जलवायु सहनशील आहार और डेयरी पशुओं के लिए आहार व्यवस्था: पशु स्वास्थ्य और उत्पादन को बनाए रखने और सुधारने के उपाय
डॉ. आनंद कुमार पाठक


भारत में डेयरी उद्योग कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभाव जैसे तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और सूखा डेयरी पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इस संदर्भ में, जलवायु सहनशील (Climate resilient feeds and fodders) चारा प्रजातियाँ, पत्तों से बने मिश्रण (leaf meal mixture), बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स (Multi nutrient blocks), घनीकृत संपूर्ण आहार ब्लॉक्स (Densified complete feed blocks), साइलैज (Silage) और है (Hay) लाभकारी डेयरी उत्पादन के लिए एक प्रभावी समाधान साबित हो सकते हैं। ऐसे में डेयरी पशुओं के लिए जलवायु सहनशील आहार और आहार व्यवस्था को अपनाना न केवल उत्पादन को बनाए रखने के लिए बल्कि इसे सुधारने के लिए भी आवश्यक है। जलवायु सहनशील प्रबंधन का उद्देश्य पशु पोषण के माध्यम से एक संतुलित और समृद्ध डेयरी उद्योग का निर्माण करना है। जलवायु सहनशील चारा प्रजातियाँ, घनीकृत संपूर्ण आहार ब्लॉक्स, बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स, और पत्तों से बने मिश्रण, साइलैज और है का उपयोग लाभकारी डेयरी उत्पादन के लिए समाधान हो सकते हैं। ऐसे में पशुपालन में साइलैज और है का उपयोग भी जलवायु सहनशील आहार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये सभी तरीके पशुओं के लिए पोषण को लंबे समय तक संरक्षित करने और फसलों की बर्बादी को रोकने में सहायक हैं।
जलवायु सहनशील चारा प्रजातियाँ : जलवायु सहनशील चारा प्रजातियों का चयन करना डेयरी पशुओं के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करता है। ये प्रजातियाँ सूखा, गर्मी, और अन्य जलवायु चुनौतियों का सामना कर सकती हैं।
- सूखा-रोधी चारा प्रजातियाँ
नेपियर घास: यह जल्दी बढ़ने वाली घास है जो कई कटाई सह सकती है और सूखे के प्रति सहनशील होती है।
ज्वार और बाजरा: यह अनाज और चारे के लिए उगाई जाने वाली फसलें सूखा प्रतिरोधी हैं।
- पोषक तत्वों से भरपूर चारा
मल्टीकट बरसीम: यह ठंडे मौसम में उगाई जाने वाली चारा फसल है, जो प्रोटीन से भरपूर होती है।
लोबिया और ल्यूसर्न: ये फसलें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर हैं।
- फसल अवशेषों का उपयोग
चावल और गेहूं के भूसे, गन्ने के अवशेष, और मूंगफली के पत्ते जैसे स्थानीय उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है।
- संकर प्रजातियाँ
जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के लिए नेपियर और पर्ल मिलेट जैसी संकर प्रजातियाँ उपयोगी हैं।
जलवायु परिवर्तन और पशु पोषण
जलवायु परिवर्तन पशु पोषण को कई तरीकों से प्रभावित करता है:
- चारे की उपलब्धता और गुणवत्ता में गिरावट : उच्च तापमान और असामान्य वर्षा पैटर्न के कारण चारे और फसलों की उपज में कमी आती है।
- पोषक तत्वों की कमी : जलवायु परिवर्तन से हरी घास और अनाज में पोषक तत्वों की मात्रा घट जाती है।
- पानी की कमी : सूखे और जल स्रोतों के सूखने से पशुओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे उनकी पाचन प्रक्रिया पर असर पड़ता है।
जलवायु सहनशील आहार के सिद्धांत
जलवायु सहनशील आहार में ऐसे पोषक तत्व और चारे शामिल होते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम कर सकें और पशुओं की स्वास्थ्य और उत्पादकता को बनाए रखें। इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- सघन और पोषक तत्व युक्त चारे का उपयोग
- चारे के रूप में गुड़, मूंगफली की खली, सरसों की खली, और मक्का के अवशेष का उपयोग किया जा सकता है।
- उन्नत किस्म की चारा फसलें जैसे नेपियर घास, मल्टीकट बरसीम, और लोबिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- साइलैज और है के उपयोग को बढ़ावा
- साइलैज (Silage): चारे को हवा से रहित करके संरक्षित करना। इसे सूखे के समय उपयोग किया जा सकता है।
- है (Hay): हरी घास को सुखाकर बनाए गए चारे को है कहते हैं। यह लंबे समय तक चारे की कमी को पूरा करता है।
- सूखे क्षेत्रों के लिए फसल विकल्प
- बाजरा, ज्वार और रागी जैसी सूखा प्रतिरोधी फसलों का उत्पादन बढ़ाना।
- स्थानीय रूप से उपलब्ध फसल अवशेषों को आहार में शामिल करना।
- पशु आहार में अनुपूरक पोषण
खनिज मिश्रण और विटामिन का उपयोग: खनिज तत्व जैसे कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम पशु स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।
