उद्यानिकी
ऑयल पाम – किसानों के लिए प्रकृति का सुनहरा वरदान


- क्या पारंपरिक फसलें मुनाफा कम दे रही हैं?
- अतिवृष्टि या असमय वर्षा से बर्बाद हो रही हैं??
- आप एक ऐसी फसल चाहते हैं जो कम मेहनत और लागत में अधिक मुनाफा दे???
“कम मेहनत, कम लागत, बंपर मुनाफा-ऑयल पाम ही है वो एकमात्र फसल”
- विश्व को सर्वाधिक तेल उत्पादक फसल – प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादन।
- कम लागत, कम देखभाल, अधिक मुनाफा पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर आय।
- सरकार द्वारा मूल्य निर्धारण – निर्धारित मूल्य में फल खरीदी की शत-प्रतिशत गारन्टी।
अनुमानित सकल आय (प्रति हेक्टेयर) (खरीदी मूल्य रू 18,351/टन (मार्च-25) के आधार पर):
- 4-6 वर्ष: रु. 70,000 से 2,70,000/वर्ष (4-15 टन उत्पादन),
- 7वें वर्ष के बाद: रु. 3,50,000 से रु 4,50,000/ वर्ष (20-25 टन उत्पादन)
अनुमानित लागत (प्रति हेक्टेयर) (पूंजीगत लागत रहित):
- पहले 4 वर्ष: 25,000-30,000/ वर्ष (भूमि की तैयारी, पौधरोपण, सिंचाई, खाद, इत्यादि)
- 5-6 वर्ष पश्चात्: रु 50,000- 65,000/वर्ष (खाद, सिंचाई, कटाई, परिवहन, इत्यादि)
ऑपल पाम की खेती से प्रति हे. रू 3-4 लाख तक सालाना आय प्राप्त की जा सकती है-
- अंतरवर्ती फसलों से अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।
- जलवायु एवं पर्यावरण अनुकुल- आंधी-तूफान, असमय व अतिवृष्टि से नुकसान की सम्भावना बहुत कम।
- बहुवार्षिक फसल, एक बार पौधरोपण, 4 थे वर्ष से प्रारम्भ होकर 25-30 वर्ष तक लगातार उत्पादन।
- सिंचित भूमि में ऑयल पाम की खेती अपनाएं कम देखभाल पर अधिक उपज पायें।
- बाजार में सर्वाधिक मांग – प्रमुख रूप से खाद्य तेल में तथा इसके आलावा कॉस्मेटिक्स एवं अन्य उत्पादों में।
- शासकीय सहायता प्राप्त – पौधे एवं उसके रखरखाव व पूंजीगत लागत हेतु अधिकतम सब्सिडी उपलब्ध ।
| ऑयल पाम एक नजर में | ||
| ऑयल | – | अन्य तिलहनों की अपेक्षा प्रति वर्ष/हे. 4-6 टन अधिक तेल उत्पादक |
| तेल स्रोत | – | ताड़ तेल : मध्यफल भित्ति, तेल-अंतःभित्ति |
| किस्म | – | टेनेरा |
| समयावधि | – | 25-30 वर्ष |
| जलवायु | – | सिंचित, सभी प्रकार की मिट्टी |
| तापमान | – | अधिकतम 30-40 सेंटीग्रेट, न्यूनतम-18-24 सेंटीग्रेट |
| प्रति है. पौधों की संख्या | – | 143 (9x9x9 मीटर) त्रिकोण |
| परागण | – | कीड़े (एलेदुविपस कमेरू निकस) |
| पौधे की ऊंचाई | – | 20-25 फीट |
| पहली तोड़ाई | – | 36 महिने पौधारोपण के बाद |
| गुच्छो की उपज/हे./वर्ष | – | 20-25 टन |
| गुच्छो की संख्या /पाम/वर्ष | – | 5-12 |
| फलों की संख्या/गुच्छा | – | 2000 के ऊपर |
| गुच्छों का औसत वजन | – | 25 कि.ग्रा. |
अब बार-बार फसल बोआई मिंजाई और मंडी से छुट्टी
ऑयल पाम खेती के फायदे
- वार्षिक उत्पादन प्रति एकड़ 10 से 12 टन।
- न्यूनतम मजदूर की आवश्यकता।
- ऑयल पाम पौधे में बीमारी होने की संभावना कम होती हे अतः दवाई पर होने वाले खर्च कम है।
- इसका उत्पादन 4 वर्ष से प्रारंभ हो जाता है।
- इसमें प्रारंभिक वर्षों में अन्तवर्ती फसलें उगाई जा सकती है तथा बाद के वर्षों में छाया में होने वाली फसलें उगाई जा सकती है।
- फसलोत्पाद विक्री हेतु बाजार उपलब्ध, कंपनी से खरीदी का करार होता है।
- खरीदी हेतु सरकार द्वारा मूल्य का निर्धारण।
