

दूध प्रकृति का आदर्श और संपूर्ण आहार है, जो नवजात से लेकर हर उम्र के मानवों के लिए उत्कृष्ट है। लेकिन इसके प्रचुर मात्रा में उपलब्ध पोषण और उच्च आर्द्रता के कारण, यह सूक्ष्म जीवों के विकास के लिए एक अच्छा माध्यम का काम करता है। इससे स्पष्ट होता है कि सुरक्षित, साफ और पूर्ण दूध और दूध उत्पादों की महती आवश्यता है।
इसके लिये, गायों को रोगों से पूरी तरह से सुरक्षित रखना आवश्यक है क्योंकि इन रोगों के कारक या तो दूध में मिल सकते हैं या वे पर्यावरण के प्रदूषण के माध्यम से दूध को दूषित कर सकते हैं।
गंदे उपकरण की सतहें भी दूध के दूषण का एक संभावित स्रोत हो सकती हैं और यह दूध की गुणवत्ता को प्रभावित करने का कारण बन सकती हैं। इसलिए, स्वच्छता और सेनिटाइजेशन कार्यक्रम अत्यधिक महत्वपूर्ण है ।
स्वच्छ दूध
स्वच्छ दूध, वह दूध कहा जाता है जो स्वस्थ पशुओं के अयन से निकाला जाता है, जो साफ एवं सुखे बर्तनों में इकट्ठा किया जाता है एवं जिसमें धूल, मिट्टी, मक्खी, बाल, मल, आदि उपस्थित नहीं रहते हैं। ऐसे दूध का संगठन सामान्य होता है, गंध एवं स्वाद सामान्य होता है एवं जीवाणु की संख्या बहुत कम होती है। ऐसा दूध मानव उपभोक्ता के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होता है। स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए निम्नलिखित बिंदुओं का पालन किया जाना चाहिए:-
1. दुधारू गाय
- पशुओं का स्वास्थ्यः पषु रोगों से मुक्त होना चाहिए, जिनके कारक – माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर्क्यूलोसिस, कॉक्सीएला बर्नेटी, ब्रूसेला एबॉर्टस आदि जीवाणु दूध के माध्यम से मानव को संक्रमित कर सकते हैं। साथ ही पषुओं को सैल्मोनेलोसिस, एंथ्रैक्स, शिगेलोसिस, एंटरोपैथोजेनिक, एशेरिकिया कोलाई, स्ट्रेप्टोकोकस, और अन्य जीवाणुओं और वैक्सीनिया, झूठा गायबक्स, लूपिंग इल (टिक-बोर्न एन्सेफालाइटिस), फुट-और-माउथ रोग आदि के विषाणुओं के संक्रमण से भी मुक्त होना चाहिए।
- पशुओं की सफाईः गोबर, कीचड़, बिस्तर सामग्री, भूसा और कुछ सूक्ष्मजीव जैसे माइक्रोकॉकाई, स्टैफिलोकॉकाई, स्ट्रेप्टोकॉकाई और एंटेरोकॉकाई दूध को दूषित कर सकते हैं। इन खतरनाक तत्वों को दूध में प्रवेश से रोकने के लिए पशुओं को नियमित ग्रूमिंग, ब्रशिंग और धुलाई करना चाहिए और थनों व अयन को ब्लीचिंग पाउडर (10 मिलीग्राम/लीटर) या पोटैशियम परमैंगनेट या अन्य एन्टीसेप्टीक घोल से दूध दूहने के पूर्व व पश्चात् साफ करना चाहिए। एकदम शुरू में निकाले हुए दूध में कीटाणुओं की संख्या हो सकती है अतः इसे एक छोटे बर्तन में संग्रहीत किया जाना चाहिए और गाय के बाड़े से हटा दिया जाना चाहिए।
2. पर्यावरण
- गाय बाड़ा/बाड़ेः बाडें को साफ, पर्याप्त हवादार और अच्छी रोशनी वाला होना चाहिए। अगर बाड़ा अपनी लंबाईं उत्तर-दक्षिण के साथ बना है, तो यह सुबह और शाम के सूर्य की रोषनी का लाभ प्राप्त करता है। बाड़े की वायु हमेशा ताजा, शुद्ध और धूल व मिट्टी से मुक्त होना चाहिए।
