Uncategorizedकृषि एवम संबद्ध क्षेत्रपशुपालनराज्य

नेशनल लाइवस्टाक मिशन अंतर्गत पशुपालन हेतु सहायता

विभिन्न घटकों की स्थापना में 50 प्रतिशत अनुदान की जानकारी, दिशा निर्देश एवं आवेदन प्रक्रिया

हमारे देश में पांच वर्षो में मांस उत्पादन में 6.7 से 8.7 मिलियन टन की बढोतरी हूई है (2014 से 2023 तक 28 प्रतिशत) चिकन एवं बकरी/भेंड के मांस में सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान समय में बकरी एवं भेंड, सुकर पालन एवं बैकयार्ड कुक्कुट करके एवं उद्यमिता के रूप में अपनाकर मांस उत्पादन करके आर्थिक लाभ अर्जित करने में बहुत संभावनायें है। इससे प्रोटीन की आवश्यकता को पूरी की जा सकती है।

वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की आवश्यकता से प्रतित होता है  कि हमारे देश में तुरंत मांस उत्पादन बढाने हेतू ध्यान देने की अत्यंत जरूरत है जिससे भविष्य में एनिमल प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति की जा सके। छ.ग. राज्य में 20वी पशुसंगणना के अनुसार बकरा/बकरी 40.05 लाख एवं भेड 1.80 लाख, सूकर की संख्या 5.30 लाख एवं कुक्कुट की संख्या लगभग 185 लाख है। छ.ग. में बकरी/बकरा में 20 वी पशुसंगणना में 19 वी पशु संगणना से की 20 प्रतिशत विदधि दर्ज की गई है। प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत परिवारो के पास औसतन 1.4 हेक्टेयर जमीन है जो कि कृषि के साथ-साथ पशुपालन का कार्य करते हूये अपना जीवन यापन कर रहें है। 2020-21 के अनुसार 46761 हजार किलोग्राम मांस उत्पादन एवं प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष मांस उपलब्धता 1.508 कि.ग्राम है। जो कि राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छाादित, आदिवासी बाहूल्य राज्य एवं 86 प्रतिशत मांसाहारी जनसंख्या एवं समय की मांग के अनुसार छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी, सूकर एवं बैकयार्ड कुक्कुट पालन की असीम संभावनाए है।

  • वर्तमान स्थिति में मांग एवं आपूर्ति में बहुत ज्यादा गेप है ।
  • प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता /खपत कम है ।
  • मांस का रिटेल मूल्य बहुत ज्यादा है (विशेषतः मटन/चिवान)
  • गुणवत्ता पूर्ण/प्रसंस्करित चिकन/मटन/चिवान /पोर्क उत्पादन में हम दूसरे देशों से बहुत पीछे है।
  • पिछले 20 वर्षो में मांस उत्पादन 2.1 (2002.03) मिलियन टन से बढकर 8.8 मिलियन टन (2020.21) है,
  • लेकिन हमारे देश में प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता बहुत ही कम हैं वर्ष 2002 में ये 4.07 किलो, 2012 में 4.11 किलो एवं 2020 में 5.2 किलों दर्ज किया गया है।
  • जबकि आईसीएआर. एन.आई.एन हैदराबाद के अनुसार प्रत्येेक व्यक्ति को वर्ष में 11 किलो मांस की आवश्यकता होती है।
  • भविष्य में मांग एवं आपूर्ति का गैप बढ जायेगा, क्योकि लोगों की औसत आय बढनें एवं पेइंग केपेसिटी बढने से मांस का मांग बढ जावेगा।

भविष्य में मांग बढने के तीन मुख्य कारण है:

  • मनुष्य जनसंख्या में बढोतरी
  • मांसाहारी लोगों की संख्या में प्रतिशतवृद्धि
  • बकरी, भेंड एवं सूकर की संख्या में प्रति वर्ष कम वृद्धि दर

एनिमल प्रोटीन की आवश्यक पूर्ति करने हेतु एवं मांस उत्पादन बढाने हेतू बकरी,भेड पालन, सूकर एवं बैकयार्ड कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करना होग, जिससे मांस उत्पादन में बडोत्तरी की जा सकती है। सभी प्रकार की परिस्थिति देखकर वर्तमान समय में किसानों/उदयमियों को बकरी,भेड पालन, सूकर एवं बैकयार्ड कुक्कुट पालन के प्रति आर्कषित करने के लिये शासकीय, अशासकीय एवं अन्य प्रयास की आवश्यकता है जिससे चिकन/मटन/चिवान /पोर्क उत्पादन को बढाया जा सके।

