कृषि एवम संबद्ध क्षेत्र
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Jun- 2026 -3 June
बस्तर के सामाजिक- आर्थिक रूपांतरण में महिला जनित ‘श्वेत क्रांति’ की भूमिका
किसी भी विकासशील ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन, विशेषकर डेयरी क्षेत्र, आजीविका सुरक्षा और कुपोषण उन्मूलन का एक सशक्त माध्यम होता…
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May- 2026 -29 May
आधुनिक कृषि की ओर बदलाव: किसान व्यवहार परिवर्तन में विस्तार शिक्षा का योगदान
प्रस्तावना : भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ आज भी बड़ी जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।…
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28 May
प्रोबायोटिक्स: छत्तीसगढ़ की डेयरी क्रांति का नया वैज्ञानिक हथियार
प्रस्तावना : छत्तीसगढ़ एक कृषि एवं पशुपालन प्रधान राज्य है, जहाँ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय आजीविका का एक महत्वपूर्ण…
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27 May
धान की खेती के विकल्प के रूप में औषधीय पौधों की खेती अपनाने के लिए किसान प्रेरित
रायपुर, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के परिसर…
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25 May
खरीफ 2026 सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण के नए दिशा-निर्देश जारी, संतुलित उपयोग को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर, 25 मई 2026 : राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण संबंधी नवीन…
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24 May
सबको बदलना जरूरी नहीं लेट देम सिद्धांत की नई सोच- किसानों और पशु चिकित्सकों के लिए मानसिक संतुलन, धैर्य और सफलता का आधुनिक दर्शन
प्रस्तावना : आज की तेज और तनावपूर्ण जीवनशैली में एक लोकप्रिय मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक विचार बनकर उभरी है। इसका मूल…
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23 May
जशपुर के सेब से बदल रही किसानों की तकदीर
रायपुर, 23 मई 2026 : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में किसानों को पारंपरिक खेती…
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23 May
छत्तीसगढ़ के बस्तर में आजीविका सृजन और पोषण सुरक्षा के लिए शूकर पालन का महत्व
बस्तर भारत के छत्तीसगढ़ राज्य का एक प्रमुख आदिवासी क्षेत्र है। बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन…
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22 May
भारत में गुड़ उत्पादन एवं प्रसंस्करण
भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से ज़्यादा गुड़ का उत्पादन करता है, जिससे वह प्राकृतिक मिठास के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश के गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20–30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है, जिससे लगभग 25 लाख ग्रामीण लोगों को आजीविका मिली हुई है। इस क्षेत्र में निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2015–16 से 2024–25 के बीच गुड़ के निर्यात के मूल्य में 106.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का संकेत है। आयरन, मिनरल्स और जरूरी माइक्रो–न्यूट्रिएंट्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण, गुड़ रिफाइंड चीनी का एक ज़्यादा सेहतमंद विकल्प है। इस बढ़ोतरी को और बढ़ावा देने के लिए, सरकार की कई योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना और एक जिला एक उत्पाद के साथ–साथ जीआई टैगिंग भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ये योजनाएं उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद कर रही हैं। भारत में गुड़ सेक्टर: उत्पादन, महत्व और आजीविका गुड़, एक पारंपरिक, बिना रिफाइन किया…
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20 May
जैविक डेयरी फार्मिंग : संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ
प्रस्तावना 21वीं सदी में जब रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं, तो जैविक डेयरी फार्मिंग…
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