आधुनिक कृषि की ओर बदलाव: किसान व्यवहार परिवर्तन में विस्तार शिक्षा का योगदान
डॉ. ईशांत कुमार सुकदेवे एवं डॉ. हेम प्रकाश वर्मा


प्रस्तावना : भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ आज भी बड़ी जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र में निरंतर विकास और उत्पादन वृद्धि के लिए केवल नई तकनीकों का विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन तकनीकों को किसानों तक पहुँचाना और उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करना भी अत्यंत आवश्यक है। यही कार्य कृषि विस्तार शिक्षा द्वारा किया जाता है। विस्तार शिक्षा किसानों के ज्ञान, दृष्टिकोण एवं व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाकर कृषि विकास को गति प्रदान करती है। किसान व्यवहार परिवर्तन कृषि विस्तार का मुख्य उद्देश्य है, क्योंकि किसी भी नई तकनीक या नवाचार को सफल बनाने के लिए किसानों का व्यवहारिक परिवर्तन आवश्यक होता है।
विस्तार शिक्षा का अर्थ एवं महत्व
विस्तार शिक्षा एक ऐसी शैक्षिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, आधुनिक संसाधनों एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि किसानों के सोचने, निर्णय लेने तथा कार्य करने के तरीके में परिवर्तन लाना है। विस्तार शिक्षा किसानों को आत्मनिर्भर, जागरूक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
कृषि विस्तार शिक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षा, रूढ़िवादिता, संसाधनों की कमी तथा पारंपरिक सोच के कारण किसान नई तकनीकों को अपनाने में संकोच करते हैं। विस्तार शिक्षा इन बाधाओं को दूर कर किसानों में आत्मविश्वास उत्पन्न करती है।
- औपचारिक विस्तार शिक्षा
औपचारिक विस्तार शिक्षा वह शिक्षा है जो किसी निर्धारित पाठ्यक्रम, निश्चित समय तथा संस्थागत व्यवस्था के अंतर्गत प्रदान की जाती है। यह शिक्षा मुख्य रूप से कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि महाविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों एवं शोध केंद्रों द्वारा दी जाती है। इसका उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं एवं कृषि से जुड़े व्यक्तियों को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक ज्ञान प्रदान करना होता है। इस प्रकार की शिक्षा में प्रशिक्षण, परीक्षा तथा प्रमाणपत्र की व्यवस्था भी होती है, जिससे शिक्षार्थियों की दक्षता का मूल्यांकन किया जा सके।
- अनौपचारिक विस्तार शिक्षा
अनौपचारिक विस्तार शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसमें किसान बिना किसी निश्चित पाठ्यक्रम या परीक्षा के अपने दैनिक जीवन, अनुभवों एवं सामाजिक संपर्कों के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करते हैं। इसमें रेडियो, दूरदर्शन, समाचार पत्र, किसान मेले, प्रदर्शनियाँ एवं सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य किसानों में जागरूकता उत्पन्न करना तथा उन्हें नई कृषि तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी देना होता है।
- गैर-औपचारिक विस्तार शिक्षा
गैर-औपचारिक विस्तार शिक्षा औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा के बीच की प्रणाली है, जिसमें किसानों को उनकी आवश्यकता एवं सुविधा के अनुसार व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसमें किसान प्रशिक्षण शिविर, कृषि विज्ञान केंद्रों के कार्यक्रम, फसल प्रदर्शन एवं कार्यशालाएँ शामिल होती हैं। इस प्रकार की शिक्षा किसानों के कौशल विकास, समस्या समाधान एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

किसान व्यवहार परिवर्तन की अवधारणा
व्यवहार परिवर्तन का अर्थ है किसी व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण तथा कार्य करने के तरीके में सकारात्मक बदलाव आना। कृषि के संदर्भ में जब किसान पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने लगते हैं तो इसे किसान व्यवहार परिवर्तन कहा जाता है।
यह परिवर्तन धीरे-धीरे होता है और इसमें कई चरण शामिल होते हैं जैसे— जागरूकता, रुचि, मूल्यांकन, परीक्षण तथा स्वीकृति। विस्तार शिक्षा इन सभी चरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी किसान को उन्नत बीजों, जैविक खेती या ड्रिप सिंचाई के लाभों की जानकारी दी जाती है और वह उन्हें अपनाकर उत्पादन बढ़ाता है, तो यह व्यवहार परिवर्तन का उदाहरण है।
व्यवहार परिवर्तन में विस्तार शिक्षा की भूमिका
- ज्ञान एवं जागरूकता का विकास
विस्तार शिक्षा किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, उर्वरकों, कीट प्रबंधन एवं जल संरक्षण तकनीकों की जानकारी प्रदान करती है। जब किसान नई तकनीकों के लाभों को समझते हैं, तब वे उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। ज्ञान व्यवहार परिवर्तन की पहली सीढ़ी है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास
ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान परंपरागत मान्यताओं एवं अनुभवों के आधार पर खेती करते हैं। विस्तार शिक्षा किसानों में वैज्ञानिक सोच विकसित करती है, जिससे वे तर्कसंगत निर्णय लेने लगते हैं। इससे अंधविश्वास एवं गलत कृषि पद्धतियों में कमी आती है।
- नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरणा
कृषि विस्तार कार्यकर्ता प्रदर्शन, प्रशिक्षण, किसान मेले एवं भ्रमण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों के लाभों का प्रत्यक्ष अनुभव कराते हैं। जब किसान किसी अन्य किसान की सफलता देखते हैं, तो वे भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
