डेयरी पशुओं हेतु आवास प्रबंधन की भूमिका
डॉ. भारती साहू, डॉ. फणेश्वर कुमार, डॉ. केसर परवीन, डॉ. दीप्ती किरण बरवा, डॉ. के. मुखर्जी


आवास: सामान्य परिचय- पशुओं के लिए आवास अच्छे स्वास्थ्य व अच्छे प्रदर्शन की दृश्टि से महत्वपूर्ण हैं। आवास पशुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक तो है ही इसके साथ उनका प्रबंधन करने व अनुकूल वातावरण देने में सहायता मिलती है। एक आवास अच्छे प्रबंधन में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त पषुओं को आरामदायक स्थान उपलब्ध कराने से उनके दुग्ध उत्पादन में कमी नही आती तथा उनके साफ सफाई पर अच्छे से ध्यान दिया जा सकता है। आवास होने से वहॉं का कार्य बड़ी कुषलता से पूर्ण होता है। आवास का मुख्य उद्देष्य विपरीत वातावरणीय स्थिति में पशुओं की सुरक्षा है। जिससे गर्मी में वे सीधे धूप से बच जाते है एवं ठंड के दिनों में अपने आवास में गर्मी संरक्षित कर ठंड के प्रकोप से बचते हैं।
पशु आवास बनाने के पूर्व सही जगह एवं सही दिशा का चुनाव कर लेना चाहिए। पशु आवास के निर्माण कार्यों में अच्छे सामग्रियों का उपयोग करना चाहिए। आवास में हवा, प्रकाश, तापमान, आर्दता, सफाई आदि का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि पशुओं का स्वास्थ्य सही रहे। पशुओं की संख्या तथा पषुपालकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार ही पशुगृह का निर्माण करना चाहिए।
पशु आवास के प्रकारः-
यदि पशुओं की संख्या बहुत अधिक हो तो दो कतारों में रखने वाले पद्धति का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए या तो सिर से सिर की ओर अथवा पूॅंछ से पूॅंछ की ओर वाले पद्धति का उपयोग किया जा सकता है।
1. सिर से सिर की ओर पद्धति- इस पद्धति में दो कतारों में स्थित पषुओं का मुख आमने सामने होता है। यह सामान्यतः सकरे आवास के लिए सटिक होता है। इसमें पषुओं का खाना अच्छे व आसानी से होता है। इस पद्धति में पषुओं को अपना स्थान ढूंढने में आसानी होती है तथा फार्म में घुसने पर ये अच्छे दिखाई देते हैं।
2. पूॅंछ से पूॅंछ की ओर पद्धति-इस प्रकार के आवास में पषुओं का मुख एक दूसरे से विमुख होता है। इस पद्धति में एक पषु से दूसरे पषु में बीमारी फैलने का खतरा कम होता है तथा पषु हमेंषा बाहर की ओर से षुद्ध वायु लेता है। इस प्रकार के आवास में बीच में जगह होने से पषुओं के सफाई व दूध निकालने में आसानी होती है तथा सभी दूध निकालने वालों का एक साथ निरीक्षण किया जा सकता है। यदि पषु के पिछले भाग में कोई समस्या हो तो उसे आसानी से परखा जा सकता है क्योंकि इस पद्धति में दो लाइनों में स्थित पषुओं का पूॅंछ आमने सामने होता है।
पशु आवास संरचनाः-
पशुओं की संख्या तथा पषुपालकों की स्थिति के अनुसार ही निर्माण कार्य की आधारभूत संरचना निष्चित करना चाहिए। एक सामान्य पशुगृह में छत, ईट की दीवार, फर्ष, नाली, खाने पीने की नांद आवश्यक रुप से होना चाहिए। चार पशुओं के लिए 16.2 वर्ग मीटर का स्थान पर्याप्त होता है। पशु आवास में निम्न संरचनाए होनी चाहिए-
1. फर्श- एक अच्छा व उचित फर्ष स्थान बनाने के लिए धरातल सतह को कड़ा बनाना चाहिए। फर्ष को ईट व सीमेंट के माध्यम से पक्का बनाना चाहिए तथा ढलान नाली की ओर एक में 60 होना चाहिए जिससे गोबर, पानी, मल-मूत्र इत्यादि आसानी से नाली में बहाया जा सके। फर्श को फिसलन रहित, टिकाउ तथा पानी व मूत्र के लिए अभेद्य होना चाहिए जिससे इसे आसानी से साफ किया जा सके।