इसके लिये उपलब्ध उपलब्ध संसाधनों एवं तकनीकी ज्ञान का उपयोग करके बकरी, भेड, सूकर एवं बैकयार्ड कुक्कुट के ब्रीडेबल/प्रजनन योग्य जनसंख्या में वृद्धि के लिये निम्न प्रयास किया जाना चाहियेः
अ. वर्तमान में उपलब्ध ब्रीडेबल/प्रजनन योग्य बकरी, भेड, सूकर एवं मुर्गी का संरक्षण एवं संवर्धन
ब. परंपरागत बकरी/भेडपालक चरवाहों एवं सूकर पालको को मदद
स. एरिया स्पेसिफिक जगहो में बकरी/भेड, सूकर के नये ब्रीडिंग/व्यावसायिक फार्म की स्थापना
द. बकरी,भेड, सूकर एवं मुर्गी पालको पालको को तकनीकी मदद एवं आर्थिक सहायता

उत्पादन क्षमता में बढोतरी के लिये थोडे से सामूहिक प्रयास जैसे- बकरी,भेड, सूकर एवं मुर्गी का समय पर पोषण प्रबंधन, टीकाकरण, उपचार, तकनीकी एवं वित्तीय सहायता से उत्पादकता में 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि की जा सकती है जिससे कुल मांस उत्पादन में विदधि दर्ज की जा सकती है।

भारत सरकार के नेशनल लाइवस्टाक मिशन जो की 2021-22 में रिवाइजड एवं रिलाइन्ड होकर पूरे भारत देश में 2021-22 से 2026-27 तक 5 वर्षो के लिये लाूग किया गया है, जिसमें 50 प्रतिशत केपिटल सब्सडी (कुल प्रोजेक्ट लागत का) का प्रावधान किया गया है। जिसका उददेश्य पशु पालको को आर्थिक अनुदान देकर वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन एवं अच्छे नस्ल के पशु तैयार करनार्, आगनरइर्जड एवं एकीकृत मार्केट तैयार करके पशुपालन में उद्यमिता विकास से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके क्रियान्यवन कें लिये भारत सरकार लेवल पर इंपावर्ड कमीटी, प्रोजेक्ट एप्रुवर्ड कमीटी एवं राज्य सरकार लेवल पर राज्य, पशुपालन विभाग क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी होगी। जिसका कार्य निम्नानुसार हैः
1.आवेदनों का स्क्रुटनी
2. योग्य आवेदनों को राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति के पास एप्रुवल के लिये रखना
3.योजना के कम्पिलिट होने के बाद 2 वर्षो तक मानिटरिंग एवं फालोअप करना ।

इसके अंतर्गत विभिन्न प्रोजैक्ट का अधिकतम सब्सडी जो निम्नानुसार है-
1. कुक्कुट परियोजना – रूपये 25 लाख
2. भेड/बकरी परियोजना – रूपये 10-50 लाख (100 मादा+5 नर से 500 मादा+25 नर)
3. सूकर परियोजना – रूपये 15-30 लाख (50 मादा+5 नर व 100 मादा +10 नर)
4. साइलेज यूनिट – रूपये 50 लाख
5. टोटल मिक्स राशन(कंप्लिट फीड ब्लाक) – रूपये 50 लाख

  • प्रोजेक्ट का बचा हुआ पार्टः बैंक लोन या स्वयं के वित्तीय लागत
  • मार्जिन मनी: कुल लागत का 10 प्रतिशत
  • अनुदान: चैनालाइज करने वाला बैंक सीडबी SIDBI (Small Industries Dev. Bank of India)
  • राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (रू प्रोजैक्ट का एप्रुवल एवं पशुपालन एंव डेयरी विभाग -भारत सरकार को सेग्सन करने के लिये रिकमंड करना

इसके लिये एन.एल.एम के गाइडलाइन में प्रत्येक योजना के लिये केपिटल अनुदान के लिये इंडिकेटिव लिस्ट के अनुसार विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर इस योजना को क्रियान्वित किया जा सकता है।

