पशुपालन

सिल्वोपास्चर प्रणाली का डेयरी गायों में हीट स्ट्रेस, पशु कल्याण एवं दुग्ध उत्पादन पर प्रभाव: छत्तीसगढ़ का एक अध्ययन

डॉ चित्रलेखा देव, डॉ तरुण साहू, डॉ स्वर्णलता बारा

सारांश (Abstract) : जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ते तापमान के कारण डेयरी पशुओं में हीट स्ट्रेस (Heat Stress) एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। हीट स्ट्रेस से दुग्ध उत्पादन, प्रजनन क्षमता, रोग प्रतिरोधकता एवं पशु कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सिल्वोपास्चर प्रणाली (Silvopastoral System) में वृक्ष, चारा फसल एवं पशुपालन को एकीकृत रूप से अपनाया जाता है। वृक्षों की छाया पशुओं को प्राकृतिक शीतलन प्रदान करती है, जिससे शरीर का तापमान, श्वसन दर एवं तनाव कम होता है तथा दुग्ध उत्पादन एवं पशु कल्याण में सुधार होता है। विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि वृक्षों की छाया वाले सिस्टम में गायों का थर्मल कम्फर्ट बेहतर होता है और हीट स्ट्रेस के लक्षण कम दिखाई देते हैं।

  1. परिचय : भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, परंतु बढ़ते तापमान और हीट वेव डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। डेयरी गायों का आरामदायक तापमान (Thermoneutral Zone) लगभग 5°C से 25°C माना जाता है। जब तापमान एवं आर्द्रता इस सीमा से अधिक हो जाते हैं, तब पशु शरीर में अतिरिक्त ऊष्मा जमा होने लगती है और हीट स्ट्रेस उत्पन्न होता है।

हीट स्ट्रेस के दौरान गायों में निम्न परिवर्तन देखे जाते हैं:

  • श्वसन दर में वृद्धि
  • शरीर तापमान में वृद्धि
  • चारा सेवन में कमी
  • जुगाली समय में कमी
  • दूध उत्पादन में गिरावट
  • प्रजनन क्षमता में कमी
  • रोग प्रतिरोधकता में कमी

ये प्रभाव पशु कल्याण तथा डेयरी अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करते हैं।

  1. सिल्वोपास्चर प्रणाली की अवधारणा

सिल्वोपास्चर कृषि वानिकी की एक उन्नत प्रणाली है जिसमें:

  • वृक्ष (Trees)
  • चारा घास (Pasture)
  • पशुपालन (Livestock)

को एक ही भूमि पर वैज्ञानिक ढंग से एकीकृत किया जाता है। यह प्रणाली पशुओं को प्राकृतिक छाया, गुणवत्तापूर्ण चारा, बेहतर सूक्ष्म जलवायु (Microclimate) तथा पर्यावरणीय स्थिरता प्रदान करती है।

  1. अध्ययन का औचित्य

छत्तीसगढ़ में ग्रीष्मकाल के दौरान तापमान 42–46°C तक पहुँच जाता है। अधिकांश गौशालाओं एवं डेयरी फार्मों में पर्याप्त प्राकृतिक छाया उपलब्ध नहीं होती। ऐसी स्थिति में सिल्वोपास्चर मॉडल:

  • कम लागत वाला समाधान है।
  • पशु कल्याण में सुधार करता है।
  • दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम कर सकता है।

 अध्ययन के उद्देश्य

मुख्य उद्देश्य : सिल्वोपास्चर प्रणाली का डेयरी गायों में हीट स्ट्रेस, पशु कल्याण एवं दुग्ध उत्पादन पर प्रभाव का मूल्यांकन करना।

 विशिष्ट उद्देश्य

  1. हीट स्ट्रेस संकेतकों का मूल्यांकन।
  2. पशु कल्याण मापदंडों का अध्ययन।
  3. दुग्ध उत्पादन पर प्रभाव का विश्लेषण।
  4. सिल्वोपास्चर एवं परंपरागत प्रणाली की तुलना।
  5. छत्तीसगढ़ हेतु उपयुक्त मॉडल विकसित करना।
  1. शोध परिकल्पना (Hypothesis)

H0: सिल्वोपास्चर प्रणाली का डेयरी गायों के हीट स्ट्रेस एवं दुग्ध उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

