

विकासशील देशों में लोगों के लिए कृषि सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और आजीविका का स्रोत है। विकासशील देशों में दो तिहाई आबादी स्वयं के परिवारों के लिए भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। भारत का कृषि क्षेत्र वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 17% का योगदान देता है। कृषि के विकास कों देखते हुए, हरित क्रांति के द्वारा, 1960 और 1970 के दशक में उच्च उपज वाली बीज किस्मों (HYV), कृषि मशीनरी, उर्वरक, सिंचाई प्रणाली आदि के बड़े पैमाने पर उपयोग के माध्यम से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। इसी कारण भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है और कई दशकों से विभिन्न उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। खाद्यान्न में बढ़ोतरी के साथ वर्तमान में, भारतीय कृषि उत्पादन की स्थिरता से संबंधित चुनौतियों का सामना कर रही है, विशेष रूप से जनसंख्या वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों (पानी, मिट्टी, जैव विविधता, आदि) की तेजी से कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण बदलती मौसम की स्थिति को देखते हुए। कृषि से आय प्रतिदिन काम होती जा रही है। दूसरी ओर, बढ़ती जनसंख्या के कारण विभिन्न प्रकार के भोजन की बढ़ती मांग के कारण खाद्य श्रृंखला पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
जब चुनौतियाँ आती हैं तो अवसर भी लाती हैं। चुनौतियों के अलावा, विविध खाद्य उत्पादों की आवश्यक मात्रा और गुणवत्ता का उत्पादन करने के लिए बड़े अवसर भी पैदा हुए हैं जो कृषि प्रणालियों को कुशल और मजबूत बनाकर कृषि विकास में योगदान करते हैं। इसके अलावा, समाज में अंतिम उपभोक्ताओं तक विभिन्न कृषि उत्पादों के लाभों को शीघ्रता से पहुंचाने के लिए नवप्रवर्तकों के नवाचारों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इन लक्ष्यों को सटीक रूप से प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) शुरू करना आवश्यक है। सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) एक नया संस्थागत नवाचार हैं इसके तहत एक सरकारी संस्था (संघीय, राज्य या स्थानीय सरकार) और एक निजी क्षेत्र के इकाई के बीच एक संविदात्मक समझौता है। यह समझौता आम जनता के उपयोग के लिए सेवाएं या सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र (सार्वजनिक और निजी) की क्षमताओं और संसाधनों को साझा करता हैं। संसाधनों को साझा करने के साथ, प्रत्येक पक्ष सेवा और सुविधा प्रदान करने के संभावित जोखिम और प्रतिफल को भी साझा करता है।
सार्वजनिक निजी भागीदारी एक निजी संस्था और एक सरकारी संस्था के बीच जनता कों संसाधन या सेवा प्रदान करने के लिए एक दीर्घकालीन अनुबंध हैं जिसमें निजी पक्ष महत्वपूर्ण जोखिम और प्रबंधन जिम्मेदारी वहन करता हैं (विश्व बैंक)। भारतीय कृषि में कई सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच अनुबंध के अवसरों की संभावना हैं, जैसे अनाज उत्पादन एवं विपणन, कृषि उकरण और मशीनरी, रोग निदान और टीकाकरण, फसल सुरक्षा के लिए जैव कीटकनाशक और जैविक नियंत्रण, कृषि-जैव रसायन, पशुपालन एवं सबंधित क्षेत्र, जैव प्रोद्दोगिकी, फल, फुल और सब्जियों, दूध, मांस और मछली आदि क्षेत्रों में उत्पादन, प्रसंस्करण उत्पाद निर्माण एवं विपणन कर सकते हैं । दोनों संस्थाओं द्वारा इन क्षेत्रों में अनुसंधान एवं प्रचार-प्रसार गतिविधियाँ चलाकर कृषि क्षेत्र के विकास में तेजी से प्रगति की जा सकती है, तथा देश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया जा सकता है।
