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लॉजिस्टिक्स: भारत के विकास का इंजन

विकसित भारत 2047

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूत करने से केवल आम आदमी का जीवन आसान होगा, बल्कि श्रमिकों और कामगारों का सम्मान भी बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

मुख्य बातें

  • राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, गतिशक्ति, जीएसटी और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सरकारी पहल बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण कर रही हैं और लागत में कटौती कर रही हैं।
  • यह क्षेत्र 2.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है और लाखों नए रोजगार पैदा कर रहा है।
  • अंतर्देशीय जलमार्गों ने 2024-25 के लिए 14.55 करोड़ टन का रिकॉर्ड माल ढुलाई दर्ज की है।
  • डिजिटलीकरण और यूलिप जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म आपूर्ति श्रृंखलाओं में दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा दे रहे हैं।

 

 परिचय

भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सेवा, विनिर्माण और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों ने 2021 और 2022 में महामारी के बाद भारत की मजबूत रिकवरी का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप इन दो वर्षों में 15.3% की वृद्धि हुई। तब से भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है, जिसकी वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर (स्थिर मूल्यों पर) वर्ष 2024-2025 में 6.5% रहने का अनुमान है। आज मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का अर्थ है कल एक मजबूत और अधिक लचीला भारत। बुनियादी ढांचे के विकास और डिजिटलीकरण पर सरकार के प्रयासों ने विकास को और तेज किया है, जिससे भारत एशिया में एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है।

भारत में लॉजिस्टिक्स परिदृश्य का अवलोकन

जुलाई 2017 में, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के एकीकृत विकास की देखरेख के लिए वाणिज्य विभाग के अंतर्गत एक अलग लॉजिस्टिक्स इकाई का गठन किया गया था। लॉजिस्टिक्स उद्योग आर्थिक विकास और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, इन्वेंट्री, परिवहन, भंडारण, वेयरहाउसिंग और वितरण का प्रबंधन करके, उत्पादकों को उपभोक्ताओं से जोड़कर, विनिर्माण, खुदरा, ई-कॉमर्स और सेवाओं को बढ़ावा देता है।

भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का मूल्य 2021 में 215 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया था। यह 2026 तक 10.7% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के साथ मजबूत विकास के लिए अच्छी स्थिति में है। इस क्षेत्र को बुनियादी ढांचा का दर्जा देने के सरकार के फैसले से सड़क और रेलवे के समान ही सस्ते, दीर्घकालिक वित्तपोषण तक पहुंच संभव हुई है, जिससे भारत की विकास गाथा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और भी मज़बूत हुई है।

लॉजिस्टिक्स में प्रमुख सरकारी पहल

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) को एनएमपी के पूरक के रूप में सितंबर 2022 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षता में सुधार और लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करके एक अधिक निर्बाध लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इस सुधार के तहत, यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूलिप) और लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी) जैसी डिजिटल पहल अब पूरी तरह से चालू हो गई हैं, जिनका उद्देश्य व्यापार को सुगम बनाना और कंटेनरीकृत आयातनिर्यात (एक्ज़िम) कार्गो की ट्रैकिंग को सक्षम बनाना है।

पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान

सरकार ने अक्टूबर 2021 में विभिन्न परिवहन साधनों को एक समन्वित नेटवर्क में एकीकृत करने के लिए इसे लॉन्च किया था। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह योजना भारत की मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बदलने के उद्देश्य से तेज, निर्बाध और महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचे और रसद विकास रणनीति पर केंद्रित है। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) ने 57 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाया है। इसने 1,700 विशाल डेटा परतों को भी एकीकृत किया है, जिससे बुनियादी ढांचे की योजना बनाने के लिए एक एकीकृत और व्यापक मंच तैयार हुआ है।

समुद्री अमृत काल विजन 2047

समुद्री अमृत काल विजन 2047, नीली अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप, भारत के समुद्री क्षेत्र में बदलाव के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप प्रस्तुत करता है। यह डिजिटलीकरण और स्वचालन के माध्यम से बंदरगाह क्षमता, परिचालन दक्षता का विस्तार और हाइड्रोजन हब जैसी हरित पहलों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस विजन का उद्देश्य तटीय पर्यटन को बढ़ावा देना, समुद्री कौशल विकास को मज़बूत करना और भारत को जहाज निर्माण एवं मरम्मत के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है। ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट (जीएमआईएस) 2023 में, ₹10 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई, जिसमें ₹8.35 लाख करोड़ के 360 समझौता ज्ञापन और ₹1.68 लाख करोड़ की अतिरिक्त परियोजनाएं शामिल हैं, जो समुद्री विकास में मजबूत गति का संकेत देती हैं।

