठन, कैंसर जैसे बिमारियो को नियंत्रित करता है। इस पौधे के विभिन्न भागों का उपयोग अल्सर उपचार में भी किया जाता है। पैशन फ्रूट की खेती मुख्य रूप से ब्राजील, कोलंबिया, भारत तथा ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में लोकप्रिय है भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से निचले पहाड़ी क्षेत्रों और गर्म-सर्द जलवायु वाले इलाकों में होती है। मुख्य राज्य जहाँ इसकी खेती होती हैः केरल, तमिलनाडु, नागालैंड, मिज़ोरम, सिक्किम, कर्नाटक (कुछ भागों में) भारत में इसकी उपज अपेक्षाकृत कम है, लेकिन मांग बहुत अधिक है, खासकर जूस और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में। छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा, जशपुर जैसे पहाड़ी व आदिवासी क्षेत्रों में हल्की ठंडक और वर्षा होती है, जो पैशन फ्रूट के लिए उपयुक्त है। यहां की लाल और दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। कई क्षेत्रों में खेती योग्य खाली भूमि है। (Cultivation of Passion Fruit (Krishna Phal))

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के कारण पैशन फ्रूट जूस, हेल्थ ड्रिंक्स की मांग बढ़ रही है। स्थानीय और शहरी बाजारों (रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग) में इसे बेचना आसान हो सकता है। छत्तीसगढ़ शासन “फलों की बागवानी“ को प्रोत्साहित कर रही है। पैशन फ्रूट को नवाचार खेती के अंतर्गत सरकारी योजनाओं में शामिल किया जा सकता है।कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी मदद ली जा सकती है।बाजार में 380-400 रु. प्रति किलोग्राम तक दाम मिलने से भारत में भी इसकी खेती का प्रचलन बढ़ा है।
पैशन फ्रूट की किस्में
1 बैंगनी पैशनफ्रूट
2. पीला पैशनफ्रूट
| पैशन फ्रूट का पोषक तत्व (प्रति 100 ग्राम गूदा) | तत्वो की मात्रा |
| नमी प्रतिशत | 73-75 प्रतिशत |
| कार्बोहाइड्रेट | 22-23 ग्राम |
| प्रोटीन | 2.2-2.4 ग्राम |
| कुल खनिज पदार्थ | 0.8-1.0 ग्राम |
| कैल्शियम | 12 मिलीग्राम |
| फॉस्फोरस | 68 मिलीग्राम |
| लोह तत्व | 1.6 मिलीग्राम |
| विटामिन ए | 1200-1300 आई यू |
| विटामिन सी | 30 मिलीग्राम |
| थायमिन | 0.02 मिलीग्राम |
| राइबोफ्लेविन | 0.13 मिलीग्राम |
| नियासिन | 1.5 मिलीग्राम |
| पोटेशियम | 348 मिलीग्राम |
| फाइबर (आहार रेशा) | 10.11 ग्राम |
जलवायुः पैशन फ्रूट उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा है। फलो के पकने एवं विकास के लिए आदर्श तापमान 20-30° होनी चाहिए। अधिक तापमान से फल का आकार छोटा हो सकता है। इसके लिए 100-200 सेमी. वार्षिक औसत की दर से वर्षा की जरूरत होती है।
मिट्टीः पैशन फ्रूट को विभिन्न प्रकार की मृदाओं में उगाया जा सकता है। परन्तु अच्छे जल निकाय वाली हल्की दोमट और रेतीली दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है। पैशन फ्रूट की खेती के लिए मिट्टी का पी एच 5.5-6.5 तक उपयुक्त माना जाता है। मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा अधिक देनी चाहिए तथा जल निकास अच्छा होना चाहिए।
खेत की तैयारीः खेत की अच्छी तरह से जुताई कर समतल बनाना चाहिए ताकि मिट्टी में मौजूद खरपतवार खत्म हो जाए तथा भूमि का हल्का ढाल उत्तम हो। जुताई के बाद एक हेक्टेयर जमीन में 70-80 टन अच्छी सड़ी हुई खाद अच्छे से बिखेर कर मिट्टी में मिला दे। साथ में पोटाश और फास्फोरस भी मिट्टी परीक्षण के आधार पर खेत तैयार करते समय मिला दे।
गड्ढे की खुदाईः अच्छी तरह तैयार खेत में 3×3 मीटर की दूरी पर 50×50×50 सेमी. आकार के गड्ढे खोदने चाहिए। गड्ढे की खुदाई गरमी में करें तथा खुला छोड़ देवे जिसकी मिट्टी में उपस्थिस हानिकारक सूक्ष्मजीव एवं किदे मर जाएंगे।
पौधा लगाने की विधिः पैशन फ्रूट की खेती में बुआई का सामान्य तरीका बीज द्वारा लगाना है । गुणवत्ता पूर्ण बीच से ही पैशन फ्रूट के पौधे तैयार करना चाहिए। पके हुए फलो स्वस्थ बीज निकाले, बीज को पानी में 1-2 दिन भिगोकर रखे । बीजो को 1-2 सेमी गहराई पर हल्की मिट्टी और कोकोपीट में बोएं। अंकुरण 15-20 दिनो में शुरू होता है। जब पौधा 4-6 इंच लंबा हो जाए तब खेत में लगाए।
पौधा लगाने का समयः पैशन फ्रूट के पौधे जुन-जुलाई लगाने चाहिए यह सबसे अच्छा समय है क्योकि मिट्टी में नमी होती है और पौधो को अच्छी शुरुआत मिलती है। अगर सिंचाई की सुविधा है तो बसंत ऋतु में भी (फरवरी -मार्च) में बुआई की जा सकती है।
सिंचाईः पौधा लगाने ने तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी अच्छी तरह बैठ जाए। गर्मियों के दिनो में 5-7 दिन में एक बार सिंचाई करें तथा सर्दियो में 10-12 दिन में एक बार और मानसून में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है।

खाद एवं उर्वरकः पैशन फ्रूट की फसल को ज्यादा खाद की जरूरत होती है। इसलिए खाद की खुराक को मिट्टी की जाँच के बाद ही तय करे। प्रत्येक पौधे के सटिक वृद्धि के लिए 15 से 20 किलो जैविक कंपोस्ट खाद दिया जाना चाहिए। इसके बाद प्रत्येक साल दो किलो जैविक खाद की मात्रा बढ़ाई जानी चाहिए। 220-330 यूरिया 250-300 सुफर फास्फेट 170-250 एवं पोटाश प्रति पौेधा हर साल देना चाहिए।
फूल एवं फल लगने का समयः पौधों में जून से अगस्त महीने में फूल लगते है। फल लगने का समय अगस्त से दिसंबर का है।
फलो की तुड़ाईः पैशन फ्रूट हफ्ते में 2 से 3 बार फल तुड़ाई की किया जाता है एक अवधि में 25 से 30 बार फल की तुड़ाई कर सकते हैं
उपज एवं लाभ: पैशन फ्रूट के एक पौधे से 300 से 400 फल तक मिल सकते है तथा एक फल का वजन 50 से 100 ग्राम होता है। एक स्वस्थ पैशन फ्रूट का पौधा साल में लगभग 10 से 20 किलो फल दे सकता हैै। एक हेक्टेयर में औसतन 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है।
लेखक:
लिशा तंबोली, डॉ. संगीता एवं आरती मंडावी
पं. किशोरी लाल शुक्ला उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, राजनांदगांव (छ.ग.)









