कंपनी समाचार

धान में पैनिकल विकास और उपज क्षमता को सुदृढ़ करने में Rhodophyta आधारित TAG K20 की भूमिका

अधिवक्ता राजीव सिंह शिशोदिया उप क्षेत्रीय प्रबंधक, ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम (इं.) प्रा. लि., चेन्नई

धान की अधिक उपज का आधार केवल पौधे की हरियाली नहीं, बल्कि मजबूत पैनिकल और प्रभावी Grain Filling है।

धान की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले अनेक कारकों में पोषण प्रबंधन का विशेष स्थान है। सामान्यतः किसान फसल की वृद्धि को पौधे की ऊँचाई, हरापन और टिलर संख्या से आंकते हैं, लेकिन वास्तविक उपज क्षमता का निर्णायक चरण reproductive development (प्रजनन विकास) से शुरू होता है।

धान में Panicle Initiation से लेकर Booting, Flowering, Grain Setting और Grain Filling तक का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसी अवधि में पौधा अपनी उपलब्ध ऊर्जा और पोषक तत्वों को vegetative growth से reproductive organs अर्थात पैनिकल और दानों की ओर स्थानांतरित करता है। इसे वैज्ञानिक रूप से Source-to-Sink relationship के रूप में समझा जा सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया में Potash (K) और Sulphur (S) जैसे पोषक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी दृष्टिकोण से Rhodophyta आधारित TAG K20, जिसमें 20% Potash और 1.5% Sulphur के साथ अन्य सक्रिय घटक तथा TURGE Technology का समावेश है, धान की reproductive growth और panicle development के लिए एक महत्वपूर्ण पोषण विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।

1. Rhodophyta – समुद्री लाल शैवाल से कृषि पोषण तक

Rhodophyta समुद्री लाल शैवाल (Red Algae) का एक प्रमुख समूह है। समुद्री जैव संसाधनों में पाए जाने वाले ऐसे algae में विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक जैव-सक्रिय घटक पाए जाते हैं।

कृषि में algae-derived products का उपयोग पौधे की physiological activity, nutrient utilization तथा stress management को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। Rhodophyta आधारित formulations का महत्व केवल पोषक तत्व उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इनका उद्देश्य पौधे की physiological processes को बेहतर ढंग से support करना भी हो सकता है, विशेषकर उन growth stages में जब crop को reproductive development के लिए अधिक प्रभावी पोषण की आवश्यकता होती है।

TAG K20 की विशेषता

प्रमुख घटक मात्रा कृषि में संभावित महत्व
Potash (K) 20% जल संतुलन, enzyme activity, assimilate movement एवं grain development में महत्वपूर्ण
Sulphur (S) 1.5% amino acids, proteins एवं metabolic processes में योगदान
Rhodophyta – physiological support एवं crop performance को support करने की दिशा में

2. Potash धान में केवल “पोटाश” नहीं, बल्कि physiological regulator

पौधे में Potassium (K) की भूमिका बहुआयामी है। यह किसी एक biochemical process तक सीमित नहीं रहता। Potassium पौधे में water relations, stomatal regulation, enzyme activation, photosynthetic performance तथा assimilate transport जैसी अनेक प्रक्रियाओं से जुड़ा है।

धान की reproductive stage में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय पौधे को पत्तियों में निर्मित carbohydrates तथा अन्य assimilates को विकसित हो रहे reproductive organs तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना होता है। इसी को Source-to-Sink movement के संदर्भ में समझा जा सकता है।

Source: मुख्यतः सक्रिय हरी पत्तियाँ, जहाँ photosynthesis द्वारा assimilates बनते हैं.
Sink: विकसित होता panicle, फूल, fertilized grains तथा बाद में developing grains

एक स्वस्थ crop में Source की photosynthetic क्षमता और Sink की assimilate मांग के बीच संतुलन उपज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।

3. 1.5% Sulphur – प्रोटीन निर्माण और metabolic activity

Sulphur पौधों के लिए आवश्यक secondary nutrient है। यह कुछ महत्वपूर्ण amino acids तथा proteins के निर्माण से जुड़ा है और पौधे की अनेक metabolic प्रक्रियाओं में योगदान देता है।

धान की reproductive growth के दौरान पौधे की metabolic demand बदलती रहती है। इसलिए Potash के साथ Sulphur की उपलब्धता crop nutrition को अधिक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है। TAG K20 में 20% Potash के साथ 1.5% Sulphur का संयोजन इसी nutritional perspective को ध्यान में रखता है।

4. TURGE Technology – physiological efficiency की दिशा

TAG K20 की TURGE Technology को केवल nutrient supply के रूप में देखने के बजाय crop physiological performance के संदर्भ में समझना अधिक उपयोगी है।

धान में किसी nutrient की उपलब्धता तभी प्रभावी परिणाम दे सकती है जब पौधा उसे उचित समय पर उपयोग कर सके। इसलिए crop stage, nutrient demand और physiological activity के बीच synchronization महत्वपूर्ण है। TURGE Technology आधारित TAG K20 का agronomic उद्देश्य crop के महत्वपूर्ण reproductive phases में nutrient utilization एवं physiological activity को support करना है।

5. Panicle Initiation उपज निर्माण की निर्णायक शुरुआत

धान में Panicle Initiation (PI) वह महत्वपूर्ण अवस्था है जहाँ पौधे का growth pattern vegetative development से reproductive development की ओर स्पष्ट रूप से बदलना शुरू करता है। इस चरण में बनने वाला panicle आगे चलकर spikelets और grains की संख्या निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Panicle Initiation पर ध्यान क्यों?
reproductive development की शुरुआत
nanicle structure का विकास