- निर्णय क्षमता का विकास
विस्तार शिक्षा किसानों को समस्याओं का विश्लेषण करना तथा उचित निर्णय लेना सिखाती है। इससे किसान अपनी भूमि, जलवायु एवं संसाधनों के अनुसार उपयुक्त कृषि तकनीकों का चयन कर पाते हैं।
- सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन
व्यवहार परिवर्तन केवल खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उत्पादन एवं आय में वृद्धि होती है, जिससे किसानों का जीवन स्तर बेहतर होता है।
- नेतृत्व एवं सहभागिता का विकास
विस्तार शिक्षा ग्रामीण युवाओं एवं प्रगतिशील किसानों में नेतृत्व क्षमता विकसित करती है। ऐसे किसान अन्य किसानों को भी प्रेरित करते हैं और गाँव में नवाचारों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत के कुछ प्रमुख उदाहरण
- हरित क्रांति
भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति के दौरान कृषि विस्तार शिक्षा ने किसानों के व्यवहार परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक एवं सिंचाई तकनीकों को किसानों तक पहुँचाया गया। प्रारंभ में किसान नई तकनीकों को अपनाने में संकोच कर रहे थे, लेकिन प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं विस्तार सेवाओं के माध्यम से किसानों ने आधुनिक खेती को अपनाया और गेहूँ तथा धान उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई।
- कृषि विज्ञान केंद्र का योगदान
भारत के विभिन्न राज्यों में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन एवं तकनीकी सलाह प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के कई जिलों में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को जैविक खेती, मशरूम उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे किसानों की आय एवं कृषि के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन आया।
- डिजिटल कृषि विस्तार –
आईटीसी लिमिटेड के द्वारा शुरू की गई “ई-चौपाल” पहल किसानों के व्यवहार परिवर्तन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को इंटरनेट आधारित जानकारी, बाजार भाव, मौसम पूर्वानुमान एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई गई। इससे किसानों में वैज्ञानिक सोच विकसित हुई तथा उनका निर्णय लेने के तरीकों में भी बदलाव आया।
- महिला स्वयं सहायता समूह
भारत के कई राज्यों में महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि विस्तार शिक्षा से जोड़ा गया। प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं ने पोषण बागवानी, डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्य अपनाए। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
- जैविक खेती – सिक्किम मॉडल
सिक्किम भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य बना। यह सफलता किसानों के व्यवहार परिवर्तन एवं प्रभावी विस्तार शिक्षा का परिणाम है। सरकार एवं विस्तार एजेंसियों द्वारा किसानों को जैविक खेती के लाभों एवं तकनीकों की निरंतर जानकारी दी गई।
व्यवहार परिवर्तन के प्रमुख साधन
कृषि विस्तार शिक्षा में विभिन्न संचार माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिनके माध्यम से किसानों तक जानकारी पहुँचाई जाती है। इनमें व्यक्तिगत संपर्क, समूह चर्चा, किसान प्रशिक्षण, प्रदर्शन विधि, रेडियो, दूरदर्शन, मोबाइल एप्स, सोशल मीडिया एवं कृषि विज्ञान केंद्रों की गतिविधियाँ प्रमुख हैं। वर्तमान समय में डिजिटल कृषि विस्तार सेवाएँ भी व्यवहार परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
व्यवहार परिवर्तन में आने वाली बाधाएँ
हालाँकि विस्तार शिक्षा किसानों के व्यवहार परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, फिर भी कई बाधाएँ इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। अशिक्षा, आर्थिक कमजोरी, संसाधनों की कमी, जोखिम उठाने का भय, परंपरागत सोच तथा तकनीकी जानकारी की कमी प्रमुख समस्याएँ हैं। इसके अतिरिक्त कई बार विस्तार सेवाएँ ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँच पातीं।
सुधार के लिए सुझाव
किसानों के व्यवहार परिवर्तन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है कि विस्तार सेवाओं को अधिक व्यावहारिक एवं किसान-केंद्रित बनाया जाए। स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण, डिजिटल माध्यमों का उपयोग, महिला किसानों की सहभागिता, युवा किसानों को प्रोत्साहन तथा कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। साथ ही, सफल किसानों के उदाहरण प्रस्तुत करके अन्य किसानों को प्रेरित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
कृषि विकास एवं ग्रामीण समृद्धि के लिए किसान व्यवहार परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है और इस परिवर्तन में विस्तार शिक्षा की भूमिका केंद्रीय एवं प्रभावशाली है। विस्तार शिक्षा किसानों को केवल नई जानकारी ही नहीं देती, बल्कि उनके दृष्टिकोण, निर्णय क्षमता एवं कार्यशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाती है। आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार, उत्पादन वृद्धि, आय संवर्धन तथा सतत कृषि विकास के लिए प्रभावी कृषि विस्तार शिक्षा अनिवार्य है। इसलिए कृषि विस्तार प्रणाली को अधिक मजबूत, आधुनिक एवं किसानोन्मुख बनाना समय की आवश्यकता है।
लेखक :
डॉ ईशांत कुमार सुकदेवे, विषय वस्तु विषय, कृषि विस्तार, कृषि विज्ञान केंद्र, दंतेवाड़ा, छ.ग.
डॉ हेम प्रकाश वर्मा, एस आर एफ (FFP), रा. जै. स्ट्रै. प्र. सं. बरौंडा, रायपुर, छ.ग.









