नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान : आचार संहिता लागू
नगरीय निकाय में 11 फरवरी को मतदान 15 को मतगणना, पंचायतों में 17, 20 और 23 मतदान


छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है| नगरीय निकाय चुनाव एक चरण में होगा और ग्रामीण क्षेत्र के निकाय में तीन चरणों में मतदान होगा. 22 तारीख से प्रक्रिया शुरु होगी और उसी दिन से नॉमिनेशन फॉर्म की प्रक्रिया शुरु होगी. जो 31 जनवरी तक चलेगी. इसके बाद स्क्रूटनी और नाम वापसी के तारीख के बाद नामों की घोषणा होगा. 11 फरवरी को शहरी क्षेत्र में मतदान होगा औऱ 15 फरवरी को मतगणना होगी।
पंचायत क्षेत्र में 27 जनवरी से नॉमिनेशन 3 फरवरी अंतिम तारीख 4 तारीख स्क्रूटनी, 6 फरवरी को नाम का ऐलान होगा.17, 20 और 23 फरवरी को मतदान होगा. 18 20 और 24 फरवरी को टेबुलेशन होगा.इसके बाद अप्रत्यक्ष रूप से अध्यक्ष पद का चुनाव होगा।
छत्तीसगढ़ में कुल 184 निकाय हैं. जिसमें 14 नगर निगम, 48 नगर पालिका परिषद और 122 नगर पंचायत है.नगर निगम के चुनाव EVM से और पंचायत चुनाव मतपेटी के माध्यम से होंगे. प्रदेश में नगरीय निकायों के अन्तर्गत 10 नगरपालिक निगम, 49 नगरपालिका परिषद्, 114 नगर पंचायतों में आम निर्वाचन और जिला दुर्ग एवं सुकमा के नगरीय निकायों के रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए 05 वार्डों में उप निर्वाचन सम्पन्न कराया जाएगा. साल 2019 की तुलना में इस बार 12 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं में वृद्धि हुई है।
नगरीय निकाय की स्थिति :
- 10 नगर पालिक निगम, 49 नगर पालिका परिषद और 114 नगर पंचायतों में होगा चुनाव
- नगरीय निकाय का निर्वाचन EVM से
- त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से
- नगर पालिकाओं में कुल मतदाता 44 लाख 74 हजार 269
- जिसमें से पुरुष मतदाता 22 लाख 525,
- महिला मतदाता 22 लाख 73 हजार 232
- अन्य मतदाताओं की संख्या 512
- कुल मतदान केंद्र 5970
उप निर्वाचन के लिए 22 मतदान केंद्र - जिसमें से 1531 संवेदनशील मतदान केंद्र
- अतिसंवेदनशील मतदान केंद्र 132
छत्तीसगढ़ में नगर निगम: अंबिकापुर, कोरबा, चिरमिरी, जगदलपुर, दुर्ग, धमतरी, बिलासपुर, बीरगांव, भिलाई, चरोदा, राजनांदगांव, रायगढ़, रायपुर, रिसाली नगर निगम है.
छत्तीसगढ़ में नगर पालिका: अकलतरा, अमलेश्वर, अहिवारा, आरंग, कटघोरा, कुम्हारी, कवर्धा, कांकेर, किरंदुल, कोंडागांव, खरसिया, खैरागढ़, गरियाबंद, गोबरानवापारा, चांपा, जशपुर, जांजगीर नैला, जामुल, डोंगरगढ़, तखतपुर, तिलदानेवरा, दंतेवाड़ा, दल्लीराजहरा, दीपका, नारायणपुर, पंडरिया, बैकुंठपुर, बचेली, बेमेतरा, बलरामपुर, बलौदाबाजार, बांकीमोगरा, बागबाहरा, बालोद, बीजापुर, भाटापारा, मुंगेली, मंदिर हसौद, मनेंद्रगढ़, महासमुंद, रतनपुर, लोरमी, शिवपुरचरचा, सक्ती, सुकमा, सूरजपुर, सरायपाली, सारंगढ़ है. वहीं छत्तीसगढ़ में 122 नगर पंचायत है.
- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत
433 जिला पंचायत सदस्य,
2973 जनपद पंचायत सदस्य,
11672 ग्राम पंचायत सरपंच
1,60,180 ग्राम पंचायत पंच का होगा चुनाव - कुल मतदाता 1 करोड़ 58 लाख 12 हजार 580
पुरुष मतदाता 78 लाख 20 हजार 202
महिला मतदाता 79 लाख 92 हजार 184
अन्य मतदाता 194 - त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन चरण में होगी
- 17, 20 और 23 फरवरी 2025 को
- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का मतगणना
- 18, 21 और 24 फरवरी 2025 को
- परिणाम की घोषणा
- पंच, सरपंच और जनपद सदस्य का खंड स्तर पर 19, 22 और 25 फरवरी को
- जिला पंचायत सदस्य के रिजल्ट की घोषणा जिला मुख्यालय पर 20, 23 और 25 फरवरी 2025 को

आचार संहिता :
शासकीय विभागों एवं कर्मियों के लिए
- निर्वाचन की घोषणा की तारीख से निर्वाचन समाप्त होने तक राज्य सरकार के किसी भी विभाग द्वारा ऐसा कोई आदेश पारित न किया जाए, जिससे चुनाव के सम्यक संचालन में व्यवधान उपस्थित हो (जैसे कि कर्मचारियों के स्थानांतरण) या चुनाव की शुचिता और निष्पक्षता प्रभावित हो, जैसे कि किसी क्षेत्र या वर्ग के मतदाताओं को लाभान्वित करने की दृष्टि से कोई सुविधा या छूट देना या किसी नयी योजना या कार्य के लिए स्वीकृति जारी करना। इसी प्रकार इस अवधि में किसी भी नगरपालिका क्षेत्र के अन्तर्गत किसी निर्माण कार्य, सुविधा विस्तार या विकास कार्य आदि के लिए शासन का कोई भी विभाग निविदायें (टेण्डर) आहूत नहीं करेगा।
- शासकीय कर्मचारियों को चुनाव में बिलकुल निष्पक्ष रहना चाहिए एवं उनके व्यवहार से निष्पक्षता परिलक्षित होना चाहिए। जनता को उनकी निष्पक्षता का विश्वास होना चाहिए तथा उन्हें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे ऐसी आशंका भी हो कि वे किसी दल या उम्मीदवार की मदद कर रहे हैं।
- चुनाव के दौर के समय यदि कोई मंत्री, सांसद, विधायक या स्थानीय निकाय का कोई पदाधिकारी निजी मकान पर अथवा परिसर पर आयोजित किसी कार्यक्रम का आमंत्रण स्वीकार कर लें तो किसी शासकीय कर्मचारी को उसमें शामिल नहीं होना चाहिए। यदि कोई निमंत्रण-पत्र प्राप्त हो तो उसे विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर देना चाहिए।
- किसी सार्वजनिक स्थान पर चुनाव सभा के आयोजन हेतु अनुमति देते समय विभिन्न उम्मीदवारों या राजनैतिक दलों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। यदि एक ही दिन और समय पर एक से अधिक उम्मीदवार या दल एक ही जगह पर सभा करना चाहते हो तो उस उम्मीदवार या दल को अनुमति दी जानी चाहिए जिसने सबसे पहले आवेदन-पत्र दिया है।
- विश्राम गृहों या अन्य स्थानों में शासकीय आवास सुविधा का उपयोग सभी राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों को उन्हीं शर्तों पर करने दिया जाना चाहिए जिन शर्तों पर उनका उपयोग सत्ताधारी दल को करने की अनुमति दी जाती है, परन्तु किसी भी दल या उम्मीदवार को ऐसे भवन या उसके परिसर का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए करने की अनुमति नही दी जानी चाहिए।
- साधारणतः चुनाव के समय जो भी आम सभा आयोजित की जाए उसे चुनाव संबंधी सभा माना जाना चाहिए और उस पर कोई शासकीय व्यय नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी सभा में उन कर्मचारियों को छोड़कर जिन्हें ऐसी सभा या आयोजन में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने या सुरक्षा के लिए तैनात किया गया हो, अन्य कर्मचारियों को शामिल नहीं होना चाहिए।
- यदि कोई मंत्री चुनाव के दौरान जिले के किसी नगरीय क्षेत्र का भ्रमण करे (जहां कि चुनाव होने वाले हों) तो ऐसा भ्रमण चुनावी दौरा माना जाना चाहिए और उसमें सुरक्षा के लिए तैनात कर्मचारियों को छोड़कर अन्य किसी शासकीय कर्मचारी को साथ नहीं रहना चाहिए। ऐसे दौरे के लिए शासकीय वाहन या अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जानी चाहिए।