उद्येश्य:
- संसाधनों के निर्माण, रखरखाव और सेवा वितरण में निजी क्षेत्र की कार्यक्षमता का उपयोग करना
- निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार करना
- नवाचार और तकनीकी सुधार लाने के अवसर पैदा करना
- नई प्रोद्दोगिकियों और नवीन तकनीकी लाने के अवसर पैदा करना एवं अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना
- निजी क्षेत्र के प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा का लाभ उठाकर और परियोजना लागत को अनुकूलित करके पैसे का बेहतर मूल्य प्राप्त करना
- आधारभूत संरचना में निवेश बढ़ाना
- सार्वजनिक क्षेत्र के भीतर स्थानीय क्षमता का विकास करना
- स्पष्ट अनुबंधों और परिभाषित समय-सीमायों के माध्यम से परियोजना गतिविधियो के कार्यान्वयन कों सुव्यवस्थित करना
सार्वजनिक निजी भागीदारी के कुछ प्रमुख तत्व
भागीदार
- शासन (केंद्र/राज्य)
- गैर सरकारी संघठन कार्पोरेट क्षेत्र
- सहकारी क्षेत्र
- कृषक हित समूह, किसान उत्पादक संघठन, स्वयं सहायता समूह, किसान
- सार्वजनिक एवं निजी वित्तीय संस्थानों
- बीमा कंपनियां
आदान
- मानव संसाधन
- वित्तीय संसाधन
- आधारभूत संरचना
- कौशल, ज्ञान, सलाहकार संसाधन
- समय संसाधन
- कृषि आदान एवं अन्य सेवा संसाधन
प्रक्रिया
- औपचारिक, अनौपचारिक और लिखित माध्यमों से (जैसे अनुबंध के रूप में) विभिन्न हितधारकों के बीच विविध समन्वय संबंधों का निर्माण।
- व्यवस्थाए बनाकर कृषि मूल्य श्रृंखला में एक या अधिक विशिष्ट कार्य करना।
- उत्पाद कों साजा करना (लाभ या हानि, सामाजिक जवाबदारी, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत संतुष्टि, कार्पोरेट और औपचारिक दायित्व की पूर्ति करना आदि )
उत्पादन
- आवश्यक रूप से प्रत्यक्ष और त्वरित उत्पादन से खेत में की आय में बढ़ोतरी
- प्राकृतिक संसाधनों का उन्नयन, आर्थिक व्यवहार्ता , पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक जवाबदेही आदि
सार्वजनिक निजी भागीदारी में हितधारक
- तकनिकी रूप से कौशल कृषि सलाहकार
- प्रगतिशील कृषक
- कृषक संस्थाए
- कृषि व्यवसाय कंपनीयां
- निविष्टियां आपुर्तिकर्ता
- कृषि परामर्श केंद्र
- सहकारी संस्थाए
- गैर सरकारी संघठन
- कृषि विज्ञान केंद्र
- समाचार पत्र
- कृषि पत्रिकाएँ
- निजी क्षेत्र के बैंक
पीपीपी अभिसरण के तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भूमिका और जिम्मेदारियां
सार्वजनिक क्षेत्र :
- प्रौद्योगिकी प्रसार, शिक्षा (मिट्टी और जल संरक्षण, कीटनाशकों का सुरक्षित उपयोग, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, रोग पूर्वानुमान, आदि) और मानव संसाधन विकास जैसी सार्वजनिक गतिविधियों पर ध्यान देना।
- नीतिगत मुद्दों कों तय करना
- गुणवत्ता नियंत्रण
- साधनहीन कृषक एवं कृषक महिलाएं के कल्याण हेतु व्यवस्था प्रणाली कों स्थापन करना, सहायता प्रदान करना और नियम कार्यों द्वारा नियंत्रण करना
- निजी विस्तार प्रणाली की गुणवत्ता की देखरेख और नियंत्रण करना
- नीति एवं कार्यक्रम तय करना
- बैकवर्ड लिंकेज का विकास करना
निजी क्षेत्र:
- विशिष्ट ग्राहक समूहों और किसानों की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करना।
- ग्रामीण ज्ञान प्रणालियों का विकास
- परियोजनाओं और रणनीतियों का कार्यान्वयन
- फॉरवर्ड लिंकेज का विकास करना
