कृषि एवम संबद्ध क्षेत्रराज्य

सारंगढ़ में भव्य किसान दिवस का आयोजन 23 दिसम्बर को

स्थल-साहू धर्मशाला रानी सागर सारंगढ़

भारतीय किसान संघ, सारंगढ़ द्वारा 23 दिसम्बर 2024 को राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर सारंगढ़ में भव्य “किसान दिवस” का आयोजन  साहू धर्मशाला रानी सागर सारंगढ़ में कर रहा है| भारतीय किसान संघ, सारंगढ़ के पदाधिकारी श्री ननकी दाऊ साहू, श्री वीरेन्द्र निराला संरक्षक, श्री सीताराम पटेल, श्री सचिन्द्र राव महामंत्री ने कृषकों से आमंत्रित/अपील किया है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुँच कर कार्यक्रम को सफल बनावे|

भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे देश की अर्थव्यवस्था में किसानों का  भी अहम योगदान है| हर साल 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है| किसान हमारे देश की रीड़ की हड्डी हैं क्योंकि वही हैं, जो पूरे देश के लोगों के पेट को भरने में अपना योगदान देते हैं,  भारत में किसान को अन्नदाता और धरती पुत्र कहा जाता है| वो मौसम की परवाह  किए बिना तपती धूप, बारिश और कड़कड़ाती ठंड में भी दिन-रात खेतों में काम करते हैं, इसलिए किसानों को सम्मान देने के लिए हर वर्ष किसान दिवस मनाया जाता है|

राष्ट्रीय किसान दिवस का इतिहास  भारत में हर साल 23  दिसंबर को देश के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है| वो साल 1979  से 1980  तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे, इतने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने  किसानों के हित के लिए कई कार्यक्रम चलाए थे| उन्होंने किसानों को सशक्त बनाने के लिए कई कानून और नीतियां बनाई थी| साल 2001 में भारत सरकार ने पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के सम्मान में 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस घोषित किया था|

भारत में कृषि क्षेत्र रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी विकास दर में गिरावट न केवल किसानों को प्रभावित करती है बल्कि ग्रामीण श्रम बल पर भी व्यापक प्रभाव डालती है जिससे संभावित रूप से बेरोजगारी और अल्परोजगार में वृद्धि होती है। इस क्षेत्र से अपनी आजीविका कमाने वाले लोगों में भूस्वामी जमीन के एक टुकड़े में खेती करने वाले काश्तकार और खेतिहर श्रमिक शामिल हैं।

आज जब देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा जा रहा है, तब इसके जतन किए जाने आवश्यक हैं कि कृषि क्षेत्र का भी उत्थान हो। हमारी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ दशकों में अपनी आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि की हिस्सेदारी 1947 में 60 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2022-23 में 15 प्रतिशत हो जाना एक गहन बदलाव का प्रतीक है, जो देश के आर्थिक परिदृश्य की उभरती अस्थिरता को दर्शाता है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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