स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट: भविष्य की खेती का आधार
डॉ. हेम प्रकाश वर्मा, यंग प्रोफेशनल एवं सौरभ माहेश्वरी, शोध छात्र


भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जल संसाधन केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि पेयजल, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा हैं। किंतु तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून ने जल संकट को गंभीर चुनौती बना दिया है। देश के कई क्षेत्र या तो बाढ़ की मार झेलते हैं या फिर सूखे की समस्या से जूझते हैं। ऐसे समय में “हर बूंद की कीमत” समझना और सतत् जल प्रबंधन को अपनाना अनिवार्य हो गया है। (Smart water management: the foundation of future farming)
जल संरक्षण और संचयन
- भारत में वर्षा जल ही सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है, किंतु इसका बड़ा हिस्सा बहकर नदियों और समुद्र में चला जाता है।
- यदि हम खेत तालाब, चेक डैम, परकोलेशन टैंक, कंटूर बंडिंग और रूफ वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को अपनाएँ तो यह पानी भविष्य के लिए संरक्षित किया जा सकता है।
- इससे भूमिगत जल स्तर में सुधार होता है, सिंचाई की लागत घटती है और सूखे के मौसम में भी पानी उपलब्ध रहता है।
सिंचाई का कुशल प्रबंधन
- पारंपरिक बाढ़ सिंचाई में लगभग 60–70% पानी बर्बाद हो जाता है।
- इसके स्थान पर ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियाँ पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाती हैं, जिससे 30–40% तक जल की बचत होती है।
- साथ ही, सिंचाई का समय और मात्रा फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार तय करने से जल उपयोग दक्षता बढ़ती है और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।

फसल चक्र और फसल चयन
- जल संकट वाले क्षेत्रों में कम पानी वाली फसलें (जैसे बाजरा, दालें, तिलहन, चना) अपनाना उचित है।
- धान और गन्ने जैसी अत्यधिक पानी की मांग वाली फसलों को उन्हीं क्षेत्रों तक सीमित करना चाहिए जहाँ पर्याप्त वर्षा या सिंचाई उपलब्ध हो।
- फसल चक्र, अंतरवर्तीय खेती और मिश्रित खेती से पानी की मांग संतुलित रहती है और मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।
मृदा स्वास्थ्य और नमी संरक्षण
- यदि मिट्टी में नमी लंबे समय तक संरक्षित रहे तो सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है।
- इसके लिए मल्चिंग, जीरो टिलेज, फसल अवशेष प्रबंधन और जैविक खाद का प्रयोग उपयोगी है।
- अच्छी मृदा संरचना और जैविक कार्बन की उपलब्धता मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाती है, जिससे पानी का अपव्यय घटता है।
समुदाय आधारित जल प्रबंधन और नीतिगत पहल
- गाँव और कस्बों में सामुदायिक तालाब, नहर प्रबंधन, साझा कुएँ और सिंचाई प्रणालियाँ जल सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
- सरकार की योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), हर खेत को पानी मिशन एवं जल शक्ति अभियान, किसानों को जल प्रबंधन हेतु प्रोत्साहित कर रही हैं।
- साथ ही, किसानों को मौसम आधारित जल प्रबंधन और डिजिटल तकनीक (जैसे मिट्टी नमी सेंसर, मोबाइल ऐप आधारित सिंचाई सलाह) से भी जोड़ा जा रहा है।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2015 में शुरू की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को पर्याप्त और समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
- “हर खेत को पानी” और “पर ड्रॉप, मोर क्रॉप” इसके प्रमुख घटक हैं।
- सूक्ष्म सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर को बढ़ावा दिया जाता है।
- इस योजना से फसलों की उत्पादकता बढ़ती है और पानी का समुचित उपयोग होता है।
- हर खेत को पानी मिशन
- यह मिशन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का महत्वपूर्ण घटक है।
- इसका उद्देश्य सभी खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुँचाना है।
- नहरों, तालाबों, कुओं और जलाशयों का विकास एवं पुनर्जीवन किया जाता है।
- वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण की तकनीकों को बढ़ावा मिलता है।
- इससे किसान वर्षभर सिंचाई की सुविधा पाते हैं और खेती में स्थिरता आती है।
- जल शक्ति अभियान
- जल शक्ति अभियान 2019 में जल संरक्षण और प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु शुरू किया गया।
- इसका मुख्य फोकस भू-जल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण पर है।
- गांवों और शहरों में सामुदायिक भागीदारी से जल संरक्षण कार्य किए जाते हैं।
- वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार किया जाता है।
- इस अभियान से जल संकट का समाधान और भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
निष्कर्ष
जल एक अमूल्य और सीमित प्राकृतिक संसाधन है। कृषि से लेकर मानव जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र तक, इसका महत्व सर्वोपरि है। यदि हम “हर बूंद की कीमत” समझकर जल संरक्षण, कुशल सिंचाई, फसल चयन, मृदा प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता को अपनाएँ, तो जल संकट से निपटने के साथ-साथ सतत् कृषि और विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
References
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- Garg, N. K., & Hassan, Q. (2007). Alarming scarcity of water in India. Current Science, 93(7), 932–941. https://www.jstor.org/stable/24100026
- Indian Council of Agricultural Research. (2020). Efficient water management in agriculture. ICAR. https://icar.org.in
- Ministry of Agriculture & Farmers Welfare. (2021). Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana (PMKSY): Operational guidelines. Government of India. https://pmksy.gov.in
- Ministry of Jal Shakti. (2022). Jal Shakti Abhiyan: Catch the rain campaign. Government of India. https://jalshakti-dowr.gov.in
- Rockström, J., Hatibu, N., Oweis, T., & Wani, S. (2009). Managing water in rainfed agriculture—The need for a paradigm shift. Agricultural Water Management, 97(4), 543–550. https://doi.org/10.1016/j.agwat.2009.09.009
- World Bank. (2019). Water management in agriculture: Policy challenges and solutions. World Bank Group. https://www.worldbank.org
लेखक:
डॉ. हेम प्रकाश वर्मा, यंग प्रोफेशनल,
एफएफपी परियोजना, भाकृअनुप– राष्ट्रिय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर
सौरभ माहेश्वरी,
शोध छात्र,
भाकृअनुप– राष्ट्रिय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर











