पशुपालन

बरसात के मौसम में पशुओं का स्वास्थ्य, पोषण और प्रबंधन

डॉ. चित्रलेखा देव, डॉ तरुण साहू, डॉ उपासना वर्मा

प्रस्तावना : भारत में वर्षा ऋतु पशुपालन के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ अनेक चुनौतियाँ भी लेकर आती है। इस मौसम में अधिक नमी, कीचड़, परजीवी संक्रमण, संक्रामक रोग, चारे की गुणवत्ता में कमी तथा आवास संबंधी समस्याओं के कारण पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उचित प्रबंधन अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  1. पशु आवास (Housing Management)

(क) स्वच्छ एवं सूखा आवास

  • पशुशाला का फर्श ऊँचा एवं ढलानदार होना चाहिए ताकि वर्षा का पानी जमा न हो।
  • पशुशाला में उचित जल निकासी (Drainage) की व्यवस्था हो।
  • बिछावन (Bedding) को नियमित रूप से बदलते रहें।
  • नमी एवं गीलापन कम करने हेतु चूने का छिड़काव करें।

(ख) उचित वेंटिलेशन

  • पशुशाला में पर्याप्त प्रकाश एवं वायु का आवागमन होना चाहिए।
  • अत्यधिक आर्द्रता से श्वसन रोगों का खतरा बढ़ता है।
  1. पोषण प्रबंधन (Nutritional Management)

(क) संतुलित आहार

  • हरे चारे के साथ सूखा चारा भी दें।
  • खनिज मिश्रण (Mineral Mixture) एवं नमक नियमित रूप से खिलाएं।
  • ऊर्जा एवं प्रोटीन युक्त आहार दें।

(ख) फफूंदयुक्त चारे से बचाव

  • सड़ा-गला, फफूंदयुक्त या बदबूदार चारा न खिलाएं।
  • ऐसे चारे में माइकोटॉक्सिन बन सकते हैं जो पशुओं के स्वास्थ्य एवं प्रजनन को प्रभावित करते हैं।

(ग) स्वच्छ पेयजल

  • पशुओं को स्वच्छ एवं ताजा पानी उपलब्ध कराएं।
  • पानी के बर्तनों की नियमित सफाई करें।
  1. रोग नियंत्रण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन

प्रमुख रोग :  बरसात में निम्न रोगों का खतरा बढ़ जाता है:

रोग कारण
गलघोटू (HS) जीवाणु संक्रमण
लंगड़ा बुखार (BQ) जीवाणु संक्रमण
खुरपका-मुंहपका (FMD) विषाणु संक्रमण
कृमि संक्रमण आंतरिक परजीवी
टिक एवं जूं संक्रमण  बाह्य परजीवी

 

टीकाकरण

  • HS एवं BQ का टीकाकरण वर्षा पूर्व अवश्य कराएं।
  • FMD टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करें।
  • राज्य सरकार द्वारा संचालित टीकाकरण कार्यक्रमों में भाग लें।

कृमिनाशन (Deworming)

  • प्रत्येक 3–4 माह में कृमिनाशक दवा दें।
  • वर्षा ऋतु के प्रारंभ एवं अंत में कृमिनाशन विशेष रूप से करें।
  1. बाह्य परजीवी नियंत्रण

टिक, जूं एवं माइट नियंत्रण

  • पशुओं पर नियमित निरीक्षण करें।
  • पशुशाला में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
  • पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार एकारिसाइड (Acaricide) का उपयोग करें।

लाभ

  • दूध उत्पादन में वृद्धि।
  • रक्त परजीवी रोगों की रोकथाम।
  • त्वचा रोगों में कमी।
  1. दुग्ध उत्पादन प्रबंधन
  • दुहने से पहले एवं बाद में थनों की सफाई करें।
  • थनों को सूखा रखें।
  • मास्टाइटिस की रोकथाम हेतु स्वच्छता बनाए रखें।
  • संक्रमित पशुओं का दूध अलग निकालें।
  1. प्रजनन प्रबंधन
  • फफूंदयुक्त चारे से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • संतुलित पोषण एवं खनिज मिश्रण प्रजनन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
  • हीट (Estrus) के लक्षणों पर नियमित निगरानी रखें।
  • गर्भित पशुओं को विशेष देखभाल दें।
  1. बछड़ों की देखभाल
  • बछड़ों को सूखी एवं स्वच्छ जगह पर रखें।
  • जन्म के बाद शीघ्र कोलोस्ट्रम (खीस) पिलाएं।
  • दस्त एवं निमोनिया से बचाव हेतु स्वच्छता बनाए रखें।
  • नियमित टीकाकरण एवं कृमिनाशन करें।
  1. चराई प्रबंधन
  • जलभराव वाले क्षेत्रों में चराई से बचें।
  • अत्यधिक गीली घास से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • जहरीले पौधों की पहचान कर उन्हें चराई क्षेत्र से हटाएं।
  1. आपदा प्रबंधन

भारी वर्षा एवं बाढ़ की स्थिति में:

  • पशुओं को सुरक्षित ऊँचे स्थान पर ले जाएं।
  • सूखा चारा एवं पेयजल का भंडारण रखें।
  • प्राथमिक उपचार सामग्री उपलब्ध रखें।
  • निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क बनाए रखें।

बरसात में पशुपालकों हेतु प्रमुख सुझाव

  1. पशुशाला को सूखा एवं साफ रखें।
  2. नियमित टीकाकरण एवं कृमिनाशन कराएं।
  3. स्वच्छ पानी एवं गुणवत्तायुक्त चारा दें।
  4. टिक एवं जूं नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें।
  5. गर्भित पशुओं एवं नवजात बछड़ों की विशेष देखभाल करें।
  6. जलभराव एवं कीचड़ से बचाव करें।

निष्कर्ष : बरसात का मौसम पशुओं में संक्रामक रोगों, परजीवी संक्रमणों तथा उत्पादन हानि की संभावना बढ़ा देता है। उचित आवास, संतुलित पोषण, नियमित टीकाकरण, कृमिनाशन एवं स्वच्छता उपायों को अपनाकर पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादन एवं प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। पशुपालकों द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से आर्थिक नुकसान कम होता है तथा पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि होती है।

लेखक: डॉ. चित्रलेखा देव (पशु चिकित्सक), डॉ तरुण साहू (पशु चिकित्सक), डॉ उपासना वर्मा (पशु चिकित्सक), डॉ उपासना चन्द्राकर (पशु चिकित्सक)

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