सार्वजनिक निजी भागीदारी के मॉडल
| अ. क्र. | मॉडल | सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका | निजी क्षेत्र की भूमिका |
| १) | बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) | उनके बीच एक समझौता होने के बाद, वे निजी निवेशकों से तैयार पुरे सुविधाए वापस खरीदते हैं या किराए पर लेते हैं। | सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार इन सुविधाओं का वित्तपोषण, स्थापना और संचालन करता हैं । |
| २) | बिल्ड-ऑपरेट-ओन (बीओओ) | संसाधनों का आबंटन करना | हमेशा के लिए सुविधाए प्रभावी ढंग से चलाने हेतु आधारभूत संरचना के लिए वित्तपोषण, स्थापना, स्वामित्व और संचालन करना |
| ३) | लीजिंग (पट्टा विधि) | आंशिक रूप से जोखिम हस्तांतरण करना | डिज़ाइन बनाना, निर्माण कर संचालन करना |
| ४) | रियायत | समग्र प्रबंधन के लिए किसी विशिष्ट क्षेत्र में सेवाओं के प्रावधान की सारी जिम्मेदारी निजी भागीदारों को हस्तांतरित करना। | व्यवसाय का निर्माण एवं विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार। |
| ५) | सयुंक्त व्यापार | किसी सुविधा का सयुंक्त रूप रूप से वित्त पोषण, स्वामित्व और संचालन | किसी सुविधा का सयुंक्त रूप रूप से वित्त पोषण, स्वामित्व और संचालन |
| ६) | परिचालन/ सेवा प्रबंधन अनुबंध | वित्त प्रदान करना | एक निर्दिष्ट समय अवधि के लिए आधारभूत संरचना हेतु आधारभूत संरचना सबंधी सेवाए या संचालन प्रबंधन करना |
| ७) | अनौपचारिक सार्वजनिक –निजी सहयोग | दाताओं, संघठन, अभिकरण, नगरी समाज, गैरसरकारी संघठन, सामाजिक मुद्दों कों समजना, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करना आदि के बीच राष्ट्रीय और स्थानीय सरकार में समन्यव
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दाताओं, संघठन, अभिकरण, नगरी समाज, गैरसरकारी संघठन, सामाजिक मुद्दों कों समझना, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करना आदि के बीच राष्ट्रीय और स्थानीय सरकार में समन्यव |
स्त्रोत: रुचिरा शुक्ला और अन्य २०१६
भारतीय कृषि में सफल सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के कुछ उदाहरण
| अ. क्र. | पीपीपी भागीदारी | फसल/कार्य | उद्देश्य |
| १) | पंजाब-पेप्सीको | टमाटर | फसल विविधिकरण और अनुबंध |
| २) | महाराष्ट्र कृषि विपणन मंडल –अंगूर उत्पादक | अंगूर | दुनिया भर में अंगूर के विपणन को बढ़ावा देना साथ उनकी गुणवत्ता समस्याओं और अस्वीकृति का हल निकालना |
| ३) | मध्य प्रदेश – धानुका एग्रीटेक | पौध संरक्षण | मिट्टी परिक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, नई तकनीक के अध्ययन हेतु कृषक दौरे, प्रदर्शन, जैविक खेती कों बढ़ावा और कृषि उत्पाद के लिए बाजारों की श्रृंखला कों जोड़ना आदि कें संबधी सेवाएँ प्रदान करके खेती की उत्पादकता में वृद्धि और कृषकों का जीवर स्तर बढ़ाना |
| ५) | उत्तराखंड- कोहिनूर फूड लिमिटेड (KFL) | जैविक खेती | जैविक बासमती चावल के आपूर्ति बढ़ाने हेतु कृषकों का चयन करना |
| ६) | मुंबई, नाशिक, नागपुर, चंडीगढ़, पटना, भोपाल, कोलकत्ता, अहमदबाद और सूरत | टर्मिनल बाजार के लिए विपणन आधारभूत संरचना | टर्मिनल बाजार में उत्पादों के लिए वन स्टॉप पारदर्शी बिक्री सुविधा एवं नाशवान वस्तुओं के व्यापार कों सुविधाजनक बनाना |
| ७) | गुजरात – डीरे और कंपनियां | कृषि सेवाएँ | संपूर्ण गुजरात में किसानों को छोटी कृषि मशीनरी उपलब्ध कराना। |
स्त्रोत: रुचिरा शुक्ला और अन्य २०१६