- अच्छा आवास और मल की निपटान व्यवस्थाः दूध दुहनेे की जगह को कम से कम एक घंटे पहले साफ रखना आवश्यक है। बाड़ों में गोबर और मूत्र का ठहराव नहीं होने देना चाहिए। यह मक्खी, मच्छर, चूहे, कॉकरोच और पंछी, आदि से भी सुरक्षित होना चाहिए। दीवारों पर नियमित रूप से चुने की पोताई की जाना चाहिए।
- चारा और पानीः अक्सर चारा या खरपतवार की गंध के कारण दूध की बिक्री नही होती है। इसलिए, ऐसे चारों से बचाव किया जाना चाहिए जो गंध दे रहे हैं। जो चारा आफ्लाटोक्सिन, पौधों के विषाणु, भारी धातुओं और विकिरणीय पदार्थों से प्रदूषित हो चुका है, उसे पषुओं को नहीं खिलाना चाहिए।
- पानी जैविक प्रदूषण का एक मुख्य स्रोत है। फार्म के लिए उपयोग किया जाने वाला पानी विभिन्न उद्देश्यों के लिए, संतोषप्रद गुणवत्ता का होना चाहिए। इसलिए, साफ पीने योग्य पानी की आपूर्ति हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए।
3. बर्तन
दूध निकालते समय धूल में उपस्थित सुक्ष्म जीवों से दूध का बचाव करने के लिये छोटे मोहाने के बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है। दूध निकालने के बर्तनों को नियमित रूप से साफ करके उन्हें प्रदूषित होने से बचाया जाना चाहिए। छानने की प्रक्रिया से पशु के शरीर के बाल, धूल, मिट्टी के कण आदि को निकालती है, जो बाहरी स्रोतों से दूध तक पहुंचती हैं। ताजा निकाले गए दूध का तापमान लगभग 38 सेंटीग्रेट होता है जो कि जीवाणुओं के विकास के लिए अत्यधिक उपयुक्त होता है। इसलिए, दूध को निकालने के बाद जल्दी से 10 सेंटीग्रेट से कम ठंडा किया जाना चाहिए।
4. दूध दूहने वाले की स्वच्छता
- दूध दूधने वाला साफ होना चाहिए और उसे दूध दूहने के दौरान छींकना, खांसी, थूकने, सिगरेट पीना और तंबाकू का चबाना जैसे गलत आदतों से बचना चाहिए।
- दूध दूधने वाला हैजा/कोलेरा, टाइफाइड, डिफ्थेरिया और क्षय रोग जैसी संक्रामक बीमारियों से मुक्त होना चाहिए और इन बीमारियों के लिए नियमित आधार पर सख्ती से निगरानी की जानी चाहिए।
- दूध दूहने वालों को दूध दोहने से पहले अपने हाथ और बांहों को धोना चाहिए। नाखून को छोटा रखना चाहिए। दूधने वालों के लिए हमेशा साबुन और साफ तौलिये उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
- दूध दूहने वालों को गलत दोहन के तरीके और अपूर्ण दोहन से बचना चाहिए, जो शेष दूध में जीवों की उपस्थ्तिि का कारण होते है एवं इससे पशुओं में थनैला रोग होने की संभावना होती है।
- मानव एवं पशु स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ दूध उत्पादन अत्यंत आवश्यक है। अतः इस पर विषेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
लेखक :
डॉ. विनीता वासनिक, डॉ. श्वेता जैन एवम् डॉ. आर. सी. रामटेके
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग, छत्तीसगढ़