लाभार्थी भारत का नागरिक हो-

  • कोई भी व्यक्ति/संयुक्त आवेदन
  • व किसान उत्पादक संगठन
  • स्व-सहायता समूह
  • किसान सहकारी संगठन
  • संयुक्त देयता समूह
  • धारा 8 के अंतर्गत आने वाली कंपनीस
  • जाति बंधन नहीं
  • शिक्षा का बंधन नहीं
  • धर्म का बंधन नहीं
  • भारत के कोई भी जगह
  • लिंग बंधन नहीं
  • उम्र 65 साल से कम (1958 के बाद पैदा होने वाला)
  • विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR)  वायेबलिटी रिपोर्ट के साथ
  • खुद या लीज के जमीन के कागजात
  • आधार -पैन – पते का विवरण
  • प्रोजेक्ट वाली जगह का जीआई टेगिंग एवं फोटोग्राफ
  • प्रशिक्षण /अनुभव/पहले से पशुपालन की गतिविधियों में संलग्न हो

गाइडलाइन के अनुसार अनुदान के लिये इंडिकेटिव लिस्ट

लगने वाले कागजात का लिस्ट


योजना के लाभ लेने वाले उद्यमी/आवेदक एन.एल.एम के आनलाइन र्पोटल (www.nlm.udyamimitra.in ) में दिये गये निर्देश का पालन करते हूये आवेदन पत्र एवं जरूरी कागजात अपलोड करें। इसके लिये कोई पंजीयन शुल्क/प्रोसेसिंग फीस नहीं है एवं पोर्टल में एप्लाई करते समय समस्त आवश्यक दस्तावेज के साथ विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट जिसमें कुल लागत, विस्तृत प्रोजेक्ट, कुल आय/आर्थिक लाभ व फारवर्ड एवं बैकवर्ड लिंकेज का वर्णन होना चाहिये।

आनलाइन र्पोटल में स्टेप बाई स्टेप प्रक्रिया-

www.nlm.udyamimitra.in  वेबसाइट पर जायें
आवेदन/एप्लाई टैब पर क्लिक करे।
अपने मोबाइल/कान्टेक्ट नंबर से पंजीयन करें
आनलाइन आवेदन पत्र भरें एवं जरूरी कागजात अपलोड करें।
आवेदन पत्र सबमिट करे।

सफलतापूर्वक आनलाइन आवेदन करने के पश्चात आवेदन को राज्य सरकार के पशुपालन विभाग के राज्य नोडल एजेंसी जैसे छत्तीसगढ में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छ.ग.राज्य पशुधन विकास अभिकरण, रायपुर (CEO, CSLDA,Raipur, C.G.) को पोर्टल के माघ्यम से प्रेषित किया जाता है।

आवेदन करने व लोन प्रक्रिया का स्टेप

  • आनलाइन आवेदन
  • राज्य नोडल एजेंसी द्धारा आवेदन की जांच
  • बैंक से लोन सेंग्शन होने की प्रक्रिया
  • राज्य स्तरीय कार्यपालिक समिति द्धारा आवेदन का एप्रुवल होना
  • पशुपालन एवं दूग्ध विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली द्धारा आवेदन का एप्रुवल
  • सिडबी द्धारा सब्सिडी सेंग्शन एवं अनुदान वितरण
  • एवं हितग्राही के बैंक खाते में सब्सिडी का जमा होना

इस योजना में अनुदान 2 बराबर किस्तों में जारी किया जावेगा।

  1. पहला किस्त योजना के शुरूवात में प्रोजेक्ट एप्रुवल के बाद दिया जावेगा
  2. अनुदान का दूसरा किस्त प्रोजेक्ट के खत्म होने एवं राज्य क्रियान्वयन इकाई द्धारा मूल्यांकन एवं निर्धारित फार्मेट में सेटिसफेक्टरी रिर्पाेट देने के बाद जारी किया जावेगा।
  3. हितग्राही को बैंक में बचत खाता खोलना होगा, जिसमें अनुदान की राशि जमा होगी, न की बैंक लोन एकाउंट में।

योजना के संबंध में अधिक जानकारी के लिये डा. रामचंद्र रामटेके (9329583360) एवं डा. पराग बंसोड ( 9407676600) या मुख्य कार्यपालन अधिकारी, कार्यालय छ.ग.राज्य पशुधन विकास अभिकरण, राज्य स्तरीय पशु चिकित्सालय, पंडरी रायपुर में भी संपर्क किया जा सकता है।

डॉ. रामचंद्र रामटेके
सहायक प्राध्यापक, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविदयालय,अंजोरा,दुर्ग
डा. पराग बंसोड
वी.ए.एस.
डा. लक्ष्मी अजगल्ले
मुख्य कार्यपालन अधिकारी छ.ग.राज्य पशुधन विकास अभिकरण, रायपुर

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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