प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स: पाचन को सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
- पानी का प्रबंधन
- पशुओं को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना।
- जलवायु सहनशील पानी प्रबंधन के लिए बारिश के पानी का संग्रह और जल पुनर्चक्रण तकनीक का उपयोग।
- जलवायु सहनशील पशुआहार तकनीकियाँ
पत्तों से बना मिश्रण (Leaf Meal Mixture):
पत्तों से बने मिश्रण प्राकृतिक और सस्ते पोषक तत्वों का स्रोत हैं।
- पत्तों का चयन
- मोरिंगा (सहजन) के पत्ते: प्रोटीन और विटामिन से भरपूर।
- नीम के पत्ते: एंटीसेप्टिक गुण।
- अर्जुन और बबूल के पत्ते: खनिज तत्वों का अच्छा स्रोत।
- पत्तों से मिश्रण बनाने की प्रक्रिया
पत्तों को सुखाकर चूर्ण बनाया जाता है।
इसे फसल अवशेषों, अनाज, और खनिज तत्वों के साथ मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता । इसे आहार में शामिल किया जाता है।
- लाभ
- सस्ता और स्थानीय रूप से उपलब्ध विकल्प।
- पशुओं के लिए प्राकृतिक औषधीय गुण।
- हरा चारा न मिलने पर वैकल्पिक समाधान।
प्रभावकारी डेयरी उत्पादन के लिए इन उपायों का महत्व
- उत्पादन में सुधार : संतुलित पोषण के कारण दूध और मांस का उत्पादन बढ़ता है।
- कृषकों की आय में वृद्धि :कम लागत और उच्च उत्पादन से डेयरी व्यवसाय लाभकारी बनता है।
- पर्यावरणीय लाभ :फसल अवशेषों का उपयोग करके पर्यावरणीय कचरे को कम किया जा सकता है।
- जलवायु परिवर्तन का समाधान :सूखे और अन्य जलवायु चुनौतियों के बावजूद पशु पोषण सुनिश्चित करना।
चुनौतियाँ और समाधान
- चुनौतियाँ
- जागरूकता की कमी।
- संसाधनों की अनुपलब्धता।
- तकनीकी ज्ञान का अभाव।
- समाधान
- किसानों को प्रशिक्षण देना।
- सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की सहायता।
- सामुदायिक चारा बैंक की स्थापना।
घनीकृत संपूर्ण आहार ब्लॉक्स (Densified Complete Feed Blocks):
घनीकृत संपूर्ण आहार ब्लॉक्स एक नवीन तकनीक है, जो पशुओं को संतुलित पोषण प्रदान करने का सरल और प्रभावी माध्यम है। यह एक ऐसा मिश्रण है जिसमें चारे, अनाज, खनिज और विटामिन को दबाव डालकर एक ब्लॉक के रूप में तैयार किया जाता है। यह सूखा और हल्का होता है, जिसे आसानी से भंडारित और परिवहन किया जा सकता है।
घनीकृत आहार ब्लॉक्स के लाभ
- संतुलित पोषण: ये ब्लॉक्स पशुओं को सभी आवश्यक पोषक तत्व एक साथ प्रदान करते हैं।
- खर्च में कमी: इनसे चारे की बर्बादी कम होती है, जिससे लागत घटती है।
- स्टोरेज और परिवहन में सरलता: इन्हें लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है और दूरस्थ स्थानों तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है।
- उपलब्धता: फसल अवशेषों और स्थानीय चारे का उपयोग करके इन ब्लॉक्स को तैयार किया जा सकता है।
बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स (Multi Nutrient Blocks): बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स (MNB) का उपयोग पशुओं के पोषण को बढ़ाने और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए किया जाता है।
बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स की संरचना
- खनिज तत्व: कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन।
- प्रोटीन स्रोत: मूंगफली की खली, सोयाबीन की खली।
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: जिंक, मैग्नीशियम।
- ऊर्जा स्रोत: गुड़।
बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स के लाभ
- रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि: ये ब्लॉक्स पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
- पाचन सुधार: प्रोटीन और खनिज तत्वों की संतुलित मात्रा पाचन को बेहतर बनाती है।
- उत्पादन में वृद्धि: दूध और मांस उत्पादन में सुधार होता है।
- जलवायु सहनशील आहार: साइलैज और है का महत्व
साइलैज (Silage)
साइलैज एक प्रकार का संरक्षित हरा चारा है, जिसे हवा से रहित (एनेरोबिक) स्थिति में तैयार किया जाता है। यह पशुओं को ऊर्जा और पोषण का उच्च स्रोत प्रदान करता है।
साइलैज बनाने की प्रक्रिया
- फसल का चयन : मक्का, ज्वार, बाजरा जैसी फसलें साइलैज के लिए उपयुक्त होती हैं।
- कटाई और चारा तैयारी : फसल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।
- पैकिंग और भंडारण :चारे को प्लास्टिक बैग, गड्ढे, या साइलो में भरकर हवा रहित तरीके से बंद किया जाता है।
- फर्मेंटेशन प्रक्रिया : 15-20 दिनों में साइलैज तैयार हो जाता है। इसमें लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया चारे को संरक्षित करने में मदद करते हैं।
