

परिचय: श्री अन्न (मिलेट्स) आवश्यक पोषक तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है; इन्हें ‘पौष्टिक अनाज’ भी कहा जाता है। भारतीय श्री अन्न (मिलेट्स) पोषण के मामले में गेहूं और चावल से बेहतर है क्योंकि ये प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन-मुक्त भी होते हैं और इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो इन्हें सीलिएक रोग या मधुमेह वाले लोगों के लिए आदर्श बनाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा श्री अन्न (मिलेट्स) उत्पादक है, जिसकी हिस्सेदारी दुनिया के उत्पादन में 42.75% है (खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), 2023)।
- श्री अन्न(Millets) छोटे दानों वाले अनाज (Small-Seeded Cereal Grains) होते हैं, जो Poaceae या घास कुल से संबंधित हैं।
- इन्हे मोटे अनाज भी कहा जाता है।ये गेहूं, चावल और जौ जैसे अन्य अनाजों की तुलना में अधिक पौष्टिक होते हैं।
- इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज अधिक मात्रा में होते हैं।मिलेट्स ग्लूटेन-मुक्त भी होते हैं, जो उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो ग्लूटेन से एलर्जी या संवेदनशील हैं.
- ये अनाज प्राचीन काल से भारत में उगाए जा रहे हैं औरस्वास्थ्यवर्धक, पोषणयुक्त व पर्यावरण–अनुकूल फसलें मानी जाती हैं।
श्री अन्न हेतु प्रमुख मौसम
खरीफ ऋतु :
- श्री अन्न की खेती मुख्यतःखरीफ मौसम (जुलाई से अक्टूबर) में होती है।
- यह फसलेंशुष्क और अर्द्ध–शुष्क क्षेत्रों में भी अच्छी तरह उगाई जा सकती हैं
श्री अन्न की दो श्रेणियाँ (Types of Millets)
मुख्य श्री अन्न :
- ज्वार (Sorghum)
- बाजरा (Pearl Millet)
- रागी (Finger Millet)
ये प्रमुख रूप से उगाई जाने वाली और अधिक क्षेत्र में बोई जाने वाली फसलें हैं।
लघु श्री अन्न :
- कांगनी (Foxtail Millet)
- कोदो (Kodo Millet)
- सामा या सांवां (Barnyard Millet)
- कुटकी (Little Millet)
- चेना (Proso Millet)
- कुट्टू (Buckwheat) – यह तकनीकी रूप से एक छद्म अनाज (Pseudo-Cereal) है, जो उपवास आदि में उपयोग होता है।
श्री अन्न (Millets) की प्रमुख विशेषताएँ
- जलवायु प्रतिरोधी : यह फसलें कम पानी में भी पनप जाती हैं औरसूखे को सहन कर सकती हैं।
- स्वास्थ्यवर्धक (Nutritious): मिलेट्स में फाइबर (Dietary Fibre), लोहा (Iron), कैल्शियम (Calcium) और प्रोटीन (Protein)प्रचुर मात्रा में होता है।
- ग्लूटेन–रहित (Gluten-Free):यह सीलिएक रोग (Celiac Disease) या ग्लूटेन संवेदनशीलता (Gluten Sensitivity) वाले लोगों के लिए उपयुक्त हैं।
श्री अन्न (Millets) में भारत की वैश्विक और राष्ट्रीय स्थिति (Global and National Status)
- वैश्विक उत्पादन : भारतदुनिया का सबसे बड़ा श्री अन्न (Millets) उत्पादक देश है।भारत का योगदान विश्व उत्पादन में लगभग 41% और एशिया के कुल उत्पादन में 80% से अधिक है।
- निर्यात स्थिति :भारतविश्व के शीर्ष 5 मिलेट निर्यातक देशों में शामिल है।2022-23 में भारत ने लगभग6 लाख मीट्रिक टन मिलेट्स का निर्यात किया, जिसकी कुल वित्तीय मूल्य लगभग ₹608.12 करोड़ या US$75.45 मिलियन थी।
- प्रमुख निर्यात गंतव्य देश: संयुक्त अरब अमीरात (UAE),सऊदी अरब (Saudi Arabia),नेपाल,बांग्लादेश,मुख्य निर्यातित किस्में: बाजरा (Pearl Millet / Bajra) औरज्वार (Sorghum / Jowar)
श्री अन्न (Millets) के पोषण एवं स्वास्थ्य लाभ
मिलेट्स के सेवन के प्रमुख लाभ
- मधुमेह (Diabetes) नियंत्रण:इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, जिससे रक्त में शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता।
- ग्लूटेन–मुक्त:ये उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी (सीलिएक रोग) है।
- हृदय स्वास्थ्य:इनमें मौजूद फाइबर और मैग्नीशियम कोलेस्ट्रॉल को कम करने और हृदय रोगों से बचाने में मदद करते हैं।
- वजन घटाना:उच्च फाइबर होने के कारण ये लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराते हैं।
पर्यावरणीय लाभ (Environmental Benefits)
- कम पानी की आवश्यकता:- मिलेट्स कोकम पानी में उगाया जा सकता है, जिससे यह जल संरक्षण (Water Conservation) में मदद करता है।
- सूखा प्रतिरोधी:-यह फसलेंसूखे या वर्षा की कमी में भी अच्छी पैदावार देती हैं।
- कीट प्रतिरोधी:-मिलेट्स में प्राकृतिक रूप सेकीटों से बचाव की क्षमता होती है, जिससे कम कीटनाशक उपयोग की आवश्यकता होती है।
- पर्यावरणीय स्थिरता:-ये फसलेंपर्यावरण के लिए टिकाऊ (Sustainable) हैं और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करती हैं।
सरकार की पहल (Government Initiatives for Millets)
- राष्ट्रीय मिलेट वर्ष (National Year of Millets – 2018) भारत सरकार ने2018 को ‘राष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ घोषित किया।
