रेवती बाई साहू बनी मिसाल-ऑयल पाम की खेती से रचा इतिहास
नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल के तहत ऑयलपाम की खेती


धमतरी जिला मगरलोड ब्लाक के अंतर्गत भरदा गांव की रहने वाली श्रीमती रेवती बाई साहू श्री तोमन सिंह साहू सेवानिवृत्त एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक की धर्मपत्नी है जो जल संरक्षण एवं फसल चक्र परिवर्तन कर आधुनिक नवाचारी एवं लाभकारी खेती की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है परंपरागत धान की खेती को छोड़ कर ऑयल पाम की खेती को अपनाई है, ऑयल पाम की खेती के जरिए बहुत चर्चित एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है
जिले में नवाचारी ऑयल पाम की खेती कर न केवल अपनी पहचान बनाई है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सही तकनीक और मेहनत से खेती को मुनाफे का मजबूत साधन बनाया जा सकता है
श्रीमती रेवती बाई साहू बताती है कि नेशनल मिशन ऑफ एडीबल ऑयल पाम की खेती के बारे में मगरलोड विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कीर्तन सिंह नरेटी साहब का सतत मार्ग दर्शन एवं प्रधान आरएचइओ उद्यानिकी विभाग तथा कृषि विभाग के एफ. एल. पटेल उप परियोजना अधिकारी ने इस मुनाफे वाली फसल के प्रति प्रोत्साहित किया गया ऑयल पाम एक दीर्घकालीन कालीन कम श्रम लागत वाली अत्यधिक उत्पादक फसल है जिसका एक बार रोपण की पश्चात चौथे वर्षों से पैदावार शुरू होकर 30 वर्षों तक निरंतर आय प्राप्त होती है पारंपरिक तिलहन की फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर तेल उत्पादन क्षमता 4 से 6 गुना अधिक है
उपसंचालक उद्यानिकी श्रीमती पूजा कश्यप साहू के प्रयास एवं अन्य लाभकारी जानकारी दी, ऑयल पाम की प्रारंभिक लागत एवं तीन से चार वर्ष की गैर उत्पादक अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा केंद्र सरकार की न्यूनतम 1.30 लाख रुपए की प्रति हेक्टेयर अनुदान की अतिरिक्त टॉप अप अनुदान की व्यवस्था की गई है जिससे कृषकों को प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक राहत मिल सके ।
किसानों की शुरुआत लागत कम करने के लिए राज्य शासन व अनुदान मिलती है अन्य दलहनी तिलहनी फसलों के मुकाबले इसमें मेहनत कम और बाजार में मांग अधिक है जिससे कृषकों को दसर्कों तक स्थाई आर्थिक लाभ मिलना सुनिश्चित होता है ऑयल पाम कम पानी में उगने वाली फसल है, खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई गई है जिससे पानी की बचत के साथ-साथ पौधों को आवश्यकता अनुसार नमी मिलती है यह फसल जल संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है सिंचाई लागत कम होती है , रखरखाव की दृष्टि से यह फसल कम रोग कीट से प्रभावित होती है, यह पहल किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत रही है स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि रेवती बाई की यह सफलता अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणादाई रही है रेवती बाई साहू की यह सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि महिला किसान भी आधुनिक और नवाचारी जैविक खेती के जरिए आत्मनिर्भर बन सकती है कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है ऑयल पाम से प्रमुख लाभ कम लागत से अधिक एवं स्थिर आ य प्राप्त होती है 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उत्पादन मिलती है अंतर्वती य फसलों से अधिकतम आमदनी मिलती है सरकारी अनुदान एवं तकनीकी सहायता तथा भविष्य की सुरक्षित एवं लाभकारी ऑयल पाम की खेती अब सफलता की मिसाल बन चुकी है।