समर्पित माल ढुलाई गलियारे

रेल मंत्रालय वर्तमान में दो समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डीएफसी)- लुधियाना से सोननगर (1337 किलोमीटर) तक ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी (1506 किलोमीटर) तक वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) विकसित कर रहा है। इन्हें विशेष रूप से पूरे देश में भारी माल ढुलाई के लिए डिजाइन किया गया है। इन विशेष रेलवे लाइनों का उद्देश्य मौजूदा यात्री मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करना, परिवहन लागत कम करना और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना है। कुल 2843 किलोमीटर में से, 2741 रूट किलोमीटर (96.4%) मार्च 2025 तक चालू हो चुके हैं। इन गलियारों से औद्योगिक विकास में तेजी आने और रसद और संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

 

मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क

बड़े पैमाने पर वेयरहाउसिंग और भंडारण सुविधाओं के साथ, भारतमाला परियोजना के तहत ये केंद्र लॉजिस्टिक्स के विभिन्न पहलुओं को एक ही स्थान पर लाते हैं। क्षेत्रीय व्यवहार्यता और मांग के आधार पर, देश के विभिन्न हिस्सों में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के प्रयासों से मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) के विकास के लिए चेन्नई, बेंगलुरु, नागपुर, इंदौर आदि जैसे 35 प्रमुख स्थानों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 5 के 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। इन पार्कों को लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे समग्र लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला व्यवसाय के अनुकूल बनेगी।

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी)

एग्जिम कार्गो पर नजर रखने वाला ऐप, एलडीबी, अक्टूबर 2024 तक 75 मिलियन से ज्यादा एग्जिम कंटेनरों की आवाजाही पर नजर रखने में सफल रहा है। यह एक और प्रभावशाली उपलब्धि है जो भारत की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता, दक्षता और रीयल-टाइम दृश्यता बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। यह एक बेहतर, तकनीक-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रयासों को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। एलडीबी ने प्रति माह औसतन 45 लाख से ज़्यादा विशिष्ट कंटेनर खोजों के साथ कारोबारी समुदाय का भरोसा भी अर्जित किया है। उपयोग के इस उच्च स्तर से यह पता चलता है कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में यह प्रणाली कितनी प्रभावी और मूल्यवान बन गई है।

यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूलिप)

यूलिप, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म जो विभिन्न लॉजिस्टिक्स-संबंधित मंत्रालयों और विभागों के डेटा को एक ही इंटरफेस पर एकत्रित करता है, ने मार्च 2025 तक 100 करोड़ एपीआई लेनदेन सफलतापूर्वक दर्ज करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव को दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल प्लेटफॉर्म की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने के प्रति भारत के समर्पण को भी दर्शाती है। यूलिप शिपमेंट ईटीए (आगमन का अनुमानित समय) को भी सक्षम बनाता है, जिससे निर्माताओं को इन्वेंट्री का बेहतर प्रबंधन करने और परिचालन लागत कम करने में मदद मिलती है।

वस्तु एवं सेवा कर

2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के बाद से, देश भर में माल की आवाजाही अधिक सुव्यवस्थित हो गई है क्योंकि इससे परिवहन में देरी कम हुई है और देश भर में लागत-प्रभावी आपूर्ति-श्रृंखला नियोजन संभव हुआ है। कई अध्ययनों के अनुसार, यह भारतीय रसद के लिए एक बड़ा सुधार रहा है, जिसने अंतरराज्यीय चौकियों को समाप्त कर दिया है और समग्र कर संरचना को सरल बनाया है, परिवहन समय में 33% से अधिक की वृद्धि की है और परिवहन एवं रसद क्षेत्र में उत्पादकता में वृद्धि की है।

वे बिल की शुरुआत

ई-वे बिल, जीएसटी ढांचे के तहत एक डिजिटल दस्तावेज है जिसका उद्देश्य कागजी कवायद को खत्म करना, पारदर्शिता बढ़ाना, कर चोरी को कम करना और अंतरराज्यीय वाहनों की आवाजाही को सरल बनाकर माल परिवहन को सुव्यवस्थित करना है। मोटर चालित वाहनों का उपयोग करके राज्यों के बीच ₹50,000 से अधिक मूल्य के माल का परिवहन अनिवार्य है। उच्च मूल्य की खेपों के लिए ई-वे बिल को अनिवार्य करके, सरकार देश भर में अनुपालन और रसद दक्षता में सुधार करना चाहती है।

गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित जीएसवी, परिवहन और रसद शिक्षा के लिए समर्पित भारत का पहला विश्वविद्यालय है। इसके पीछे का विचार एनएमपी से निकटता से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य अधिक स्मार्ट, तेज़ और अधिक कुशल बुनियादी ढांचे का निर्माण करके पूरे भारत में माल की आवाजाही के तरीके को बदलना है। जीएसवी इस राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करने के लिए कुशल पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गति शक्ति विश्वविद्यालय ने लगभग 40 विभिन्न औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

विभिन्न राज्यों में लॉजिस्टिक्स की सुगमता (लीड्स)

लीड्स (एलईएडीएस), भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक वार्षिक रिपोर्ट है, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बुनियादी ढांचे, सेवाओं, नियामक परिवेश और स्थिरता के संदर्भ में रसद प्रदर्शन का आकलन करती है और नीतिगत एवं निवेश निर्णयों को दिशा देने के लिए नजरिया प्रदान करती है। निर्माताओं, निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं जैसे हजारों उद्योग भागीदारों से प्राप्त इनपुट के आधार पर, यह रिपोर्ट लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों का एक आधारभूत दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

स्थिरता का मार्ग

ऐसी दुनिया में जहां सुविधा अक्सर पर्यावरणीय क्षति के साथ आती है, भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र हरित मार्ग अपना रहा है। स्थिरता समय की मांग है, और सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से यह भारत की लॉजिस्टिक्स रणनीति का एक अभिन्न अंग बन रहा है, जो हरित लॉजिस्टिक्स की ओर एक व्यवस्थित प्रयास को दर्शाता है।

जागरूकता बढ़ाने और सतत विकास को समर्थन देने के लिए परिवहन की कुल लागत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की गणना और तुलना हेतु फ्रेट ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) कैलकुलेटर विकसित किया गया है। भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई करने वाले ग्राहकों के लिए रेल ग्रीन पॉइंट्स शुरू किए हैं, जिससे उन्हें संभावित कार्बन उत्सर्जन बचत देखने को मिलेगी। रेल परिवहन के पर्यावरणीय लाभों को समझते हुए, सरकार का लक्ष्य 2030 तक रेलवे की माल ढुलाई हिस्सेदारी को 35-36% से बढ़ाकर 45% करना है। कोयला लॉजिस्टिक्स योजना जैसी पहल भी उत्सर्जन कम करने के लिए रेल-आधारित प्रणाली की ओर बदलाव का प्रस्ताव करती हैं।

यूलिप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सेंचुरी प्लाईवुड्स और टीसीआईएल जैसी कंपनियों को हरित परिवहन साधनों का चयन करने में मदद करके स्थिरता को और बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे भारत के व्यापक कार्बन न्यूनीकरण लक्ष्यों में योगदान मिल रहा है।

उपलब्धियां और आगे की राह

विश्व बैंक ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भारत के बढ़ते कद की पुष्टि की है, जिसके तहत देश 2023 के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) में 139 देशों की सूची में 38वें स्थान पर पहुंच गया है। यह 2018 की पिछली रैंकिंग के बाद से छह स्थानों का उल्लेखनीय सुधार है। रैंकिंग में यह तेज उछाल भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के आधुनिकीकरण और उसे सुव्यवस्थित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है। भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 25 लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखता है, जिसका लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद के 10% से नीचे लाना है।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने हाल ही में वर्ष 2024-25 में 145.5 मिलियन टन के रिकॉर्ड माल परिवहन की सूचना दी है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि मुख्यतः वर्तमान में जारी निवेश और मज़बूत सरकारी नीतियों के कारण संभव हुई है। इसी अवधि के दौरान चालू राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या भी 24 से बढ़कर 29 हो गई है।

निष्कर्ष

सरकार एक स्मार्ट, तकनीक-संचालित लॉजिस्टिक्स प्रणाली बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जो माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करे। लॉजिस्टिक्स की केवल परिवहन से कहीं  ज्यादा अहमियत है। यह राष्ट्र को आगे बढ़ाने और आकांक्षाओं को अवसरों से जोड़ने के बारे में है। बढ़ती उपभोक्ता मांग के साथ, इस क्षेत्र को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। एक मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक रोजगार सृजित करता है और देश भर में संतुलित विकास को बढ़ावा देता है। यह 2027 तक भारत को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अपनी विशाल क्षमता के साथ, लॉजिस्टिक्स व्यापार को बदल सकता है, नए अवसर खोल सकता है और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है, जिससे भारत विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के करीब पहुंच सकता है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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