- निर्वाचन की घोषणा की तारीख से निर्वाचन समाप्त होने तक मंत्रीगण या संसद सदस्यों या विधान सभा सदस्यों द्वारा किसी नगरपालिका क्षेत्र में जहां कि चुनाव होने वाले हों, “स्वेच्छानुदान”, “जनसम्पर्क” या “क्षेत्र विकास राशि में से कोई अनुदान स्वीकृति नहीं किया जाना चाहिए और न ही किसी सहायता या अनुदान का आश्वासन दिया जाना चाहिए।
- इस अवधि के दौरान ऐसे नगरपालिका क्षेत्र के अन्तर्गत किसी योजना का, या नवीन नागरिक सुविधाओं या सेवाओं का भले ही उनका निर्माण राज्य सरकार या संबंधित नगरपालिका द्वारा न किया गया हो या प्रस्तावित हो, शिलान्यास या उद्घाटन नहीं किया जाना चाहिए।
- चुनाव के दौरान समाचार-पत्रों तथा प्रचार के अन्य माध्यमों से, सरकारी खर्चे पर ऐसे विज्ञापन जारी नहीं किए जाने चाहिए जिनमें सत्ताधारी दल की उपलब्धियों को प्रचारित या रेखांकित किया गया हो या जिनसे सत्ताधारी दल को अपने दलीय हितों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती हो।
नगरपालिका के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए
- नगरपालिका कर्मचारियों को चुनाव के दौरान अपना कार्य पूर्ण निष्पक्षता से करना चाहिए और ऐसा कोई आचरण और व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे यह आभास हो कि किसी दल या उम्मीदवार की मदद कर रहे हैं।
- निर्वाचन की घोषणा के दिनांक से निर्वाचन समाप्ति के दिनांक तक :
2.1 नगरपालिका के अधीन कोई नियुक्ति या स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए।
2.2 नगरपालिका क्षेत्र में किसी भी नए भवन का निर्माण या मौजूदा भवन में संवर्धन या परिवर्तन की अनुज्ञा या नये नलों के कनेक्शन की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए।
2.3 नगरपालिका क्षेत्र में किसी प्रकार के व्यवसाय या वृत्ति के लिए अनुज्ञप्ति नहीं दी जानी चाहिए।
2.4 नगरपालिका क्षेत्र में किसी नई योजना या कार्य के लिए स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए। वर्तमान सुविधाओं के विस्तार या उन्नयन का कोई कार्य (जैसे कि किसी सड़क को चौड़ा करना या डामरीकृत करना या नालियों को पक्का करना, नल जल योजना का विस्तार करना, नये हैंडपंप लगाना या नयी स्ट्रीट लाईट लगाना आदि) स्वीकृत या प्रारंभ नहीं किया जाना चाहिए। पहले से स्वीकृत किसी योजना का कार्य, जिसमें निर्वाचन की घोषणा होने तक कार्य प्रारंभ नहीं हुआ हो, प्रारंभ नहीं किया जाना चाहिए और किसी योजना का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं किया जाना चाहिए।
2.5 किसी भी संगठन या संस्था को, किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए कोई सहायता या अनुदान स्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए। महापौर / अध्यक्ष / पार्षदों द्वारा स्वेच्छानुदान राशि में से भी किसी कार्य या गतिविधि के लिए कोई सहायता राशि स्वीकृत नहीं की जानी चाहिए।
2.6 समाचार-पत्रों या प्रचार के अन्य माध्यमों से नगरपालिका के खर्च पर ऐसा कोई विज्ञापन या पैम्पलेट जारी नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें नगरपालिका की उपलब्धियों को प्रचारित या रेखांकित किया गया हो या जिससे किसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने में सहायता मिलती हो,
2.7 नगरपालिकाओं के माध्यम से क्रियान्वित किये जाने वाले परिवार मूलक या व्यक्तिमूलक आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों (जैसे कि रोजगार/ व्यवसाय के लिए सहायता, आवास निर्माण के लिए सहायता, निराश्रित पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन आदि) के अंतर्गत नये हितग्राहियों का चयन नहीं किया जाना चाहिए।
3. किसी प्राकृतिक प्रकोप या दुर्घटना को छोड़कर, जिसमें कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना आवश्यक हो, निर्वाचन की घोषणा से लेकर निर्वाचन समाप्त होने तक की अवधि के दौरान नगरपालिका के किसी पदधारी (जैसे कि महापौर / अध्यक्ष / पार्षद) के क्षेत्रीय भ्रमण को चुनावी दौरा माना जाना चाहिए और ऐसे दौरे में नगरपालिका के किसी कर्मचारी को उनके साथ नहीं रहना चाहिए।