इसका उद्देश्य था – लोगों में मिलेट्स के पोषण और पर्यावरणीय लाभ के बारे में जागरूकता बढ़ाना
- अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष (International Year of Millets – 2023)
- संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्षघोषित किया।
- यह प्रस्तावभारत के नेतृत्व में लाया गया था।
- इसका उद्देश्य था – दुनिया भर में मिलेट्स की खेती, उपभोग और व्यापार को बढ़ावा देना।
- पोषण अनाज उप मिशन (Sub-Mission on Nutri-Cereals – Millets)
- यह मिशनराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (National Food Security Mission – NFSM) के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
- उद्देश्य:मिलेट्स काउत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना
- इसके लिएबीज, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण जैसी मदद दी जाती है।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive Scheme – PLISFPI)
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए यह योजना चलाई जा रही है।
- इसमेंमिलेट आधारित उत्पादों को शामिल किया गया है।
- इससे मिलेट्स केप्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलता है।
- मिलेट अनुभव केंद्र (Millet Experience Centres)
- देश के विभिन्न हिस्सों मेंमिलेट अनुभव केंद्र स्थापित किए गए हैं।
उद्देश्य:
- लोगों को मिलेट्स से बनेस्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजन परोसना
- शिक्षा देना– मिलेट्स के लाभों के बारे में जागरूक करना।
- एक जिला, एक उत्पाद योजना (One District, One Product –ODOP)
- इस योजना के अंतर्गत कई जिलों मेंमिलेट्स को चुना गया है।
- उद्देश्य:
- स्थानीय किसानोंको प्रोत्साहन
- कृषि-प्रसंस्करण (Agri-Processing) और
- बाजार उपलब्धता (Market Linkages)में सहायता देना।
छत्तीसगढ़ में मिलेट्स की स्थिति: मुख्य बिंदु
- मिलेट मिशन और प्रोत्साहन:छत्तीसगढ़ सरकार ने कोदो, कुटकी और रागी की खेती को बढ़ावा देने के लिए मिलेट मिशन शुरू किया है, जिसके लिए ₹170 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
- MSP पर खरीदी:देश का पहला ऐसा राज्य जो कोदो-कुटकी (₹30/kg) और रागी (₹33.77/kg) की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी कर रहा है।
- उत्पादन में वृद्धि:राज्य में मिलेट की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। रागी की फसल से किसानों की आय में भी काफी इजाफा हुआ है।
- अवसंरचना विकास:कांकेर के नाथिया नवागांव में देश की सबसे बड़ी मिलेट प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है।
- पुरस्कार:छत्तीसगढ़ को मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पोषक अनाज अवार्ड 2022 मिला है।
- उपभोक्ता जागरूकता:राज्य भर में मिलेट्स कैफे और उत्पादों को लोकप्रिय बनाया जा रहा है।
मिलेट उत्पादन में चुनौतियाँ (Challenges in Millet Production)
- उपज अंतर
- अन्य फसलों की तुलना मेंमिलेट्स की प्रति हेक्टेयर उपज कम है।
मुख्य कारण:
- श्रमिकों की कमी
- उर्वरकों का अपर्याप्त उपयोग
- जलवाय पर निर्भरता
- लगभग72% मिलेट की खेती वर्षा आधारित होती है।
- इस कारण यहमौसम में बदलाव से अत्यधिक प्रभावित होती है।
- भंडारण की समस्या (Storage Issues)
- मिलेट्स कीशेल्फ लाइफ – यानी भंडारण अवधि अन्य अनाजों की तुलना में कम होती है।
- इससेभंडारण और संरक्षण में कठिनाइयाँ आती हैं।
श्री अन्न (Millets) क्षेत्र में सुधार के लिए भविष्य की राह
- अनुसंधान और विकास
- ऐसीनई किस्मों का विकास करना जो:
- उच्च उपज देने वाली हों
- रोग प्रतिरोधक हों
- ऐसीनई किस्मों का विकास करना जो:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास
- बेहतर भंडारण सुविधाओं का निर्माण
- मिलेट्स के लिएप्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करना जिससे इनके उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो सके।
- जागरूकता अभियान
- स्वास्थ्य लाभ के बारे में लोगों को जागरूक करने हेतुराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार अभियान चलाना।
- नीतिगत समर्थन
- मिलेट खेती को प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ बनाना
- किसानों को उचित मूल्य की गारंटी देना
- बाजार विस्तार
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलेट्स के निर्यात को बढ़ावा देना
- भारत कोवैश्विक मिलेट हब के रूप में स्थापित करना
लेखक :
डॉ. रेशमा कौशल, कृषि अर्थशास्त्र विभाग, शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर ;बस्तर
डॉ. श्वेता सिंह, कृषि अर्थशास्त्र विभाग, स्वर्गीय श्री पुनाराम निषाद मत्स्य महाविद्यालयए कवर्धा