6. Booting Stage – पैनिकल की सुरक्षा और विकास का संवेदनशील चरण

Panicle Initiation के बाद विकसित होता panicle flag leaf sheath के अंदर बढ़ता है। इस अवस्था को सामान्यतः Booting Stage कहा जाता है।

यह चरण अत्यंत संवेदनशील होता है क्योंकि developing panicle को पर्याप्त पोषण एवं physiological support की आवश्यकता होती है। इस समय Panicle Development Spikelet Development Flowering की तैयारी जैसी प्रक्रियाएँ तेजी से आगे बढ़ती हैं। Potassium की भूमिका यहाँ plant water relations, enzyme activity तथा assimilate movement के संदर्भमें महत्वपूर्ण हो सकती है।

7. Flowering और Grain Setting • उपज का वास्तविक निर्धारण
Flowering के दौरान anthesis और fertilization की प्रक्रिया होती है। इसके बाद fertilized florets से grains का विकास प्रारंभहोता है। लेकिन अधिक panicle होना अपने आप में अधिक उपज की गारंटी नहीं है।

उपज के लिए आवश्यक हैः
Effective Panicles × Filled Grains per Panicle × Grain Weight

इसलिए Grain Setting और उसके बाद होने वाला Grain Filling अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि panicle में पर्याप्त spikelets बनने के बाद उनमें से अधिक संख्या सफलतापूर्वक grains में विकसित होती है और grains अच्छी तरह भरते हैं, तो yield potential का बेहतर उपयोग संभव होता है।

8. Grain Filling Source-to-Sink की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा

Grain Filling के दौरान developing grain एक मजबूत Sink की तरह कार्य करता है। वहीं mature green leaves तथा अन्य photosynthetically active tissues Source का कार्य करते हैं।

Source
Photosynthesis
↓
Carbohydrates /Assimilates
—> Transport

Assimilate Movement

—> Sink
Developing Grain
↓
Grain Weight

 

इस पूरी प्रक्रिया में Potassium का physiological महत्व इसलिए है क्योंकि यह plant water relations, enzyme systems और assimilate transport से संबंधित अनेक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। अतः Grain Filling stage में balanced nutrition का उद्देश्य केवल पत्तियों को हरा रखना नहीं, बल्कि उपलब्ध assimilates के प्रभावी उपयोग और grain development को support करना होना चाहिए।

9. TAG K20 और धान में Panicle Development – एक समग्र दृष्टिकोण

TAG K20 को धान में केवल Potash source के रूप में देखने के बजाय Rhodophyta + Potash + Sulphur + TURGE Technology के संयुक्त formulation concept के रूप में देखा जा सकता है। इसका agronomic focus crop के महत्वपूर्ण reproductive phases में होना चाहिए:

Crop Stage प्रमुख physiological घटना Nutritional Focus
Panicle Initiation reproductive development शुरू Panicle development support
Booting panicle sheath के अंदर तेजी से विकास Nutrient utilization एवं physiological support
Flowering anthesis एवं fertilization Reproductive performance
Grain Setting fertilized grains का प्रारंभिक विकास Sink establishment
Grain Filling grain में assimilate accumulation Grain weight एवं filling support

10. अधिक उपज की दिशा “पौधा बड़ा” नहीं, “उपज घटक बेहतर”

आधुनिक धान उत्पादन में केवल पौधे की vegetative growth पर जोर देना पर्याप्त नहीं है। एक productive crop के लिए आवश्यक है कि विकास सही दिशा में हो।

अच्छा tillering
↓
सशक्त Panicle Initiation
↓
अच्छा Panicle Development
↓
पर्याप्त Spikelets
↓
बेहतर Grain Setting
↓
प्रभावी Grain Filling

11. TAG K20 का कृषि-दृष्टिकोण

TAG K20 में 20% Potash और 1.5% Sulphur के साथ Rhodophyta आधारित formulation तथा TURGE Technology का संयोजन इसे धान की reproductive growth पर केंद्रित nutritional approach प्रदान करता है।

“Panicle को मजबूत आधार दें, Source-to-Sink प्रक्रिया को support करें और Grain Filling की क्षमता को बेहतर दिशा दें।”

हालाँकि किसी भी crop input का वास्तविक प्रदर्शन मिट्टी की उर्वरता, मौसम, किस्म, फसल प्रबंधन, irrigation, पहले से उपलब्ध पोषक तत्वों तथा अन्य agronomic practices पर निर्भर करता है। इसलिए TAG K20 का उपयोग soil test, crop stage और स्थानीय agronomic recommendations के अनुरूप करना अधिक उपयुक्त है।

निष्कर्ष

धान की अधिक उपज केवल अधिक पौधों या अधिक हरित पत्तियों का परिणाम नहीं है। वास्तविक yield formation एक क्रमबद्ध physiological process है, जिसकी महत्वपूर्ण कड़ियाँ Panicle Initiation, Booting, Flowering, Grain Setting और Grain Filling से जुड़ी हैं।
इन stages में पौधे को Potash और Sulphur जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की संतुलित उपलब्धता के साथ बेहतर physiological support की आवश्यकता होती है। Rhodophyta आधारित TAG K20, जिसमें 20% Potash + 1.5% Sulphur तथा TURGE Technology का संयोजन है, इसी reproductive-stage nutrition के दृष्टिकोण को केंद्र में रखता है।

अंततः लक्ष्य केवल एक “हरा-भरा पौधा” नहीं, बल्कि –

सशक्त Panicle
↓
बेहतर Grain Setting
↓
प्रभावी Grain Filling
↓
अधिक Filled Grains
↓
बेहतर Rice Yield

यही आधुनिक धान पोषण प्रबंधन की दिशा है- Vegetative Growth से आगे बढ़कर Reproductive Efficiency और Yield Formation पर ध्यान देना।

 

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

Related Articles

Back to top button