साइलैज के लाभ
- ऊर्जा का उच्च स्रोत: साइलैज पशुओं को ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे दूध और मांस उत्पादन में सुधार होता है।
- लंबी अवधि तक भंडारण: इसे 1-2 वर्षों तक बिना खराब हुए स्टोर किया जा सकता है।
- सूखे में मददगार: साइलैज सूखे के दौरान हरे चारे की कमी को पूरा करता है।
है (Hay)
है सूखे हुए हरे चारे को कहते हैं, जिसे लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है। यह प्रोटीन, फाइबर, और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है।
है बनाने की प्रक्रिया
- चारा का चयन : नेपियर घास, बरसीम, और ल्यूसर्न जैसी फसलें है के लिए उपयुक्त होती हैं।
- कटाई : चारे को उस समय काटा जाता है जब उसमें पोषण उच्चतम स्तर पर हो।
- सुखाना : चारे को धूप में सुखाया जाता है ताकि उसमें नमी की मात्रा 15-20% तक कम हो जाए।
- भंडारण : सूखे चारे को बंडलों में बांधकर सूखी और हवादार जगह पर रखा जाता है।
है के लाभ
सस्ता और टिकाऊ विकल्प: है कम लागत में पशुओं को पोषण प्रदान करता है।
लंबी अवधि तक उपयोग: इसे कई महीनों तक खराब हुए बिना उपयोग किया जा सकता है।
पाचन में सहायक: फाइबर की अधिकता पाचन को बेहतर बनाती है।
साइलैज और है के जलवायु सहनशील फायदे
- जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन : ये दोनों विकल्प फसलों की बर्बादी को रोकते हैं और सूखे या अनियमित मौसम में पशुओं को पोषण प्रदान करते हैं।
- स्थिर उत्पादन :साइलैज और है पशुओं के लिए स्थायी पोषण स्रोत हैं, जो दूध और मांस उत्पादन को स्थिर रखते हैं।
- कृषकों की आय में सुधार :चारे की कमी से बचाव करके पशुपालकों की आय में वृद्धि होती है।
जलवायु सहनशील आहार प्रबंधन के लाभ
- पशुओं का स्वास्थ्य सुधार : संतुलित आहार से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ती है।
- कृषि उत्पादन में स्थिरता : फसल अवशेषों का उपयोग करने से कृषि कचरे को कम किया जा सकता है।
- पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव : सही आहार प्रबंधन से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है।
- कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार : पशु उत्पादकता बढ़ने से कृषकों की आय में वृद्धि होती है।
जलवायु सहनशील आहार प्रबंधन के लिए रणनीतियाँ
- स्थानीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक का उपयोग : ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चारा संसाधनों का उपयोग। उन्नत कृषि उपकरण और मशीनों का प्रयोग।
- सामुदायिक चारा बैंक : सूखे और आपातकालीन समय के लिए सामुदायिक चारा भंडार स्थापित करना।
- पशु स्वास्थ्य शिविर और प्रशिक्षण : पशुपालकों को जलवायु सहनशील आहार और नई तकनीकों के बारे में जानकारी देना।
- शोध और विकास : नई जलवायु सहनशील चारा प्रजातियों का विकास। पशु आहार में नवाचार को प्रोत्साहन।
निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन के दौर में डेयरी पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य को बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए डेयरी पशुओं के लिए जलवायु सहनशील आहार और आहार व्यवस्था अपनाना समय की मांग है। इसके लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय आवश्यक है। इस प्रकार की व्यवस्था न केवल पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता को बनाए रखेगी, बल्कि किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी।
जलवायु सहनशील चारा प्रजातियाँ, घनीकृत संपूर्ण आहार ब्लॉक्स, बहु-पोषक तत्व ब्लॉक्स, और पत्तों से बने मिश्रण जैसे उपाय डेयरी उद्योग को लाभदायक और टिकाऊ बना सकते हैं। साइलैज और है का उपयोग डेयरी पशुओं के पोषण के लिए एक प्रभावी और जलवायु सहनशील उपाय है। इन तकनीकों को अपनाकर न केवल चारे की कमी को दूर किया जा सकता है, बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता में भी सुधार किया जा सकता है। यह उपाय जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और डेयरी उद्योग को लाभकारी और टिकाऊ बनाने में सहायक सिद्ध होता है।
इन तकनीकों और संसाधनों को अपनाने से न केवल पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। यह उपाय न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य में भी डेयरी उद्योग को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से सुरक्षित रखने में सहायक होंगे।










