सफलता की कहानी

मूंग की उन्नत किस्म GAM-5 से बदलेगी क्षेत्र के किसानों की तकदीर

कम लागत में बेहतर आय

छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग और छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा किसानों को प्रमाणित उन्नत बीजों की मिनी-किट निःशुल्क प्रदान की जाती है। जीएएम-5 (GAM-5) मूंग की एक बेहतरीन और अत्यधिक उपज देने वाली किस्म है जो 60-65 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और पीले मोज़ेक (YMW) रोग के प्रति प्रतिरोधी है। मूंग की बुवाई को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर प्रमाणित मूंग बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग की आत्मा योजना के अंतर्गत क्षेत्र के किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ने तथा उन्नत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में अंबिकापुर में एक स्थानीय किसान ने कृषि विभाग के सहयोग से मूंग की उन्नत बुवाई कर क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है।

’निःशुल्क बीज और मिला तकनीकी मार्गदर्शन’
आत्मा योजना के तहत एटीएम (कृषि तकनीकी प्रबंधक) अंजू आदिले एवं बीटीएम (ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक) कंचन कुशवाहा द्वारा किसान को मूंग की उन्नत किस्म जीएएम-5 (GAM-5) का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। विभागीय अधिकारियों की देखरेख में किसान ने अपने खेत में पंक्तिबद्ध (लाइन सोइंग) पद्धति से इसकी बुवाई संपन्न की। बुवाई के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसान को खेत की तैयारी, बीज उपचार, उचित दूरी पर बुवाई तथा फसल प्रबंधन के संबंध में गहन तकनीकी जानकारी भी साझा की।

’परंपरागत खेती से बेहतर है लाइन सोइंग पद्धति’
अनुभव साझा करते हुए किसान ने बताया कि परंपरागत खेती (छिटकवां पद्धति) की तुलना में लाइन सोइंग पद्धति कहीं अधिक लाभकारी है। इस आधुनिक तकनीक से पौधों का समान और संतुलित विकास होता है। फसल की देखरेख और निराई-गुड़ाई आसान हो जाती है। पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे कीट एवं रोगों का प्रकोप होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। किसान ने उम्मीद जताई है कि इस तकनीक से फसल के उत्पादन और गुणवत्ता, दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

’कम लागत में बेहतर आय का जरिया’
मूंग एक ऐसी दलहनी फसल है जो बहुत ही कम अवधि में तैयार हो जाती है। इसमें लागत कम आती है, लेकिन यह किसानों को बेहतर आय देने की पूरी क्षमता रखती है। किसान के अनुसार, आत्मा योजना के माध्यम से निःशुल्क उन्नत बीज और समय पर तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उनमें आधुनिक खेती को अपनाने का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किसान ने कहा कि अधिकारियों के निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के कारण क्षेत्र के अन्य किसान भी नई कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि यह पहल आने वाले समय में क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत साबित होगी।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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