- फसल उत्पादन खरीदी हेतु संग्रहण केन्द्र की सुविधा।
- दलालों (कमीशन एजेंट) से छुटकारा।
- मुफ्त तकनीकी सहायता, विशेषज्ञों द्वारा निरीक्षण, परिक्षण व निरंतर सहयोग।
- बहुवर्षीय फसल 25-30 वर्ष तक लगातार उत्पादन।
- ऑयल पाम की खेती के रखरखाव हेतु सरकार की तरफ से आर्थिक (सब्सिडी) सहायता प्राप्त।
- ऑयल पाम की खेती किसी भी प्रकार की भुमि पर किया जा सकता है, जो पूर्णतः सिंचित हो।
- भारत सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा छत्तीसगढ़ के समस्त जिलों को ऑयल पाम की खेती के अनुकूल पाया गया है।
क्या करें और क्या ना करें।
करें
- बाला 1,2,3 मी. परिधि का बनाये। प्रथम वर्ष में मीटर, द्वितीय वर्ष 2 मीटर एवं तृतीय वर्ष में 3 मीटर रखें।
- थाला को खरपतवार मुक्त रखें।
- परिवहन कर लाये गये पौधे का जल्द से जल्द रोपण करें।
- पौधों का रोपण 9x9x9 मी (त्रिकोणीय) की सुनिश्चित दुरी पर करें।
- 400 ग्राम सुपर फास्फेट अथवा 250 ग्राम डी.ए.पी व 50 ग्राम फोरेट, 4-5 किलो गोबर खाद प्रति पौधा पौधरोपण के समय मिलाकर डाले।
- यदि भुमि कंक्रीली / मुरमी हो तो 10-15 किलो गोबर खाद मिट्टी में मिलाकर पौध रोपण के समय डालें ।
- थाले पर पैरा अथवा सुखी पत्तीयों का पलवार लगावें।
- पौधों में नियमित रूप से सिंचाई करें। जड़ क्षेत्र में पर्याप्त नमी बनाये रखें।
- पके हुए फलों के गुच्छों को नियमित समय से तुड़ाई करें।
- कीट एवं बीमारी लगने पर समन्वित किट प्रबंधन प्रणली को अपनायें।
ना करें
- गहरा या उथला रोपण ना करें।
- पॉम पौधे में सिंचाई बहते पानी से न करें।
- अविकसित पाम पौधे की पत्तीयों कि कटाई ना करें।
- अन्तर्वतीय फसलों को थाले के भीतर न लगायें
- थाले के भीतर ट्रैक्टर या हल से किसी भी प्रकार की जुताई न करें
- निंदाई गुड़ाई करते समय पॉम के मुख्य जड़ को नुकसान न पहुंचायें।
- पॉम पौधों के अधयके फलों के गुच्छों को नहीं तोड़ना चाहिए।
- फल वृत को 5 से.मी. से अधिक दूरी पर न काटें।
- पॉम पौधों की पत्तीयों को कभी न बांधे।
उर्वरक
| प्रति पाम /3 महिने में डालें | |||
| उर्वरक | प्रति पौधा (ग्राम) | प्रति पौधा (ग्राम) | प्रति पौधा (ग्राम) |
| प्रति वर्ष | द्वितीय वर्ष | तृतीय वर्ष | |
| यूरिया | 217 | 435 | 652 |
| सुपर फास्फेट | 312 | 625 | 937 |
| पोटाश | 167 | 333 | 937 |
| मैग्नेशियम सल्फेट | 125 | 125 | 125 |
| बोरेक्स | 25 | 25 | 25 |
| अथवा | |||
| डी.ए.पी. | 108 | 217 | 337 |
| यूरिया | 175 | 350 | 525 |
| पोटाश | 167 | 333 | 500 |
| मैग्नेशियम सल्फेट | 125 | 125 | 125 |
| बोरेक्स | 25 | 25 | 25 |
- अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद / कंम्पोस्ट 25 किलो प्रति पौधा प्रत्येक 6 माह में डालें
- इनके अलावा अन्य उर्वरक का प्रयोग करें तो ऑयल पाम विशेषज्ञों / अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर लें।
अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:
प्रियूनिक एशिया प्रायवेट लिमिटेड
क्षेत्रीय कार्यालयः A-24, सृष्टि-संस्कृति कॉलोनी, ग्राम-परसदा, सकरी, बिलासपुर, छत्तीसगढ़-495112
संपर्क: 8103090087, 9098385196, 7974823913, 9617616214, 9131215550
एवं
अपने निकटतम क्षेत्रीय उद्यानिकी अधिकारी से संपर्क करें











