इफको द्वारा विस्तार सेवाएँ संचालनालय में तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम का सफल आयोजन


इफको द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषक नगर स्थित विस्तार सेवाएँ संचालनालय में 27 फरवरी से 01 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, नैनो उर्वरकों तथा उन्नत खेती के तरीकों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, पर्यावरण-अनुकूल कृषि तथा इफको के आधुनिक उत्पादों के उपयोग के बारे में जागरूक करना था, ताकि वे उत्पादन और आय में वृद्धि कर सकें। प्रथम दिवस पर कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर डॉ. सुरेन्द्र सिंह टुटेजा (संचालक विस्तार), आर. के. एस. राठौर (राज्य विपणन प्रबंधक, इफको), गौतम राय (निदेशक, केवीके), डॉ. ललित श्रीवास्तव (कृषि वैज्ञानिक), तपस चौधरी (वैज्ञानिक), देवशंकर (कृषि वैज्ञानिक), दिनेश कुमार गांधी (उप प्रबंधक, इफको) तथा अन्य अधिकारियों ने किसानों को संबोधित किया। विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा नैनो उर्वरकों के महत्व के बारे में जानकारी दी। आर. के. एस. राठौर (राज्य विपणन प्रबंधक, इफको) द्वारा इफको की राज्य में चल रही सभी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी ।

द्वितीय दिवस पर किसानों को कृषि अभियांत्रिकी एवं संरक्षित उद्यानिकी विभाग में शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस अवसर पर डॉ. आर. के. नायक (कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ) ने किसानों को कृषि में उपयोग होने वाली आधुनिक मशीनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई कृषि मशीनों के उपयोग से बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई जैसे कार्य कम समय और कम लागत में किए जा सकते हैं, जिससे श्रम की बचत होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है। वहीं डॉ. देवशंकर (कृषि वैज्ञानिक) ने किसानों को संरक्षित खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पॉलीहाउस और शेडनेट जैसी तकनीकों के माध्यम से किसान बेहतर गुणवत्ता वाली फसलें उगा सकते हैं तथा बाजार में अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद किसानों को शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण के अंतर्गत आदिवासी संग्रहालय, पुरखौती मुक्तांगन, ब्रह्माकुमारी शांति शिखर मेडिटेशन सेंटर और सत्य साई मंदिर का भी भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिला।

तृतीय दिवस पर आयोजित समापन सत्र में किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन तथा नैनो खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ. वाय. के. मेश्राम (वैज्ञानिक) ने फसलों में लगने वाले विभिन्न कीटों, उनके प्रभाव तथा नियंत्रण के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को समझाया कि किस फसल में किस प्रकार के कीट लगते हैं और उनका सही समय पर नियंत्रण कैसे किया जा सकता है। वहीं डॉ. जे. पी. आयाम (वैज्ञानिक) ने संतुलित उर्वरक उपयोग और पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उचित मात्रा में और सही समय पर खाद देने से फसल की वृद्धि और उत्पादन बेहतर होता है।
इफको के विशेषज्ञों ने भी किसानों को अपने उत्पादों के बारे में जानकारी दी। राजेश गोले (उप महाप्रबंधक, इफको) ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और एनपीके कंसोर्टियम के उपयोग एवं लाभों के बारे में बताया। दिनेश कुमार गांधी (उप प्रबंधक, इफको) ने नैनो जिंक, नैनो कॉपर और बायो डिकम्पोजर एवं इफको के अन्य जल विलय व विशिष्ट उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी। आधुनिक खेती और नैनो तकनीक से उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला तथा मनीष सिंह ( इफको एम.सी ) ने खरपतवार प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा इफको उत्पादों के सही उपयोग के बारे में किसानों को मार्गदर्शन दिया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रों, संतुलित पोषण प्रबंधन, नैनो उर्वरकों तथा संरक्षित खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें खेती में नई तकनीकें अपनाने और उत्पादन बढ़ाने की प्रेरणा मिली। इस प्रकार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और सफल रहा।









