सफलता की कहानी

डॉ. आरती साठे — प्रकृति, विज्ञान और समाज सेवा का प्रेरक व्यक्तित्व

डॉ. आरती साठे आज एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने अपने कार्य, समर्पण और नवाचार से केवल शहर या देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। उनके कार्यों की चर्चा भारत के साथ-साथ फ्लोरिडा, कतर जैसे देशों तक पहुँच चुकी है। उन्हें हजारों राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त हो चुके हैं तथा उनके साथ लगभग डेढ़ लाख सदस्यों का व्यापक सामाजिक एवं प्रशिक्षण नेटवर्क जुड़ा हुआ है।

विज्ञान विषय में शिक्षा पूर्ण करने के बाद डॉ. आरती ने मेडिकल कॉलेज में एनाटॉमी की सहायक प्राध्यापिका के रूप में कार्य किया। इसके साथ उन्होंने समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री, बैचलर ऑफ जर्नलिज्म तथा फाइन आर्ट जैसे विषयों में भी उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त कीं और गोल्ड मेडल अर्जित किए।

बचपन से ही उन्हें जंगल, प्राकृतिक वातावरण, जनजातीय जीवन, पक्षियों की आवाज़ और ग्रामीण संस्कृति आकर्षित करती रही। लगभग 18–19 वर्ष पूर्व जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर उन्होंने समाज, प्रकृति और ग्रामीण विकास को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और एक नए सफर की शुरुआत की। उस समय इस क्षेत्र में वे प्रदेश की चुनिंदा महिलाओं में से थीं।आज ये सफर डेढ़ लाख सदस्यों के समूह साथ पूरे भारत वर्ष के से जुड़ा हुआ है ,

डॉ. आरती ने आदिवासी एवं वन क्षेत्रों में जाकर समुदायों के साथ प्रत्यक्ष कार्य किया। उन्होंने लोगों को सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और पर्यावरणीय विषयों पर प्रशिक्षण दिया तथा महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • जैव विविधता आधारित प्राकृतिक कृषि एवं बागवानी पर 3000 से अधिक कार्यशालाओं का सफल आयोजन।
  • ग्रह मंडल, सौर चक्र एवं प्राकृतिक ऊर्जा सिद्धांतों के आधार पर बागवानी प्रशिक्षण की विशिष्ट कार्यप्रणाली विकसित की।इसमें वैदिक पद्धति से लेकर वैज्ञानिक तथ्यों तक प्रमुख आधार है,
  • केवल लगभग 900 वर्गफुट क्षेत्र में 74 प्रकार की साग-सब्जी, फल, फूल, मसाले एवं औषधीय पौधों का सफल मॉडल विकसित किया।
  • इस मॉडल का अध्ययन विदेशी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा भी किया गया तथा भारत के कई विश्वविद्यालयों ने इसे अपनाने में रुचि दिखाई।
  • कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में युवाओं हेतु बागवानी आधारित स्टार्टअप एवं उद्यमिता कार्यक्रम संचालित किए।
  • पूरे भारत में किचन गार्डन, टेरेस गार्डन एवं जैव विविधता विषयों पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण।
  • स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति और जैव विविधता आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण ,उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन तक मार्गदर्शन देकर आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान,
  • औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, अरोमा थेरेपी एवं सुगंध विज्ञान के क्षेत्र में विशेष कार्य।
  • महिला समूहों के माध्यम से लगभग ढाई लाख औषधीय पौधों का रोपण एवं आय आधारित मॉडल विकसित।
  • वन प्रबंधन समिति के साथ मिलकर विगत 17 वर्षों से औषधीय सुगंधित पौधों पर कार्य ,
  • जंगलों में स्टॉप डेम और जल सत्मरक्षण पर कार्य
  • प्राकृतिक कृषि किसान समूहों का संचालन एवं विपणन सहयोग।
  • देसी बीज बैंक निर्माण संरक्षण संवर्धन अभियान में उल्लेखनीय योगदान ,
  • कोसी कलन प्रोजेक्ट में बीजों के लिए G 20 में चयन,और राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार विलक्षण देसी बीजों के संवर्धन के लिए,
  • देसी धान एवं बहु फसलों के संरक्षण परियोजनाओं से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान।
  • देसी गौशाला प्रबंधन, प्रशिक्षण, उत्पाद विक्रय और कार्यशाला,
  • बांस आधारित कृषि एवं इको-पर्यटन मॉडल पर कार्य।
  • भूटान, सिक्किम, असम सहित विभिन्न क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के साथ पारंपरिक संस्कृति एवं प्रकृति आधारित विकास कार्य।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहभागिता।
  • बच्चों की निःशुल्क शिक्षा, नशा मुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता एवं सामाजिक सेवा में निरंतर योगदान।
  • संघ की पर्यावरण संरक्षण संस्था का छत्तीसगढ़ राज्य स्तर पर नेतृत्व ,वृक्षारोपण पर सक्रिय अभियान,
  • संघ के साथ हरित गृह निर्माण,कचरा प्रबंधन,छत पर बागवानी पर कार्य
  • वन क्षेत्र और आदिवासी महिलाओं विशेष कर युवाओं को हस्त निर्मित कपड़े और कोसा कार्य के लिए सहयोग
  • विभिन्न राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

डॉ. आरती साठे का मानना है कि प्रकृति स्वयं एक संपूर्ण व्यवस्था है और यदि वैज्ञानिक समझ के साथ प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाए तो समाज, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सकता है।

आज डॉ. आरती साठे विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से समाज सेवा, प्रकृति संरक्षण और जन उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत हैं तथा उनके योगदान ने उन्हें एक प्रेरक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है।

संलग्न संस्थाएँ:

  • भारत मंडपम योजना
  • सार्थक पहल वेलफेयर सोसाइटी
  • सूर्या बायो डायवर्सिटी फर्म
  • प्रभात फाउंडेशन ग्रुप
  • राष्ट्रीय ग्राम उत्थान संघ

संपर्क:
ईमेल: aartisathe2013@gmail.com
मो.: 9981881201

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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