न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण करें सरकार : गोपाल प्रसाद साहू
न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण विगत 8 वर्षों से नहीं


छत्तीसगढ़ प्रदेश के शासकीय एवं निजी क्षेत्र में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी/श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अंतर्गत न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाता है जिसका पुनरीक्षण विगत 8 वर्षों से नहीं किया गया विगत 9 वर्षों में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षित नहीं किया गया है| न्यूनतम वेतन पुनरीक्षित किये जाने हेतु प्रदेश के श्रमिक समय-समय पर श्रमायुक्त से अनुरोध करते रहे है परन्तु उनके द्वारा उद्योगपतियों के दबाव में हमारी अनुरोधों को अनसुना करते आ रहे है| इससे प्रदेश के शासकीय कार्यालयों के 3.5 लाख एवं निजी क्षेत्र के 10 लाख से अधिक कर्मचारी/श्रमिक का आर्थिक हित प्रभावित हो रहा है| न्यूनतम वेतन छत्तीसगढ़ प्रदेश में अन्य राज्यों जैसे दिल्ली की तुलना में लगभग आधे के बराबर है जो प्रदेश लाखों श्रमिकों के आर्थिक हित पर कुठाराघात है| मई दिवस के पूर्व न्यूनतम वेतन पुनरीक्षित नहीं करने पर श्रमायुक्त कार्यालय का घेराव किया जायेगा|

उल्लेखनीय है कि; श्रमायुक्त एवं सक्षम प्राधिकारी, न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा-03 (ख) के अंतर्गत नियत मजदूरी की न्यूनतम दरों का पुनर्विलोकन /पुनरीक्षण 5 वर्षों में किया जाता है एवं श्रम विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2017 (अधिसूचना क्र. ऍफ़ 10-4/2016/16 दिनांक 29.03.2017) में अधिसूचित नियोजन हेतु न्यूनतम वेतन दरों का पुनरीक्षण किया गया है| श्रमायुक्त एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा अवगत कराया गया है कि, “वर्तमान में भारत सरकार द्वारा देतन संहिता 2020 अधिसूचित किया गया है जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भी वेतन नियम 2021 बनाये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इस संहिता एवं नियम के लागू हो जाने के पश्चात् संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत न्यूनतम वेतन का निर्धारण किया जावेगा। संहिता के अनुरूप अब अधिसूचित नियोजन संबंधी प्रावधान समाप्त कर दिया गया है जिससे जो भी न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जायेगा वह सम्पूर्ण प्रदेश में समान रूप से समस्त उपक्रमों, नियोजन, स्थापनाओं एवं कारखानों में लागू होगा। इसी प्रकार भारत सरकार द्वारा निर्धारित नेशनल फ्लोर रेट के आधार पर न्यूनतम वेतन का निर्धारण किया जावेगा। किसी भी राज्य में भारत सरकार द्वारा निर्धारित नेशनल फ्लोर रेट से कम न्यूनतम वेतन का निर्धारण नहीं किया जा सकेगा|”
वेतन निर्धारण हेतु नियम : प्रदेश में संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी/श्रमिकों के वेतन निर्धारण हेतु न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा-03 (ख) द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन जो श्रमायुक्त द्वारा एवं छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 अंतर्गत एकमुश्त संविदा वेतन जो वित्त विभाग द्वारा निर्धारित की जाती है| इन्ही दो प्रावधानों के अनुरूप समानुपातिक रूप प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों यथा दैनिक वेतन भोगी, कलेक्टर दर पर कार्यरत, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत, मानदेय पर कार्यरत, जॉब दर पर कार्यरत, अंशकालीन, आउट सोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता, समूह, समिति, संविदा के माध्यम से नियोजित कर्मचारियों का मानदेय निर्धारित किया जाता है|
श्रम कल्याण योजनाओं लाभ नहीं : संगठित एवं असंगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी/श्रमिकों के अनेक श्रम कल्याण कानून है लेकिन उसका पर्याप्त लाभ उनको नहीं मिल रहा है| कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, श्रम सम्मान राशि सहित 25 से अधिक राज्य शासन की योजनाएं संचालित है तथा इसे संचालित करने प्रदेश में श्रमायुक्त, भवन एवं संनिमार्ण मंडल, असंगठित कर्मकार मंडल, श्रम कल्याण मंडल, कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएँ, औद्योगिक स्वस्थ एवं सुरक्षा जैसी संस्थाएं है| परन्तु नियम में अस्पष्टता के कारण अनेक विभागों कार्यरत कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, श्रम सम्मान राशि का लाभ नहीं मिल रहा है|
मातृत्व अवकाश का लाभ महिला कर्मचारियों को नहीं: मेटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) एक्ट 2017 एवं श्रमायुक्त द्वारा जारी पत्र क्र. 7124 दिनांक 11.09.2017 द्वारा दैनिक वेतन भोगी महिला कर्मचारियों को 12 से 26 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश की पात्रता है परन्तु इसकी अवहेलना नियंत्रक अधिकारिओं द्वारा किया जाता है और सवैतनिक मातृत्व अवकाश का लाभ महिला कर्मचारियों नहीं दिया जाता|
श्रमायुक्त प्रदेश के श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में मई दिवस के पूर्व पुनरीक्षित करें अन्यथा श्रमायुक्त कार्यालय का घेराव किया जावेगा| अनियमित कर्मचारियों से अपील इसके लिए तैयार रहें|