H1: सिल्वोपास्चर प्रणाली हीट स्ट्रेस कम करके पशु कल्याण एवं दुग्ध उत्पादन में सुधार करती है।

  1. सामग्री एवं विधि : अध्ययन क्षेत्र
  • जिला: धमतरी, दुर्ग या रायपुर
  • अवधि: अप्रैल–जून
  • अध्ययन अवधि: 90 दिन

प्रयोगात्मक डिजाइन

समूह विवरण
T1 सिल्वोपास्चर प्रणाली की 30 गायें
T2 खुले आवास की 30 गायें

कुल पशु = 60

  1. मापे जाने वाले पैरामीटर

(A) पर्यावरणीय पैरामीटर

  • परिवेश तापमान
  • सापेक्षिक आर्द्रता
  • THI (Temperature Humidity Index)

THI सूत्र

THI = (1.8 × T + 32) − [(0.55 − 0.0055RH) × (1.8T − 26)]

(B) शारीरिक पैरामीटर

  • Rectal Temperature
  • Respiration Rate
  • Pulse Rate
  • Skin Temperature

(C) व्यवहारिक पैरामीटर

  • Feeding Time
  • Rumination Time
  • Standing Time
  • Lying Time
  • Water Intake

(D) पशु कल्याण संकेतक

  • Body Condition Score
  • Panting Score
  • Cleanliness Score
  • Heat Stress Score

(E) उत्पादन पैरामीटर

  • दैनिक दुग्ध उत्पादन
  • Fat %
  • SNF %
  • Feed Intake

8. अपेक्षित परिणाम : हाल के शोधों में पाया गया कि वृक्ष छाया वाले सिल्वोपास्चर सिस्टम में गायों का रेक्टल तापमान, श्वसन दर और पैंटिंग स्कोर कम था तथा पशु अधिक आरामदायक स्थिति में पाए गए। THI बढ़ने पर भी छाया वाले समूह में बेहतर थर्मोरेगुलेशन देखा गया।

संभावित निष्कर्ष

  • शरीर तापमान में कमी
  • श्वसन दर में कमी
  • हीट स्ट्रेस में कमी
  • चारा सेवन में वृद्धि
  • जुगाली समय में वृद्धि
  • दूध उत्पादन में वृद्धि
  • पशु कल्याण में सुधार
  1. छत्तीसगढ़ हेतु अनुशंसित सिल्वोपास्चर मॉडल

वृक्ष प्रजातियाँ

  • नीम
  • करंज
  • शीशम
  • मोरिंगा
  • बांस
  • सुबबूल

चारा प्रजातियाँ

  • नेपियर घास
  • गिनी घास
  • स्टाइलो
  • बरसीम

उपयुक्त नस्लें

  • साहिवाल
  • गिर
  • थारपारकर
  • HF Crossbred
  • Jersey Crossbred
  1. आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ

आर्थिक लाभ

  • दूध उत्पादन में वृद्धि
  • पशु चिकित्सा व्यय में कमी
  • अतिरिक्त चारा उत्पादन
  • लकड़ी एवं वृक्ष उत्पादों से आय

पर्यावरणीय लाभ

  • कार्बन संचयन
  • जैव विविधता संरक्षण
  • मिट्टी संरक्षण
  • सूक्ष्म जलवायु सुधार

निष्कर्ष : सिल्वोपास्चर प्रणाली छत्तीसगढ़ जैसे गर्म एवं आर्द्र क्षेत्रों में डेयरी गायों के लिए हीट स्ट्रेस प्रबंधन का एक प्रभावी, टिकाऊ एवं कम लागत वाला उपाय है। वृक्षों की प्राकृतिक छाया पशुओं को बेहतर थर्मल कम्फर्ट प्रदान करती है, जिससे पशु कल्याण, स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन में सुधार होता है। वर्तमान जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में यह प्रणाली भविष्य की जलवायु-स्मार्ट डेयरी खेती का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

लेखक :
डॉ चित्रलेखा देव  (पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ- विकासखण्ड- नरहरपुर जिला- कांकेर)
डॉ तरुण साहू (पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ- पशु चिकित्सालय-कुरुद जिला- धमतरी)
डॉ स्वर्णलता बारा (सहायक प्राध्यापक- पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग -साजा जिला- बेमेतरा)

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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