सफलता की कहानी

पैडी डायवर्सन मॉडल से बदली किसानों की तकदीर

धान की जगह औषधीय खेती से छत्तीसगढ़ के 147 किसान बने आत्मनिर्भर

छत्तीसगढ़ शासन के छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की अभिनव पहल ‘पैडी डायवर्सन मॉडल’ किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त कर रही है। पारंपरिक धान की खेती में बढ़ती लागत और सीमित लाभ से जूझ रहे कृषकों के लिए यह योजना एक बेहद सफल और व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरी है। इस मॉडल के अंतर्गत किसानों को धान के स्थान पर औषधीय पौधों वच और ब्राह्मी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके परिणामस्वरूप किसान अब कम लागत में अधिक आय अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं।पैडी डायवर्सन मॉडल से बदली किसानों की तकदीर

23 गांवों के 147 किसानों ने अपनाया नया मॉडल

बोर्ड की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत धमतरी, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और रायपुर जिले के 23 गांवों को शामिल किया गया है। इन जिलों के 147 किसानों ने कुल 65 एकड़ भूमि पर पारंपरिक खेती को छोड़कर औषधीय फसलें उगाने में सफलता हासिल की है। वच की खेती 63 किसानों द्वारा 39 एकड़ क्षेत्र में और ब्राह्मी का उत्पादन 84 किसानों द्वारा 26 एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है। यह अभूतपूर्व बदलाव उन क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहां पहले किसान केवल और केवल धान की खेती पर निर्भर थे।पैडी डायवर्सन मॉडल से बदली किसानों की तकदीर

 धमतरी जिला बना सफलता का रोल मॉडल

इस योजना के क्रियान्वयन और सफलता में धमतरी जिला सबसे अग्रणी रहा है। धमतरी के 16 गांवों के 90 किसानों ने 27.50 एकड़ भूमि पर वच और ब्राह्मी की खेती कर रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है। रायपुर जिले के 2 गांवों के 35 किसानों ने भी 11.50 एकड़ में औषधीय खेती अपनाकर शानदार लाभ अर्जित किया है। इसके अतिरिक्त नारायणपुर, कोंडागांव और बस्तर जैसे आदिवासी बहुल व सुदूर क्षेत्रों के किसानों ने भी इस मॉडल को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

कम लागत, कई गुना अधिक मुनाफा

पैडी डायवर्सन मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता न्यूनतम निवेश में अधिकतम रिटर्न सुनिश्चित करना है। आंकड़े इसकी सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। छत्तीसगढ़ शासन की यह दूरदर्शी पहल राज्य में औषधीय संपदा को सहेजने के साथ-साथ किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

विवरण अनुमानित आंकड़े

प्रति एकड़ खेती की कुल लागत लगभग 20 हजार एक वर्ष में ओर शुद्ध लाभ लगभग एक लाख रूपए। पारंपरिक धान की खेती की तुलना में औषधीय पौधों की इस जोड़ी वच और ब्राह्मी से किसानों को कई गुना अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

बोर्ड द्वारा मिल रहा है एंड-टू-एंड सहयोग

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड किसानों को केवल प्रोत्साहित ही नहीं कर रहा, बल्कि हर स्तर पर मजबूत तकनीकी और व्यावहारिक बैकअप दे रहा है।

निःशुल्क सामग्री और एक्सपोजर विजिट

किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले औषधीय पौधे पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। किसानों वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए उन्हें सफल खेतों का एक्सपोजर विजिट कराया जाता है।
बाजार की सुनिश्चितता

तैयार उत्पाद की शत-प्रतिशत खरीदी के लिए अनुबंधित संस्थाओं के माध्यम से पुख्ता व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है। आत्मनिर्भरता का नया अध्याय ‘पैडी डायवर्सन मॉडल’ ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध हो, तो कृषि को बेहद मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है। आज इस योजना से जुड़े किसान न केवल खुद आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं, बल्कि अन्य पारंपरिक किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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