मत्स्य पालन

मछली का मूल्य संवर्धन: मत्स्य उद्योग की प्रगति का नया मार्ग

श्री रवि बघेल, डॉ. जितेन्द्र कुमार जाखड, डॉ. मनोज कुमार गेंदले, डॉ. सुनिता जाखड़

परिचय- भारत एक मत्स्य संपन्न देश है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों टन मछली का उत्पादन होता है। मछली न केवल पोषण का उत्तम स्रोत है, बल्कि इसके द्वारा अनेक प्रकार के उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं, जिससे इसका मूल्य संवर्धन ( value addition ) होता है। मूल्य संवर्धन का अर्थ है – किसी कच्चे उत्पाद को इस प्रकार रूपांतरित करना जिससे उसका आर्थिक मूल्य, भंडारण अवधि और उपयोगिता बढ़ जाए। मछली एवं मछली के उत्पादों को उपभोक्ता के पास पहुॅचने तक उसकी गुणव्ता को बनाये रखना अतिआवश्यक है। ताजा एव स्वस्थ मछली से ही उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य उत्पादं बनाये जा सकते हैं। भौतिक, जीवाण्विक एवं रासायनिक कारक मछली की गुणवत्ता को मुख्यतः प्रभावित करते है। मछ़़़ली को लम्बे समय तक खाने योग्य रखने के लिये इन तीनो कारकों की क्रि़या को रोकना या इनकी गति को धीमे करना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि मछली को पकडने के तुरंत बाद उसे पर्याप्त मात्रा एवं अच्छी गुणवत्ता वाली बर्फ में संरक्षित किया जाता है। लम्बे समय तक मछली को संरक्षित करने के लिए कम तापमान पर रखना अति-आवश्यक है।

मछली की कईं प्रजातियॉ किसी न किसी कारण से उपेक्षित रहती है। जिसका मुख्य कारण मछली का अधिक प्रग्रहण, उनका कम आकर्षक होना, आकार में छोटा होना, मछुआरों में समुचित जानकारी का आभाव अथवा परिसंस्करण, परिसंरक्षण एवं परिवहन की समुचित व्यवस्था का आभाव हो सकता है। उपरोक्त कारणों से कई मछलियों को कम कीमत कि समझकर पानी में वापस फेक दिया जाता है तथा कुछ बची हुई मछलियों को सुखाकर पशुआहार के काम में ले लिया जाता है। मछली की बर्बादी को रोकने, उनसे आर्थिक आय लेने, कुपोषण एवं भुखमरी को रोकने एवं रोजगार के अवसर पैदा करने के लिये कम दाम वाली मछली से मूल्यवर्धित मत्स्य उत्पादों जैसे मछली का आचार, मछली की चकली, मछली कटलेट, मछली पापड़ इत्यादि को तैयार कर अधिक दाम में बेचा जा सकता है। इन सभी मूल्यवर्धित उत्पादों को एक सप्ताह से लेकर कुछ महिने तक उपयोग कर सकते हैं। जो लोग मछली को प्रत्यक्ष रूप में नही खा सकते उनके लिये यह मछली का मूल्यवर्धित उत्पाद बहुत उपयोगी हैं।

आधुनिक खान-पान की आदतों के साथ-साथ तेज जिंदगी और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में वृद्धि ने विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में तैयार खाद्य उत्पादों की भारी मांग पैदा कर दी है। मछली और मत्स्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन मछुआरों की आय को दोगुना करने का एक व्यवहार्य तरीका है। मूल्य संवर्धन स्थानीय स्तर पर बेहतर मार्जिन प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे मछुआरों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। मूल्य संवर्धन को किसी भी अतिरिक्त गतिविधि के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो मछली की प्रकृति और रूप को बदलता है और बिक्री के बिंदु पर बेहतर कीमत प्राप्त करने में मदद करता है। उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुसार मछली और मछली उत्पादों में मूल्य संवर्धन किया जा सकता है। उत्पादों में जीवित मछली से लेकर खाने के लिए तैयार सुविधाजनक उत्पाद शामिल हैं। इसे बेहतर बाजार रूप, विशेष मछली उत्पाद, बैटर और ब्रेडेड मछली उत्पाद हो सकते हैं। मूल्य संवर्धन प्रक्रिया मछली के शेल्फ जीवन को बढ़ाती है जागरूकता की कमी, उचित विपणन चैनल की कमी और गुणवत्ता आश्वासन में बाधाएँ कुछ ऐसे कारक हैं जो मछली उत्पादों के मूल्य संवर्धन प्रक्रिया और विपणन को बाधित करते हैं।

मछली और मत्स्य उत्पाद छत्तीसगढ़ के लोगों के जीवन में पोषण और स्वास्थ्य का आधार हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के पारंपरिक मछली व्यंजन जैसे – फिश करी, फिश रोस्ट, फिश चटनी, फिश समोसा, फिश फिंगर, फिश बॉल, फिश बर्गर, फिश सैंडविच, फिश कटलेट, एवं फिश पकौड़ी इत्यादि का सेवन किया जा सकता है।

मूल्य संवर्धन के प्रकार
1 प्राथमिक प्रसंस्करण-
-मछली की सफाई, चमड़ी हटाना, टुकड़े करना।
-ठंडा करना, बर्फ में रखना।
2. द्वितीयक प्रसंस्करण
-मछली का पकाना, तलना, मसाले मिलाकर तैयार करना।
-मछली के नगेट्स, फिश फिंगर्स, फिश कटलेट्स बनाना।
3. उच्च मूल्य संवर्धन –
-मछली के डिब्बाबंद उत्पाद, फिश सॉसेज, स्मोक्ड फिश, सूखी मछली ।
-मछली से बना जैलेटिन, फिश ऑयल, ओमेगा-3 सप्लीमेंट आदि।

मूल्य संवर्धन के लाभ

  • उपभोक्ता को नई-नई किस्मों में मछली मिलती है
  • किसानों और मछुआरों को अधिक आय प्राप्त होती है
  • फूड वेस्टेज में कमी आती है
  • महिला उद्यमिता और ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा मिलता है
  • निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है
  • मत्स्य प्रसंस्करण से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलता है।
  • छोटे उद्यमी, SHG (Self  Help Group) और MSME सेक्टर में बड़ी संभावना है।
  • उत्पादन लागत कम कर के अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

सरकारी योजनाएँ और सहायता

  • प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) मछली पालन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता।
  • राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB)- प्रशिक्षण, अनुदान और तकनीकी सहायता।
  • समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) को प्रोत्साहन और प्रमाणन सुविधा।
  • स्वयं सहायता समूह (SHG) महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोसेसिंग इकाइयाँ शुरू करने में सहायता।

निष्कर्ष
मछली का मूल्य संवर्धन न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि यह पोषण, रोजगार और निर्यात की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना चाहिए जो मछली के उत्पादों को दीर्घकालीन, सुरक्षित और विविध रूपों में प्रस्तुत करें।

लेखक :
श्री रवि बघेल, डॉ. जितेन्द्र कुमार जाखड, डॉ. मनोज कुमार गेंदले,
दाउ श्री वासुदेव चन्द्रकार कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग,

डॉ. सुनिता जाखड़
आ.पं. श्री.गृ.मु.ना.सा. शासकीय पी.जी. कालेज, कवर्धा

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