2. नाली- नाली को 30 सेमी. चौड़ा व 10 सेमी. गहराई का बनाना चाहिए। जिससे सही तरीके से बेकार पदार्थ को बहाया जा सके। सामान्यतः नाली में खाद्य पदार्थों के अपशिष्ट, गोबर आदि ठोस वस्तुएं जमा हो जाते हैं। इन्हे दिन में कम से कम दो बार हटाना चाहिए। आवास में कम से कम दो प्रतिषत का ढलान देना चाहिए ताकि अपशिष्ट पदार्थों को घर के बाहर आसानी से निकाला जा सके व उचित निपटारा किया जा सके।
3. पशुओं के खाने का स्थान / नांदः- 60 सेमी. चौड़ाई का नांद पशुओं के खाने के लिए उपलब्ध कराना चाहिए तथा इसका पिछला भाग फर्ष से 125 सेमी. उॅंचाई का होना चाहिए जिससे पषु अपना भोजन बाहर की ओर न गिरा सके। संयुक्त पानी पीने की नांद गाय व बैल के लिए 120 सेमी. लंबाई व 60 सेमी. चौड़ाई का रखने की सलाह दी जाती है जो कि फर्श से 75 सेमी. ऊपर हो।
4. दीवार एवं छतः- पशु आवास की दीवार 30 सेमी. चौड़ा होना चाहिए। दीवार को ईंट व सीमेंट की सहायता से पक्का ही बनाना चाहिए। जिससे ठंड व गर्मी के प्रकोप से पशुओं को बचाया जा सके तथा बारिश में सीलन की समस्या न हो। आवास की छत या तो धातु की चादर या सीमेंटीकृत हो या तो फिर बांस ही बल्लियों व अरहर की लकडि़यों की सहायता से पॉलिथीन शीट से ढककर बनाया जा सकता हैं। इसका ढलान नाली की ओर होना चाहिए। छत को सहायता देने के लिए लकड़ी के चार स्तंभों जो दीवार से लगा हो का उपयोग किया जा सकता है। इसमें छत बांस एवं अरहर की लकडि़यों का बना होता है। इस प्रकार के छत में पॉलिथीन षीट पर गन्ने के पत्तियों का उपयोग ढकने के लिए कर सकते हैं।
शेड की ऊॅंचाई 175 सेमी से 220 सेमी. (6 फिट से 7.5 फिट) होना चाहिए।
पशु आवास हेतु स्थान
पशुओं के कुशल कार्यक्षमता व अच्छे उत्पादन के लिए उन्हे आरामदायक एवं आवश्यक स्थान उपलब्ध कराना चाहिए। इसके लिए आवश्यक स्थान की जानकारी होना अनिवार्य है तथा प्रत्येक उम्र के पशुओं को आवष्यकतानुसार रहने, खाने-पीने आदि के लिए निम्नानुसार स्थान उपलब्ध कराना चाहिए।
पशु आवास हेतु फर्श स्थानः
| क्र. | पशु का प्रकार | फर्श स्थान (मी2) | प्रति शेड पशुओं की अधिकतम संख्या | |
| ढका भाग | खुला भाग | |||
| 1 | गाय | 3.5 | 7 | 50 |
| 2 | भैंस | 4 | 8 | 50 |
| 3 | गाभिन गाय | 12 | 12 | एकल |
| 4 | प्रजनन साण्ड | 12 | 12 | एकल |
| 5 | नए बछड़े | 1 | 2 | 30 |
| 6 | पुराने बछड़े | 2 | 4 | 30 |
पशुआवास में खाने व पीने हेतु स्थानः
| पशु का प्रकार | खाने का स्थान/ पशु (सेमी) | पानी पीने का स्थान/ पशु (सेमी) | नांद की लंबाई/ पशु (सेमी) | नांद की चौड़ाई/ पशु(सेमी) | नांद की गहराई/ पशु(सेमी) | नांद के आंतरिक दीवार की उॅंचाई (सेमी) |
| वयस्क गाय/भैंस | 60-75 | 6-7.5 | 60-75 | 60 | 40 | 50 |
| बछडे़ | 40-50 | 4 | 40-50 | 40 | 15 | 20 |
लेखक:
डॉ. भारती साहू- सहायक प्राध्यापक, पशुचिकित्सा एवं पषुपालन महाविद्यालय, अंजोरा दुर्ग, छ.ग.
डॉ. फणेश्वर कुमार- पशुचिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, छ.ग. शासन, छ.ग.
डॉ. केसर परवीन – सहायक प्राध्यापक, पषुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा दुर्ग, छ.ग.
डॉ. दीप्ती किरण बरवा – सहायक प्राध्यापक, पषुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा दुर्ग,छ.ग.
के. मुखर्जी – प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा दुर्ग,










